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बहादुरपुर CHC के डेंटल हाइजिनिस्ट की दबंगई उजागर; खुद ही रजिस्टर पर भरी छुट्टी, नियम ताक पर, ड्यूटी से ‘लापता’ कर्मचारी हरदिया चौराहे पर कर रहा प्राइवेट प्रैक्टिस।

सरकारी वेतन की मलाई, निजी क्लीनिक पर कमाई: बहादुरपुर CHC का डेंटल हाइजिनिस्ट रंगे हाथ पकड़ा गया। सिस्टम को ठेंगा: अस्पताल की OPD में ताला, खुद ही रजिस्टर पर छुट्टी लिख निजी क्लीनिक पर नोट छाप रहे साहब।

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की ‘उन्नति’: सरकारी अस्पताल में ताला, निजी क्लिनिक पर नोटों की माला!

विशेष रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी)

  • खोजी’ स्टिंग: सरकारी अस्पताल से ‘फरार’ होकर प्राइवेट दुकान चमका रहे डेंटल हाइजिनिस्ट का भंडाफोड़!
  • साहब की दबंगई: न नोटिस का खौफ, न अधिकारी का डर; छुट्टी खुद तय की और शुरू कर दी निजी प्रैक्टिस।
  • बस्ती में स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी: मरीज बनकर पहुंची मीडिया टीम के हत्थे चढ़े ‘झोलाछाप’ बने सरकारी कर्मचारी।
  • बहादुरपुर CHC में कब तक चलेगा ‘लूट का खेल’? ड्यूटी के समय प्राइवेट क्लीनिक पर दांत चमका रहे कर्मचारी पर कब होगी बर्खास्तगी?
  • अधीक्षक का नोटिस भी बेअसर: आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है हरीश गुप्ता का निजी कारोबार?
  • जनता बेहाल, कर्मचारी मालामाल: सरकारी रजिस्टर पर खुद ही ‘छुट्टी’ लिखकर गायब होने का नया खेल उजागर।
  • बेखौफ भ्रष्टाचार: सरकारी ड्यूटी गोल, प्राइवेट प्रैक्टिस फुल! उन्नति डेंटल क्लीनिक: सरकारी कर्मचारी की ‘प्राइवेट उन्नति’ का पर्दाफाश।

ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उ.प्र.)

बहादुरपुर (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यस्थल पर रहने की सख्त हिदायत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जिले के बहादुरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात कर्मचारी सरकार के इन आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यहाँ तैनात डेंटल हाइजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता ने सरकारी सेवा को मजाक बना दिया है। ड्यूटी से नदारद रहकर साहब हरदिया चौराहे पर स्थित अपने निजी ‘उन्नति डेंटल क्लीनिक’ पर प्राइवेट प्रैक्टिस की ‘उन्नति’ करने में व्यस्त हैं।उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार भले ही सख्त निर्देश दे रही हो, लेकिन बस्ती जनपद के बहादुरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात जिम्मेदार कर्मचारी ही इसे दीमक की तरह चाट रहे हैं। ताजा मामला बहादुरपुर CHC पर तैनात डेंटल हाइजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता का है, जो सरकारी अस्पताल से नदारद रहकर अपने निजी क्लिनिक ‘उन्नति डेंटल क्लीनिक’ पर चांदी काटने में मशगूल हैं।

रजिस्टर पर खुद बने ‘साहब’: नियमों को ठेंगे पर रखा

मीडिया की ‘खोजी’ टीम ने जब धरातल पर पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। सीएचसी बहादुरपुर की ओपीडी के कमरे में ताला लटका मिला और मरीज बेहाल दिखे। जब उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच की गई, तो पता चला कि हरीश कुमार गुप्ता ने किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना तो दूर, खुद ही रजिस्टर पर लगातार 4 दिनों की कैजुअल लीव (CL) अंकित कर दी थी। नियमानुसार, कोई भी कर्मचारी एक साथ केवल 3 दिन की ही सीएल ले सकता है, लेकिन यहाँ तो ‘सैंया भए कोतवाल’ वाली स्थिति नजर आई।मामला तब गरमाया जब मीडिया की टीम ने धरातलीय पड़ताल शुरू की। बुधवार और सोमवार को लगातार किए गए निरीक्षण में डेंटल हाइजिनिस्ट की ओपीडी के कमरे में ताला लटका मिला। हैरत की बात तो यह है कि उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) पर कर्मचारी ने शासनादेशों को ताक पर रखकर पहले ही चार दिनों की कैजुअल लीव (CL) खुद ही दर्ज कर दी, जबकि नियमतः एक बार में अधिकतम तीन दिन की ही सीएल ली जा सकती है।

मरीज बनकर पहुंची मीडिया टीम, रंगे हाथ पकड़े गए साहब

जब यह सूचना मिली कि साहब अपनी निजी दुकान पर दांत चमका रहे हैं, तो मीडिया टीम मरीज बनकर हरदिया चौराहे स्थित उनके क्लीनिक पहुंची। जैसे ही हरीश कुमार गुप्ता ने मीडिया कर्मी का इलाज शुरू किया, उनका पूरा काला कारनामा कैमरे में कैद हो गया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। जब सूत्रों से जानकारी मिली कि साहब हरदिया चौराहे पर अपनी प्राइवेट दुकान चला रहे हैं, तो मीडिया टीम मरीज बनकर वहां पहुंच गई। जैसे ही हरीश कुमार गुप्ता ने ‘मरीज’ के दांतों का इलाज शुरू किया, उनकी यह करतूत कैमरे में कैद हो गई। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल चुका है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी है।

अधीक्षक के नोटिस को भी किया दरकिनार

हैरानी की बात यह है कि सीएचसी प्रभारी डॉ. पवन वर्मा ने पूर्व में ही उनके गायब रहने का संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था और 2 दिन के भीतर जवाब मांगा था। लेकिन साहब के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने न तो नोटिस का जवाब देना उचित समझा और न ही अस्पताल आना। बता दें कि सीएचसी अधीक्षक डॉ. पवन वर्मा ने पहले ही बिना सूचना गायब रहने पर इन्हें नोटिस जारी कर 2 कार्य दिवस में जवाब मांगा था। लेकिन साहब को न तो विभाग का डर है और न ही जनता की सेवा की फिक्र।

अधिकारियों का रुख: होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

इस गंभीर मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम और नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि सरकारी कर्मचारी द्वारा निजी प्रैक्टिस करना और ड्यूटी से बिना सूचना गायब रहना अक्षम्य है। तत्काल जांच के आदेश दे दिए गए हैं और आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की तैयारी है।मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव निगम और नोडल अधिकारी डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा में रहकर निजी प्रैक्टिस करना और ड्यूटी से गायब रहना गंभीर अपराध है। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ जांच बैठा दी गई है और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

खोजी नजरिया:

सरकारी वेतन की मलाई और प्राइवेट क्लीनिक की कमाई—यह दोहरा खेल बहादुरपुर में लंबे समय से चल रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या विभाग ऐसे ‘लापरवाह’ कर्मचारियों को केवल नोटिस देकर छोड़ देगा या फिर बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई कर जनता के विश्वास को बहाल करेगा? सरकारी अस्पताल में गरीब जनता दांत के दर्द से कराहती रही और साहब अपने निजी क्लिनिक पर नोट छापने में व्यस्त रहे। अब देखना यह है कि जांच के नाम पर महज खानापूर्ति होती है या फिर ऐसे भ्रष्ट तंत्र पर प्रशासन का चाबुक चलता है?

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