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साऊंघाट ब्लॉक का ‘सफाई सिंडिकेट’: एडीओ की शह पर झाड़ू छोड़ ‘साहब’ बने सफाई कर्मी!

वसूली का नया अड्डा बना साऊंघाट! सतीश, मुबारक और तुलसी का खौफ, प्रधानों के बजट पर डाका!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🙊 बस्ती: साऊंघाट ब्लॉक में ‘सिंडिकेट राज’, सफाई कर्मियों की कुर्सी के आगे सिस्टम नतमस्तक 🙈

⭐बस्ती का ‘सफाई कांड’: बिना काम के कट रहा वेतन, एडीओ पंचायत सुभाष चंद्र की मेहरबानी का खुला खेल!

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। जनपद के हर्रैया और गौर ब्लॉक के बाद अब साऊंघाट ब्लॉक भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का नया केंद्र बन गया है। यहाँ विकास की झाड़ू लगाने वाले सफाई कर्मी खुद ‘मिनी अफसर’ बनकर दफ्तरों में कुर्सियां तोड़ रहे हैं। आलम यह है कि गाँव कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन एडीओ पंचायत की छत्रछाया में चंद खास सफाई कर्मियों की समानांतर ‘हुकूमत’ चल रही है।

💫झाड़ू छोड़ दफ्तर में ‘साहब’ बने सफाई कर्मी

नियमों के मुताबिक सफाई कर्मियों का काम गांवों की गलियां साफ करना है, लेकिन साऊंघाट ब्लॉक में सतीश कुमार, मुबारक अली और तुलसी राम जैसे कर्मियों ने अपनी अलग ही बिसात बिछा रखी है। सूत्रों का दावा है कि ये कर्मी फील्ड पर जाने के बजाय ब्लॉक दफ्तर में बैठकर बाबूगिरी करते हैं। एडीओ पंचायत सुभाष चंद्र की मेहरबानी का आलम यह है कि ये कर्मी बिना कार्य किए ही सरकारी खजाने से वेतन डकार रहे हैं।

💫वसूली का ‘सिंडिकेट’ और प्रधानों की लाचारी

ब्लाक में चर्चा जोरों पर है कि अधिकारियों ने इन कर्मियों को सफाई के लिए नहीं, बल्कि ‘वसूली’ के लिए तैनात कर रखा है।

🔥सिंडिकेट राज: प्रधानों के खाते में आने वाले विकास कार्यों के बजट में भी यह सफाई कर्मी गिरोह अपना हिस्सा तय कर रहा है।

🔥अघोषित हुकूमत: आम जनता और ग्राम प्रधान इस मनमानी से त्रस्त हैं, लेकिन रसूख और सांठगांठ के चलते उनकी आवाज दबा दी जाती है।

🔥अधिकारियों की चुप्पी: डीपीआरओ (DPRO) को इस पूरे खेल की जानकारी होने की बात कही जा रही है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना सिस्टम की मिलीभगत पर मुहर लगाता है।

“गाँव की नालियां बजबजा रही हैं, गंदगी से बीमारियां फैलने का खतरा है, लेकिन जिन कंधों पर जिम्मेदारी थी, उन्होंने अधिकारियों की सह पर वसूली का झोला उठा लिया है।”

💫प्रमुख सचिव तक पहुंची शिकायत, गिरेगी गाज!

साऊंघाट ब्लॉक में चल रहे इस खुले खेल की गूंज अब शासन तक पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, इन दबंग सफाई कर्मियों और इन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की शिकायत प्रमुख सचिव के पास पहुंच चुकी है। साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी खजाने की लूट और अधिकारियों की बेशर्मी का नग्न नाच देखना हो, तो साऊंघाट ब्लॉक आइए। यहाँ सफाई कर्मी सफाई नहीं, बल्कि ‘सिस्टम की सफाई’ कर रहे हैं। एडीओ पंचायत की काली कमाई के ‘मोहरे’ बने सफाई कर्मी अब गांवों की गलियों के बजाय ब्लॉक की कुर्सियों पर राज कर रहे हैं।

💫कुर्सी का मोह और वसूली का खेल

साऊंघाट ब्लॉक में सतीश कुमार, मुबारक अली और तुलसी राम जैसे सफाई कर्मियों ने खुद को कानून से ऊपर मान लिया है। सूत्रों की मानें तो ये कर्मी अब झाड़ू नहीं उठाते, बल्कि ब्लॉक दफ्तर में बैठकर ‘वसूली का रजिस्टर’ संभालते हैं। एडीओ पंचायत सुभाष चंद्र की सरपरस्ती में यह गिरोह इतना बेखौफ है कि प्रधानों के पास पहुंचने वाले बजट में भी अपना ‘हिस्सा’ पहले तय कर लेता है।

💫डीपीआरओ की चुप्पी पर सवाल?

हैरानी की बात यह है कि जिले के आला अधिकारी (DPRO) सब जानकर भी अंजान बने हुए हैं। क्या इस ‘सिंडिकेट राज’ की मलाई ऊपर तक पहुंच रही है? गांव गंदगी से बजबजा रहे हैं, महामारी का खतरा सिर पर है, लेकिन ये ‘मिनी अफसर’ सरकारी एसी में बैठकर अपनी हुकूमत चला रहे हैं। बिना काम किए वेतन लेना सीधे-सीधे जनता के टैक्स की चोरी है।

💫सत्ता के गलियारों में खलबली

अब यह मामला किसी मामूली अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है। सफाई कर्मियों और अधिकारियों के इस गठजोड़ की फाइल प्रमुख सचिव की मेज पर पहुंच चुकी है। साऊंघाट ब्लॉक में व्याप्त इस भ्रष्टाचार के खिलाफ साक्ष्यों का पुलिंदा तैयार है। शासन की सख्ती से उन अधिकारियों में हड़कंप मचा है जो अब तक इन कर्मियों को अपनी ढाल बनाकर वसूली करवा रहे थे।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन ‘मिनी अफसरों’ को वापस इनके मूल कार्य पर भेजता है या भ्रष्टाचार का यह सिंडिकेट ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।

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