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बस्ती महाघोटाला: मातृ वंदना योजना में ₹60 लाख का डिजिटल डाका, लखनऊ साइबर सेल ने संभाली कमान!

डिजिटल सेंधमारी: रुधौली में 1000 फर्जी खातों में भेजी गई सरकारी रकम, सिस्टम के उड़े होश।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती विशेष: सरकारी खजाने में बड़ी सेंध, मातृ वंदना योजना के ₹60 लाख डकारे

  • लखनऊ साइबर सेल की एंट्री से हड़कंप; रुधौली बाल विकास परियोजना के 1000 खातों की होगी फॉरेंसिक जांच
  • बस्ती मंडल विशेष: बिना OTP कैसे पार हुए 60 लाख? मातृ वंदना योजना के फर्जीवाड़े में फंसा विभाग।
  • साइबर सेल की रडार पर ‘सफेदपोश’: डीपीओ से मांगे गए दस्तावेज, जल्द होगा बड़ा खुलासा।
  • पोर्टल हैक या अपनों की मिलीभगत? मातृ वंदना योजना घोटाले की तह तक जाएगी लखनऊ की टीम।
  • 1,512 आवेदनों ने खोली पोल: रुधौली बाल विकास परियोजना में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल उजागर।

बस्ती। प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, लेकिन बस्ती जनपद के रुधौली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था को ही चुनौती दे दी है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) में हुए करीब 60 लाख रुपये के महा-फर्जीवाड़े की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच गई है। स्थानीय जांच में मामला उलझता देख अब साइबर सेल लखनऊ की विशेषज्ञ टीम ने इस वित्तीय घोटाले की कमान संभाल ली है।

कैसे हुआ ‘डिजिटल डाका’?

​यह पूरा प्रकरण किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, रुधौली बाल विकास परियोजना में सितंबर 2025 के दौरान अचानक 1,512 आवेदन स्वीकृत किए गए। जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) राजेश कुमार को जब इस असामान्य संख्या पर शक हुआ, तो उन्होंने छानबीन शुरू की। पड़ताल में पता चला कि योजना के असली पात्र लाभार्थियों को दरकिनार कर, लगभग एक हजार अज्ञात खातों में ₹60 लाख की भारी-भरकम राशि भेज दी गई।

फर्जीवाड़े का खुलासा और पृष्ठभूमि

यह मामला तब प्रकाश में आया जब सितंबर 2025 में रुधौली बाल विकास परियोजना के तहत अचानक 1,512 आवेदनों को स्वीकृत किया गया। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ आवेदनों की स्वीकृति देख जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को संदेह हुआ। जब प्रारंभिक जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • लगभग एक हजार फर्जी खातों में योजना की धनराशि भेजी गई।
  • असली लाभार्थियों के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों में 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।

बिना OTP भुगतान: सिस्टम या मिलीभगत?

​योजना की मानक प्रक्रिया के अनुसार, आवेदन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और सीडीपीओ (CDPO) के स्तर से होकर गुजरता है और हर स्तर पर ओटीपी (One Time Password) की आवश्यकता होती है। इस घोटाले का सबसे पेचीदा पहलू तकनीकी है। नियमानुसार, इस योजना में भुगतान की प्रक्रिया बेहद सुरक्षित है:

  1. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आवेदन करती है।
  2. ​उसके आईडी पर OTP आता है, जिसे दर्ज करने के बाद आवेदन आगे बढ़ता है।
  3. ​इसके बाद सुपरवाइजर और फिर CDPO स्तर पर पोर्टल से सत्यापन होता है, जहां फिर से OTP की जरूरत पड़ती है।

​हैरानी की बात: संबंधित कर्मियों का दावा है कि उन्होंने कोई ओटीपी साझा नहीं किया।

इसके बावजूद एनआईसी (NIC) के तकनीकी पोर्टल के माध्यम से रकम ट्रांसफर हो गई। बिना ओटीपी के भुगतान होना सिस्टम में बड़ी सेंधमारी या तकनीकी हेरफेर की ओर इशारा कर रहा है।

हैरानी की बात यह है कि संबंधित सीडीपीओ, सुपरवाइजर और कर्मियों ने लिखित बयान दिया है कि उन्होंने कोई OTP साझा नहीं किया। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना सिक्योरिटी कोड के पोर्टल से पैसा कैसे ट्रांसफर हो गया? क्या यह पोर्टल की हैकिंग है या फिर विभाग के अंदर ही किसी ने ‘मास्टर की’ का इस्तेमाल किया है?

CRO की टीम ने पकड़ी लापरवाही

​जिलाधिकारी के निर्देश पर सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम (जिसमें मुख्य कोषाधिकारी और डीआईओ-एनआईसी शामिल थे) ने रुधौली पहुंचकर जांच की। टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि:

  • ​निचले स्तर पर पर्यवेक्षण (Supervision) में गंभीर लापरवाही बरती गई।
  • ​बिना सत्यापन के डेटा फीडिंग और ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया गया।
  • ​तकनीकी पोर्टल में बाहरी हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

​जांच का दायरा और वर्तमान स्थिति

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सार्थक अग्रवाल के अनुसार, डीएम की रिपोर्ट के आधार पर साइबर सेल लखनऊ की टीम ने जांच शुरू कर दी है।

अभिलेखों की मांग: साइबर सेल ने जिला कार्यक्रम अधिकारी से उन सभी खातों का विवरण और संबंधित दस्तावेज मांगे हैं जिनमें फर्जी तरीके से पैसा भेजा गया है।

इन पर है नजर: रुधौली परियोजना के सीडीपीओ, कंप्यूटर ऑपरेटर, सुपरवाइजर और संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से पूछताछ की जा रही है।

प्रारंभिक रिपोर्ट: सीआरओ (CRO) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय टीम ने माना है कि निचले स्तर पर पर्यवेक्षण में भारी लापरवाही बरती गई है।

अधिकारी का कथन: > “डीएम द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट पर साइबर सेल से जांच का अनुरोध किया गया था। टीम ने जांच शुरू कर दी है और डीपीओ से संबंधित साक्ष्य व अभिलेख मांगे गए हैं।” > — सार्थक अग्रवाल, मुख्य विकास अधिकारी

​मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सार्थक अग्रवाल ने पुष्टि की है कि साइबर सेल लखनऊ की टीम ने जांच शुरू करते हुए डीपीओ कार्यालय से सभी संदिग्ध खातों का विवरण और डिजिटल लॉग्स मांग लिए हैं। अब उन बैंक खातों के ‘केवाईसी’ (KYC) खंगाले जा रहे हैं जिनमें पैसा गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही इस मामले में कई बड़े चेहरों और बाहरी बिचौलियों की गिरफ्तारी हो सकती है।

योजना का लाभ: क्या है नियम?

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार मां बनने पर ₹5,000 की राशि दो किस्तों में दी जाती है। वहीं, दूसरी बार बेटी होने पर ₹6,000 की एकमुश्त राशि सीधे महिला के खाते में भेजी जाती है। इसी गरीब कल्याण की राशि पर भ्रष्टाचारियों ने हाथ साफ किया है।

 

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