
रांची के बुढ़मू में मनरेगा कर्मियों का हल्ला बोल, 6 महीने से मानदेय नहीं; 9–11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल, मांगें न मानी तो अनिश्चितकालीन आंदोलन।।
रिपोर्टर/राशीद अंसारी
रांची बुढ़मू। रांची के बुढ़मू प्रखंड के मनरेगा कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। रोजगारसेवक समीम अख्तर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कर्मियों ने 9 मार्च से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
कर्मियों ने कहा कि पिछले छह महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, जिसके कारण वे और उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे हालात में काम करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने राज्य सरकार से राजस्थान और ओडिशा की तर्ज पर मनरेगा कर्मियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
हड़ताल को विधायक प्रतिनिधि शमीम बडियार ने भी समर्थन देते हुए सरकार से मनरेगा कर्मियों की जायज मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। वहीं झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की कमिटी ने भी मुख्यमंत्री से कर्मियों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
संघ की ओर से मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में मनरेगा योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कार्यरत कर्मचारियों के सेवा हित में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। संघ ने प्रमुख मांगों में मनरेगा कर्मियों के स्थायीकरण या समायोजन को शामिल किया है।
संघ का कहना है कि भर्ती नियमों में संशोधन कर कर्मचारियों को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर अन्य सरकारी विभागों में समायोजित किया जा सकता है। इसके तहत ग्राम रोजगार सेवकों को पंचायत सचिव या पंचायत स्तर के स्थायी पदों पर, लेखा एवं कंप्यूटर सहायकों को उच्च वर्गीय सहायक तथा तकनीकी सहायकों को कनीय अभियंता और सहायक अभियंता के पदों पर समायोजित करने की मांग की गई है। वहीं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी को प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षक संवर्ग के स्थायी पदों पर नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इसके अलावा संघ ने वेतन और भत्तों में सुधार की मांग करते हुए ग्रेड पे, वार्षिक वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और मोबाइल भत्ता देने की मांग उठाई है।
संघ ने सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस और मृत्यु पर मुआवजा जैसी सुविधाएं लागू करने की मांग भी की है। साथ ही सेवा सुरक्षा, पदोन्नति के अवसर, अवकाश की सुविधा और अन्य सरकारी नियुक्तियों में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की भी बात कही गई है।
प्रशासनिक सुधारों के तहत वर्ष 2007 की नियुक्ति एवं सेवा शर्त नियमावली में संशोधन कर मनरेगा कर्मियों के लिए हितकारी नियम लागू करने तथा वेतन और भत्तों के भुगतान के लिए राज्य सरकार से अलग बजट प्रावधान करने की मांग भी उठाई गई है।
अन्य मांगों में प्रत्येक प्रखंड में एक ही प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी की नियुक्ति, पूर्व में बर्खास्त कर्मियों को अपील का अवसर देने तथा अब तक मृत मनरेगा कर्मियों के परिवारों को 30 लाख रुपये मुआवजा और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग शामिल है।
इस मौके पर रमेश बेक, रणजीत कुमार, ऋषिराज जायसवाल, हेमंत कुमार, उमेश कुमार वर्मा, बालेश्वर महतो, जैनुल हक, गुरुदयाल, राजेश गुप्ता समेत कई रोजगार सेवक मौजूद थे।






