
*लखनऊ :* लखनऊ का 14 वर्षीय किशोर अश्वमित गौतम आज उन सभी के लिए एक मिसाल बन गया है जो व्यवस्था की कमियों पर आँखें मूंद लेते हैं। इंस्टाग्राम पर 6 लाख से अधिक लोगों की आवाज़ बन चुका यह दलित किशोर आज सत्ता के निशाने पर है।
अश्वमित कोई साधारण व्लॉगर नहीं है, बल्कि उसकी सोच की जड़ें शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साहस, धरती आबा बिरसा मुंडा के संघर्ष, महात्मा ज्योतिबा फुले के समाज सुधार और बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के संवैधानिक अधिकारों की विचारधारा में हैं। जब एक बच्चा इन महापुरुषों को पढ़कर ‘राष्ट्रहित’ और ‘समानता’ की बात करता है, तो वह व्यवस्था के लिए खतरा नहीं, बल्कि देश का गौरव होना चाहिए।
जो सरकार एक 14 साल के बच्चे के वीडियो और उसके द्वारा उठाए गए सवालों का सामना नहीं कर सकी, वह वैश्विक मंच पर डोनाल्ड ट्रम्प जैसे नेताओं द्वारा किए जा रहे अपमान का मुंहतोड़ जवाब कैसे देगी?
लोकतंत्र या दमन? क्या भगत सिंह और अंबेडकर की बात करना अब इतना खतरनाक हो गया है कि एक किशोर पर कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं?
हाशिए के समाज से उठकर जब कोई युवा अपनी बौद्धिक क्षमता से सत्ता को आईना दिखाता है, तो उसे दबाने की कोशिश क्यों की जाती है?
यह सिर्फ अश्वमित की लड़ाई नहीं है, यह उस हर नागरिक की लड़ाई है जो लोकतंत्र में यकीन रखता है। यदि आज हम एक बच्चे की आवाज़ के लिए खड़े नहीं हुए, तो कल सवाल पूछने वाली हर ज़ुबान खामोश कर दी जाएगी।








