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पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में खलारी कोयलांचल ठप, सड़कों पर उतरे आदिवासी संगठन।।

पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में खलारी कोयलांचल ठप, सड़कों पर उतरे आदिवासी संगठन।।

रिपोर्टर/राशीद अंसारी 

खलारी। खूंटी के चर्चित आदिवासी नेता व पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत झारखंड बंद का खलारी कोयलांचल क्षेत्र में व्यापक असर देखने को मिला। बंद के कारण पूरे इलाके में जनजीवन लगभग ठप रहा। केडी मुख्य बाजार, डकरा, खलारी मुख्य बाजार, खलारी शहीद चौक, बैंक ऑफ इंडिया चौक सहित आसपास के सभी प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र पूरी तरह बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और आम दिनों की तुलना में आवाजाही काफी कम रही।

बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखा गया। मेडिकल दुकानें एवं स्कूल खुले रहे, हालांकि उनमें भी सामान्य दिनों की अपेक्षा कम गतिविधि देखी गई। बंद को सफल बनाने के लिए आदिवासी संगठनों के कार्यकर्ता सुबह से ही विभिन्न इलाकों में घूम-घूमकर दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करने की अपील करते नजर आए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या को आदिवासी समाज पर हमला बताते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई तथा कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी की मांग की। नेताओं ने कहा कि जब तक हत्यारों को सजा नहीं मिलती, तब तक आदिवासी समाज शांत नहीं बैठेगा।

मौके पर मौजूद आदिवासी नेता रंथू उरांव ने इस हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना करार देते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सोमा मुंडा जैसे समाजसेवी नेता जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हमेशा संघर्षरत रहे और उनकी हत्या से पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश है। सरकार को चाहिए कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाए।

वहीं रामलखन गंझू और अमृत भोगता ने कहा कि पड़हा राजा सोमा मुंडा आदिवासी समाज के धर्म अगुआ थे और समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व थे। ऐसे व्यक्ति की हत्या की आदिवासी समाज कड़ी निंदा करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

देवपाल मुंडा ने कहा कि इस बंद के माध्यम से आदिवासी समाज यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर त्वरित कार्रवाई की जाए और मृतक के परिजनों को सम्मानपूर्वक न्याय मिले। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की हत्या का विरोध नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

बंद के दौरान रामलखन गंझू, रंथू उरांव, राजकुमार उरांव, अमृत भोगता, जालिम सिंह, कन्हाई पासी, पंकज मुंडा, किशन मुंडा, वीरेंद्र मुंडा, जोगिंदर मुंडा, सुभाष उरांव, महेंद्र उरांव, चरका मुंडा, नीरज उरांव, प्रभाकर गंझू, हरक बहादुर थापा, मलका मुंडा, अमित गंझू, मनोज मुंडा, विनय मुंडा, राजेश मुंडा, लालजी मुंडा, रामलखन मुंडा, सनी लोहार, लालचंद विश्वकर्मा, रमेश तुरी, हैदर अली, शनि उरांव, राहुल गंझू, सोहराय गंझू, मंटू मुंडा सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे।

बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, हालांकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे क्षेत्र में नजर बनाए हुए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

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