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बस्ती में कानून लहूलुहान: दबंगों ने अधिवक्ता को घर में खींचकर अधमरा किया, अस्पताल के OT तक पहुंचे हमलावर!

वर्दी का खौफ खत्म! वकील की हड्डियां तोड़ीं, अब अस्पताल में दे रहे मौत की धमकी।

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨गुंडाराज के आगे पस्त कानून! बस्ती में अधिवक्ता पर कातिलाना हमला, अस्पताल में भी ‘यमदूत’ बनकर पहुंचे दबंग🚨

⭐खाकी को खुली चुनौती: ऑपरेशन थिएटर के बाहर ‘यमदूत’ बनकर पहरा दे रहे आरोपी, दहशत में वकील का परिवार।

⭐प्रशासन पर सवाल उठाते हुए (Editorial/Special Report के लिए):

⭐अधिवक्ता सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या? बस्ती में ‘गुंडाराज’ का नंगा नाच।

⭐गर्रवाह कांड: सीसीटीवी में कैद हुई हैवानियत, फिर भी पुलिस की पकड़ से दूर क्यों हैं रसूखदार?

⭐इलाज के बीच भी नहीं थमा ‘कहर’: दबंगों की दबंगई से डरा-सहमा पीड़ित परिवार, न्याय की गुहार।

बस्ती मंडल ब्यूरो, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। जनपद के मुंडेरवा थाना क्षेत्र का गर्रवाह गांव इन दिनों खौफ के साये में है। न्याय की पैरवी करने वाले एक अधिवक्ता को दबंगों ने न केवल घर में खींचकर अधमरा कर दिया, बल्कि उनकी निर्भीकता का आलम यह है कि वे अब अस्पताल के गलियारों में भी पीड़ित परिवार को मौत की धमकी दे रहे हैं।

💫घटनाक्रम: रास्ते से खींचकर बाउंड्री में किया ‘लहूलुहान’

जानकारी के अनुसार, 16 मार्च की शाम अधिवक्ता सर्वेश चन्द्र दुबे को गांव के ही रसूखदार दबंगों—अंबिका दुबे, जगदंबिका दुबे, गौरव, हिमांशु और राजकुमार—ने घेर लिया। आरोप है कि पुरानी रंजिश और मुकदमेबाजी से खार खाए इन दबंगों ने अधिवक्ता को जबरन एक बाउंड्री के भीतर खींच लिया। इसके बाद लाठी-डंडों से उन पर तब तक प्रहार किया गया जब तक वे बेहोश नहीं हो गए। हमले की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सर्वेश दुबे का पैर दो जगह से टूट चुका है और शरीर पर 16 गहरे जख्म पुलिसिया इकबाल को चुनौती दे रहे हैं।

💫दुस्साहस: ऑपरेशन थिएटर के बाहर ‘धमकी भरा’ पहरा

दबंगों की हनक यहीं खत्म नहीं हुई। 21 मार्च को जब जिला अस्पताल में घायल अधिवक्ता का ऑपरेशन चल रहा था, तब आरोपी बेखौफ होकर ऑपरेशन थिएटर के बाहर पहुंच गए। पीड़ित की पत्नी प्रीति दुबे का आरोप है कि हमलावरों ने वहां भी परिजनों को डराया-धमकया और समझौते का दबाव बनाया।

“जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और अस्पताल जैसी सुरक्षित जगह पर भी अपराधी खुलेआम घूमें, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?” — पीड़ित परिवार का विलाप

💫प्रशासन के सामने सुलगते सवाल:

सीसीटीवी साक्ष्य के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं? घटना के सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने की बात कही जा रही है, फिर भी पुलिस आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में देरी क्यों कर रही है?

💫अस्पताल की सुरक्षा में चूक: अस्पताल परिसर में घुसकर ऑपरेशन थिएटर के बाहर परिजनों को धमकाने वाले आरोपियों को पुलिस ने तत्काल हिरासत में क्यों नहीं लिया?

💫अधिवक्ताओं में आक्रोश: एक साथी पर हुए इस जानलेवा हमले से जिले के वकीलों में भारी रोष है।

यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा पर प्रहार है। यदि प्रशासन ने त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं की, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे और आम नागरिक का पुलिस से भरोसा उठ जाएगा।

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