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हनुमान जयंती पर संकट मोचन महिमा

हनुमान जयंती  हर साल चैत शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस साल हनुमान जयंती 23 अप्रैल यानी कि आज है। आज जन्मोत्सव का पर्व है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी शसरीर हम सभी के आसपास विद्यमान है। और हमारी रक्षा करते हैं। वैसे तो सप्ताह में सभी दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है। लेकिन मंगलवार का दिन हनुमानजी को समर्पित है। वही हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए “हनुमान जन्मोत्सव” का दिन और भी शुभ माना जाता है।

पौराणिक मान्यता अनुसार हनुमान जी के समक्ष किसी भी तरह की कोई भी शक्तियां टिक नहीं सकती है। हनुमान जी पल भर में व्यक्ति के सभी दुख दर्द का हरण कर देते हैं इसलिए उन्हें संकट मोचन कहते हैं।

हनुमान चालीसा पाठ   –

हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के सभी संकटों का नाश होता है और हनुमान जी के साथ -साथ श्री सीताराम जी के समस्त दरबार की कृपा प्राप्त होती है।

एक बार अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को अपनी सभा में बुलाया और उनसे कहा कि मुझे भगवान श्री राम से मिलवाओ। तब तुलसीदास ने कहा भगवान श्री राम केवल अपने भक्तों को ही दर्शन देते हैं। यह सुनते ही अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को कारागार में बंद करवा दिया।

कारागार में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में हनुमान चालीसा लिखी। जैसे ही हनुमान चालीसा लिखने का कार्य पूर्ण हुआ वैसे ही पूरी फतेहपुर सीकरी को बंदरों ने घेर कर उस पर धावा बोल दिया।

अकबर की सेना भी बंदरों का आतंक रोकने में असफल रही। तब अकबर ने किसी मंत्री की परामर्श को मानकर तुलसीदास जी को कारागार से मुक्त कर दिया। उसी समय सभी बंदर सारा क्षेत्र छोड़कर चले गए। इस घटना के बाद गोस्वामी तुलसीदास जी की महिमा दूर-दूर तक फैल गई। और वे महान संत और कवि के रूप में जाना जाने लगे। उनकी रचनाओं में रामचरित मानस भी शामिल है।

रावण के वरदान अनुसार मृत्यु एवं मोक्ष   –

विष्णु जी के राम अवतार के बाद रावण को दिव्य शक्ति प्रदान हो गई जिससे रावण ने अपनी मोक्ष प्राप्ति हेतु शिवजी से वरदान मांगा कि उन्हें मोक्ष प्रदान करने हेतु कोई उपाय बताएं। तब शिवजी ने राम के हाथो मोक्ष प्रदान करने की लीला रची।शिवजी की लीला के अनुसार उन्होंने हनुमान के रूप में जन्म लिया ताकि रावण को मोक्ष दिलवा सके। इस कार्य मे राम जी का साथ देने हेतु स्वयं शिव जी के अवतार हनुमान जी आए थे। जो की सदा के लिए अमर हो गए। रावण के वरदान के अनुसार उन्हें मृत्यु के साथ -साथ उसे मोक्ष भी दिलवाया।

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