
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, मंगलवार 27 जनवरी 2026

=====> मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी और नेताओं को प्रवेश देने का मामला अब उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया है। मालूम हो कि इसके पूर्व इस मामला की सुनवाई उच्च न्यायालय में की गई थी। आज 27 जनवरी मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने मंदिर के गर्भगृह मे वीआईपी प्रवेश याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में अपना हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा मामला खारिज करने के बाद अब इंदौर उच्च न्यायालय का फैसला महाकाल मंदिर समिति पर लागू रहेगा, जिसमें कि उज्जैन के कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे यह तय कर सकें कौन वीआईपी है और कौन वीआईपी नहीं है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में दर्शन से रोक लगाए जाने के बाद इंदौर के अधिवक्ता ने उच्चतम में याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि पूरे देशभर से लाखों की संख्या में श्राद्धालु भक्तगण महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आते है परन्तु उन्हें मंदिर के गर्भगृह के बाहर ही दर्शन के लिए रुकना पड़ता है। जबाकि नेताओं और प्रभावशाली लोगों को आसानी से गर्भगृह मे प्रवेश और पूजा अर्चना का अवसर मिल जाता है। आज मंगलवार को इस मामले में सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को यथावत रखा और याचिका कर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा गया। लगभग छह माह पूर्व इंदौर उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि महाकाल मंदिर गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा इसे तय करने का अधिकार उज्जैन के कलेक्टर के पास है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी विशेष व्यक्ति को गर्भगृह मे प्रवेश की अनुमति देते है तो उसे वीआईपी माना जायेगा।




