
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। सिद्धार्थनगर – श्री साईं फार्मा क्लीनिक निकला अवैध, इलाज के दौरान शिशु की मौत के बाद प्रशासन सख्त।।
21 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।
सिद्धार्थनगर ।। जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे मौत के खेल का पर्दाफाश हुआ है. बर्डपुर स्थित ‘श्री साईं फार्मा क्लीनिक’ में इलाज के दौरान एक नवजात की मौत के मामले में जब जांच शुरू हुई, तो पता चला कि यह पूरा अस्पताल ही अवैध है। बिना किसी रजिस्ट्रेशन और बिना मानकों के चल रहे इस क्लीनिक में धड़ल्ले से सर्जरी और डिलीवरी की जा रही थी।
DM के आदेश पर मची खलबली-
मीडिया में खबर आने के बाद जिलाधिकारी शिव शरणप्पा जी.एन. ने मामले को गंभीरता से लिया. उनके कड़े रुख के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। इस टीम में एडिशनल CMO संजय गुप्ता, एडिशनल CMO डॉ. आशीष अग्रहरी और बर्डपुर CHC अधीक्षक डॉ. सुबोध चंद्र को शामिल किया गया है।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य आए सामने-
जांच टीम की शुरुआती पड़ताल में ही क्लीनिक की पोल खुल गई। महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
⭐ शून्य पंजीकरण: क्लीनिक के पास OPD, डिलीवरी या ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग का कोई वैध लाइसेंस नहीं है।
⭐ अवैध सर्जरी: बिना अनुमति के यहां न केवल डिलीवरी करवाई जा रही थी, बल्कि गंभीर ऑपरेशन और टांके लगाने जैसे काम भी किए जा रहे थे।
आशाओं का सिंडिकेट:
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कुछ आशा कार्यकर्ता कमीशन के लालच में सरकारी अस्पतालों के बजाय गर्भवती महिलाओं को इस अवैध क्लीनिक में भेजती थीं।”क्लीनिक का कोई पंजीकरण नहीं मिला है. यह पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित था. जांच अभी जारी है और सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.” -डॉ. सुबोध चंद्र, अधीक्षक, CHC बर्डपुर।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल-
पीड़ित पिता आशीष ने इस मामले की शिकायत पहले ही CMO कार्यालय में की थी, लेकिन तब इसे नजरअंदाज कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि जिला मुख्यालय से चंद दूरी पर इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कैसे चल रहा था? जिले में ऐसे कई अस्पताल हैं जो दूसरे शहर के डॉक्टरों की डिग्री पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि वहां कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं रहता।
आगे की राह-
फिलहाल पीड़ित परिवार को डीएम के हस्तक्षेप के बाद न्याय की उम्मीद जगी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन केवल इस एक क्लीनिक को सील करके शांत बैठ जाता है या जिले में फैले फर्जी अस्पतालों के पूरे मकड़जाल पर बुलडोजर चलता है।
















