उज्जैन में 2028 में भरने वाले सिंहस्थ महापर्व के दौरान प्रयागराज महाकुम्भ में मची भगदड़ जैसी घटनाएं दोबारा न हों, इसको लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में हलचल तेज हो गई हैं. PMO के निर्देश पर प्रयागराज कुम्भ की व्यवस्थाओं से जुड़े आला अफसर तीन दिन के दौरे पर 7 अप्रैल को उज्जैन पहुंच रहे हैं. ये टीम पता करेगी की सिंहस्थ को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के स्तर पर कितनी पुख्ता तैयारियां की जा रही हैं.
सूत्रों के अनुसार चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन के गत 27 मार्च के उज्जैन दौरे ने PMO के कान खड़े कर दिए हैं. राज्य की सेवाओं में वापस आने से पहले उन्होंने एक लम्बा अरसा पीएमओ में बिताया है. उज्जैन प्रवास के दौरान CS ने न सिर्फ सिंहस्थ तैयारियों की मैदानी हकीकतों की पड़ताल की, बल्कि एक बैठक के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारिओं की भी जमकर क्लास ली. CS ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया जब वास्तविकता के इतर एक जिम्मेदार अधिकारी ने प्रेजेंटेशन के दौरान दावा ठोक दिया कि उज्जैन आने वाले मक्सी रोड सहित सभी मार्गों को फोर लेन में तब्दील करने का कार्य आरम्भ हो चुका है. कई विभागीय अफसर भी उनके निशाने पर आए. क्षिप्रा नदी के जल को स्वच्छ करने, उज्जैन पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण और रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर वे असंतुष्ट दिखाई दिए.
बताया जाता है कि मुख्य सचिव ने अपने स्तर पर PMO को उज्जैन के सिंहस्थ आयोजन को लेकर ब्रीफ किया. यही कारण है कि PMO ने प्रयागराज से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को उज्जैन जाकर सिंहस्थ की तैयारियों का विस्तार से जायज़ा लेने के निर्देश दिए हैं. सरकारी दावों के अनुसार फरवरी 2025 में प्रयागराज में संपन्न महाकुम्भ में देश-विदेश से कोई 65 करोड़ लोग वहां पहुंचे थे. उत्तर प्रदेश सरकार को 45 करोड़ लोगों के महाकुम्भ में आने का पूर्वानुमान था. मुकम्मल व्यवस्था के तमाम दावों के बीच 45 दिन की अवधि में प्रयागराज पहुंचने वाले सभी मार्गों पर यातायात व्यवस्था बेहाल हो गई थी. गंगा नदी के कतिपय घाटों पर भगदड़ मचने की घटनाओं में दर्जनों श्रद्धालुओं को अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ा था. जाहिर तौर पर केंद्र की मोदी सरकार प्रयागराज में घटी इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति उज्जैन सिंहस्थ में नहीं होने देना चाहेगी.
कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कंफर्म किया कि सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करने प्रयागराज से एक पांच सदस्यीय प्रशासनिक दल 7 अप्रैल को उज्जैन आ रहा है. उनके अनुसार दल में शामिल मेला अधिकारी और अन्य सदस्य मैदानी तैयारियों का अवलोकन करेंगे और विभिन्न विभागों की बैठक लेकर कार्य योजनाओं के सम्बन्ध में मार्गदर्शन भी करेंगे. ये दल 9 अप्रैल तक उज्जैन में रहेगा और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा.
पिछले एक साल से सिंहस्थ की तैयारियों में लगे अधिकारियों ने अनुमान लगाया है कि कोई 15 करोड़ लोग 30 दिन की अवधि में उज्जैन आएंगे. सो, करीब 20 हजार करोड़ रुपए की कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है. सिंहस्थ 2016 में 7 करोड़ लोगों के उज्जैन पहुंचने का दावा किया गया था और समूची आयोजना पर लगभग 3500 करोड़ रुपए खर्च करना बताए गए थे. ? ज्ञान प्रकाश तिवारी
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