
विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो
पेनकिलर्स के अत्यधिक सेवन से किडनी पर पड़ रहा बुरा प्रभाव : डॉ. धीरज शर्मा
**हरिद्वार**
आधुनिक जीवनशैली में छोटी-छोटी शारीरिक समस्याओं में तुरंत राहत पाने के लिए पेनकिलर दवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। सिरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द अथवा बुखार जैसी सामान्य समस्याओं में लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर रहे हैं, जो भविष्य में किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यह जानकारी प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य एवं शोधकर्ता Dr. Dheeraj Sharma ने दी।
डॉ. शर्मा ने बताया कि दर्द निवारक दवाओं (पेनकिलर्स) विशेषकर NSAIDs वर्ग की दवाओं का अत्यधिक एवं लंबे समय तक सेवन किडनी की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ये दवाएं किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित करती हैं, जिससे धीरे-धीरे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कमजोर होने लगती है। कई मामलों में यह समस्या एक्यूट किड़नी इंज्यूरी तथा क्रोनिक किड़नी डिजीज जैसी गंभीर स्थितियों में बदल सकती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में स्वयं दवा लेने (Self Medication) की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। लोग मेडिकल स्टोर से आसानी से पेनकिलर खरीदकर लगातार सेवन कर लेते हैं, जबकि इन दवाओं का लंबे समय तक उपयोग शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, डिहाइड्रेशन तथा पहले से किडनी रोग से पीड़ित मरीजों में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि कई लोग जोड़ों के दर्द, माइग्रेन, सर्वाइकल दर्द अथवा कमर दर्द में रोजाना दर्द निवारक दवाओं का उपयोग करते हैं। शुरुआत में राहत मिलने के कारण मरीज इन दवाओं पर निर्भर होने लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे शरीर के आंतरिक अंगों, विशेषकर किडनी, पर इसका दुष्प्रभाव दिखाई देने लगता है। लगातार पेनकिलर सेवन से “Analgesic Nephropathy” नामक स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें किडनी की सूक्ष्म संरचनाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि बार-बार दर्द होना शरीर में किसी अन्य रोग का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में केवल दर्द दबाने के बजाय उसके वास्तविक कारण की जांच कराना आवश्यक है। बिना विशेषज्ञ सलाह के दवाओं का सेवन करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर सकता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। आयुर्वेद में भी कई ऐसी प्राकृतिक औषधियां एवं जीवनशैली सिद्धांत बताए गए हैं, जो शरीर में सूजन एवं दर्द को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं तथा शरीर पर अनावश्यक रासायनिक दवाओं का दबाव कम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार थकान महसूस होना, पैरों में सूजन, पेशाब में जलन, पेशाब की मात्रा कम होना, भूख कम लगना, उल्टी आना अथवा शरीर में लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत किडनी जांच करवानी चाहिए। समय रहते जांच और उपचार से गंभीर किडनी रोगों से बचाव संभव है।
अंत में डॉ. शर्मा ने आमजन से अपील की कि वे दर्द निवारक दवाओं का सेवन केवल चिकित्सकीय परामर्श में ही करें तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा एवं डॉक्टर की निगरानी में उपयोग की गई पेनकिलर दवाएं अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन अत्यधिक उपयोग किडनी सहित शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।





