

सिद्धार्थनगर के मेडिकल कॉलेज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों-विशेषकर हवाई हमले जैसी संभावित स्थितियों से निपटने की तैयारियों को जमीन पर परखना था। ड्रिल के जरिए यह आकलन किया गया कि संकट के समय विभिन्न विभाग, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक किस तरह समन्वय बनाकर त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं।
देखिए पहले तस्वीरें…



मॉक ड्रिल में अपर पुलिस अधीक्षक, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, उपजिलाधिकारी नौगढ़, क्षेत्राधिकारी सदर सहित पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, प्रशासन और नागरिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही नेहरू युवा केंद्र, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड वालंटियर्स और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता की।
अभ्यास की शुरुआत हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन से हुई। सायरन बजते ही मेडिकल कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बंद कर ब्लैकआउट की स्थिति बनाई गई। लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने और अफरा-तफरी से बचते हुए संयम बनाए रखने का अभ्यास किया।

ड्रिल के दौरान अग्निशमन विभाग और स्वयंसेवकों ने आग लगने की स्थिति को नियंत्रित करने का प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य विभाग और वालंटियर्स ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने तथा गंभीर घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया। इस दौरान विभागों के बीच तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष जोर दिया गया।
निर्धारित समय के बाद ‘ऑल क्लियर’ सायरन बजाया गया, जो खतरे के टलने का संकेत था। समापन पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि किसी भी आपात स्थिति में पूर्व अभ्यास, सही सूचना और आपसी समन्वय ही जान-माल की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है। यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।







