
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। रौता चौकी बना नशा तस्करों का ‘सेफ हाउस’, सिपाही काशी की सरपरस्ती में बर्बाद हो रही नस्लें।।
शनिवार 24 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
कप्तानगंज (बस्ती)।। पुलिस की वर्दी का इकबाल तब खत्म हो जाता है जब एक सिपाही तस्करों की ‘पेरोल’ पर काम करने लगे। कप्तानगंज थाने की रौता चौकी पर तैनात सिपाही काशी ने खाकी को सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अवैध वसूली और नशा माफियाओं के लिए सुरक्षा कवच बना लिया है। स्थानीय लोगों में दबी जुबान चर्चा है कि सिपाही की जेब गरम होते ही स्मैक, गांजा और नशीली गोलियों के सौदागरों के लिए कानून के दरवाजे खुल जाते हैं।
🔥वर्दी की आड़ में फल-फूल रहा अवैध कारोबार
सूत्रों की मानें तो रौता चौकी क्षेत्र में नशा माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। युवा पीढ़ी को खोखला करने वाला यह काला कारोबार किसी और के दम पर नहीं, बल्कि कानून के रखवाले काशी सिपाही की शह पर फल-फूल रहा है। चर्चा है कि सिपाही और नशा तस्करों के बीच “गठजोड़” इतना गहरा है कि पुलिस की कार्रवाई की सूचना तस्करों तक पहले ही पहुँच जाती है।
🔥प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
यह केवल एक सिपाही का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरे पुलिस प्रशासन की साख पर बट्टा है। जब रक्षक ही अवैध धंधेबाजों के साथ मिलकर “पार्टनरशिप” करने लगें, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
🔥क्या उच्चाधिकारियों को इस ‘सांठगांठ’ की भनक नहीं है?
क्या जानबूझकर इस सिपाही को रौता चौकी पर खुली छूट दी गई ⭐है?
⭐बस्ती पुलिस के कप्तान इस “वर्दीधारी अपराधी” पर कब हंटर चलाएंगे?
💫 जिस खाकी को देखकर अपराधियों के मन में खौफ होना चाहिए था, आज वही खाकी नशे के सौदागरों के साथ गले मिल रही है। यह सांठगांठ सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि उन अनगिनत पिताओं और माताओं के साथ विश्वासघात है जिनके बच्चे नशे की गर्त में डूब रहे हैं।
पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते “काशी” जैसे भ्रष्ट सिपाहियों को सेवा से बाहर या दंडित नहीं किया गया, तो पुलिस की रही-सही साख भी मिट्टी में मिल जाएगी। जनता अब कार्रवाई का इंतजार कर रही ह—दिखावे की नहीं, बल्कि जड़ से सफाई की।
⭐लाइन-हाजिर नहीं, अब बर्खास्तगी की मांग
क्षेत्र में यह बात अब छिपी नहीं है कि पुलिस की छापेमारी महज एक ड्रामा बनकर रह गई है। जब भी कोई दबिश दी जाती है, ‘खास’ सिपाही के जरिए तस्करों को पहले ही अलर्ट मिल जाता है।
⭐ पुलिस का काम मुखबिर पालना है, लेकिन यहाँ सिपाही खुद नशा माफियाओं का मुखबिर बन बैठा है।
युवाओं का भविष्य दांव पर: रौता चौकी क्षेत्र के आसपास के गांवों में नशे का जाल फैल चुका है। स्कूल-कॉलेज के छात्र इस दलदल में फंस रहे हैं, और सिपाही काशी की सरपरस्ती इन अपराधियों का हौसला बढ़ा रही है।
⭐कप्तान साहब! क्या आप सुन रहे हैं?
बस्ती जनपद के ईमानदार पुलिस कप्तान से जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या एक सिपाही पूरी चौकी और थाने की साख से बड़ा हो गया है?
“वर्दी पर लगे इस ‘काशी’ नाम के कलंक को धोना अब प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर चंद रुपयों की खातिर पुलिस ही सौदागर बन जाएगी, तो बस्ती को अपराध मुक्त बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।”
⭐प्रमुख बिंदु जिन पर उठ रहे सवाल:
🔥अवैध संपत्ति: क्या प्रशासन इस सिपाही की आय और खर्चों की जांच करेगा?
🔥तस्करों से संपर्क: सिपाही के कॉल डिटेल्स (CDR) की जांच क्यों नहीं की जा रही?
👉चौकी इंचार्ज की भूमिका: क्या चौकी इंचार्ज को अपने मातहत की इन करतूतों की जानकारी नहीं है, या वो भी इस ‘मलाई’ के हिस्सेदार हैं?
















