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सत्येन्द्र पाठक (बाबूजी) की स्मृति में कैमोर में निःशुल्क नेत्र शिविर में सैकड़ों लोगों ने लिया लाभ

सत्येन्द्र पाठक (बाबूजी) की स्मृति में कैमोर में निःशुल्क नेत्र शिविर में सैकड़ों लोगों ने लिया लाभ

कटनी – कैमोर कर्मयोगी जनसेवा को जीवन का ध्येय मानने वाले स्व. पं. सत्येन्द्र पाठक (बाबूजी) की पुण्य स्मृति में कैमोर नगर परिषद के सहयोग से आयोजित विशाल निःशुल्क नेत्र जाँच एवं मोतियाबिंद शिविर केवल एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता संवेदना और समर्पण का जीवंत उत्सव बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।इस भावनात्मक एवं जनकल्याणकारी शिविर में कुल 210 मरीजों की नेत्र जाँच की गई। जरूरतमंदों की पीड़ा को समझते हुए 56 मरीजों को निःशुल्क चश्मों का वितरण नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती पालक नमित ग्रोवर के करकमलों से किया गया। चश्मा पाते ही मरीजों की आंखों में झलकती खुशी और चेहरे पर उभरी मुस्कान बाबूजी के सेवा-संस्कारों को सच्ची श्रद्धांजलि बन गई। नेत्र परीक्षण के उपरांत 17 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन हेतु चयन किया गया जिनका निःशुल्क ऑपरेशन सुखसागर मेडिकल कॉलेज जबलपुर में किया जाएगा। यह शिविर राहत हेल्थ विज़न मिशन के अंतर्गत आयोजित किया गया जिसके माध्यम से अब तक 700 से अधिक निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक कराए जा चुके हैं जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।बाबूजी की स्मृति में सेवा की अनवरत ज्योति शिविर का सफल आयोजन एवं संचालन राहत समर्पण सेवा समिति एवं ममता आई केयर क्लिनिक के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस पुनीत कार्य को क्षेत्रीय विधायक  संजय सत्येन्द्र पाठक का सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ जिनके नेतृत्व में बाबूजी के सेवा सपनों को धरातल पर साकार किया जा रहा है।कार्यक्रम में कैमोर नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती पालक नमित ग्रोवर  उपाध्यक्ष संतोष केवट पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती मनीषा पप्पू शर्मा सीएमओ मनीष परते  पृथ्वीराज राहत समर्पण सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. शारदा प्रसाद साहू, कृतिक तिवारी विक्रम यादव सहित नगर परिषद के पार्षदगण अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक शिविर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि बाबूजी की स्मृति में किया गया यह सेवा कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगा। यह शिविर न केवल आंखों की रोशनी लौटा गया, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि जब सेवा भावना सच्ची हो तो स्मृतियाँ इतिहास रचती हैं।

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