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आउटसोर्स कर्मचारी निगम” बनाए जाने के निर्णय का स्वागत

आउटसोर्स कर्मचारी निगम” बनाए जाने के निर्णय का स्वागत

लखनऊ।

वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के माध्यम से हमने प्रदेश के 8 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण के खिलाफ़ लगातार आवाज उठाई। यशस्वी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आउटसोर्स कर्मियों को सेवा प्रदाता एजेंसियों के चंगुल से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई
मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया एवं “आउटसोर्स कर्मचारी निगम” बनाए जाने का निर्णय लिया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने माननीय मुख्यमंत्री के निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष के नाते हमने 2025 का वर्ष आउटसोर्स कर्मियों को शोषण से मुक्ति दिलाने के नाम समर्पित किया है। मुख्यमंत्री की घोषणा इस दिशा में पहला कदम है।”आउटसोर्स कर्मचारी निगम” का गठन लगभग पूरा हो चुका है लेकिन सेवा प्रदाता एजेंसियों एवं भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ एक बार पुनः इसमें बाधक बनती नजर आ रही है।

सरकार के परामर्शी विभागों ने आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय भुगतान की व्यवस्था को यथावत बनाए रखने का सुझाव मुख्यमंत्री को दिया है। इसका तात्पर्य यह है कि आउटसोर्स कर्मी अपने मानदेय का भुगतान सेवा प्रदाता एजेंसियों से ही प्राप्त करेंगे? जैसा कि पहले प्राप्त कर थे। आउट सोर्स कर्मियों के शोषण का मुख्य स्रोत सेवा प्रदाता एजेंसियां ही है। उनकी दखलअंदाजी खत्म करने के लिए ही “आउटसोर्स कर्मचारी निगम” की स्थापना की जा रही है, परंतु यदि मानदेय का भुगतान सेवा प्रदाता एजेंसियां ही करेंगी तो कर्मियों का शोषण बरकरार रहेगा।

सेवा प्रदाता एजेंसियों द्वारा कम मानदेय दिए जाने की लगातार शिकायत एवं कर्मचारियों के मानदेय से जीएसटी काटे जाने की शिकायत के कारण ही l मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को शोषण से मुक्ति दिलाया जाने का कदम उठाया लेकिन स्थिति फिर वही बनती नजर आ रही है। सरकार द्वारा सेवा प्रदाता एजेंसियों को कमीशन दिया जाता है ,जीएसटी देना भी सेवा प्रदाता एजेंसी का ही उत्तरदायित्व है, लेकिन फिर भी एजेंसियां जीएसटी कर्मचारियों से लेती है।

एजेंसियां सरकार से कमीशन भी लेती है, कर्मचारी से जीएसटी भी लेती है। सेवा प्रदाता एजेंसियां न केवल आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं अपितु सरकार को भी चूना लगा रही है। लगभग 44% का कमीशन एवं जी एस टी सेवा प्रदाता एजेंसियां ले रही हैं ।

ठेकेदार एवं भ्रष्ट अफसरों के गठजोड़ को समाप्त करने के लिए ही मुख्यमंत्री ने “आउटसोर्स कर्मचारी निगम” का गठन किया है लेकिन सेवा प्रदाता एजेंसियों के दबाव में एक बार फिर भ्रष्टाचार का नया रास्ता खुलता नजर आ रहा है। आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय का भुगतान सेवा प्रदाता एजेंसी के माध्यम किए जाने का निर्णय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा।

मुख्यमंत्री कृपया इस पर विशेष ध्यान देने की कृपा करें।सेवा प्रदाता एजेंसी- भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ को समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठाते हुए मानदेय का भुगतान निगम के माध्यम से सीधे आउटसोर्स कर्मियों के खाते में भुगतान कराने की कृपा करें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो कर्मियों का शोषण बरकरार रहेगा। हां यह जरूर होगा कि इस बीच कई ऐसे माध्यम उत्पन्न हो जाएंगे जहां पर सरकारी बजट की बंदरबांट शुरू हो जाएगी।

मुख्यमंत्री आउटसोर्स कर्मियों पर अपनी कृपा बनाए रखें एवं उनका शोषण समाप्त करने की दिशा मे बाधक बन रहे एजेंसियों एवं भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ के मंसूबे पर विराम लगाते हुए आउटसोर्स कर्मियों को शोषण से मुक्ति दिलाने की कृपा करें।

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