
मानव अधिकारों की सुरक्षा और प्रभावी प्राप्ति के लिए लोकतंत्र सर्वोपरि -शिवानी जैनएडवोकेट

ऑल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अनुसारअंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, नागरिक स्वतंत्रता और कानून के शासन को बनाए रखने, जवाबदेह संस्थाओं को सुनिश्चित करने और मानव अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के महत्व पर बल देने का एक अवसर है।
थिंक मानवाधिकार संगठन एडवाइजरी बोर्ड मेंबर एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ कंचन जैन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है। लोकतंत्र एक लक्ष्य के साथ-साथ एक प्रक्रिया भी है, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, राष्ट्रीय शासी निकायों, नागरिक समाज और व्यक्तियों की पूर्ण भागीदारी और समर्थन से ही लोकतंत्र के आदर्श को हर जगह, हर किसी के द्वारा आनंदित किए जाने योग्य वास्तविकता में बदला जा सकता है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक मानव अधिकार है, जो मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 19 में निहित है। लेकिन दुनिया भर में ऐसी सरकारें और सत्ताधारी लोग हैं जो इसे बाधित करने के कई तरीके ढूंढते हैं।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक आलोक मित्तल एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, बृजेश शुक्ला एडवोकेट,डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट, मीरा एडवोकेट आदि ने कहा कि प्रतिवर्ष
15 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है। इसे विश्व लोकतंत्र दिवस के रूप में भी जाना जाता है , यह दिन लोकतंत्र के समुचित संचालन के लिए सभी सदस्य देशों की भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डालता है।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ



