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नागभीड में किसानों का जनआक्रोश: बाघ को पकड़ने में नाकामी पर वन विभाग का घेराव

समीर वानखेडे ब्यूरो चीफ:

चंद्रपुर जिले के नागभीड तहसील अंतर्गत मींथुर इलाके में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों किसानों ने घटनास्थल पर इकट्ठा होकर वन विभाग और स्थानीय विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और घेराव किया। बाघ को तुरंत पकड़ने और मुआवजा देने की मांग को लेकर माहौल गर्मा गया है।

4 अप्रैल को मींथुर में खेत में महुआ बीन रहे 58 वर्षीय हरिदास कुबडे पर बाघ ने हमला कर उनकी जान ले ली। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के किसानों में दहशत है। इसी के चलते आज सैकड़ों किसान घटनास्थल पर जमा हुए और वन विभाग की लापरवाही के खिलाफ आक्रामक हो गए।

18 मार्च को दी थी सूचना, फिर भी अनदेखी
ग्रामीणों का आरोप है कि 18 मार्च को ही कुमदेव म्हशाखेत्री के खेत में बाघ दिखने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया और नतीजतन एक बेकसूर किसान की जान चली गई।

150 हेक्टेयर खेती ठप, बाघ का खौफ बरकरार
जहां कुबडे की मौत हुई, उस इलाके में करीब 150 हेक्टेयर खेती है। फिलहाल मक्का और धान की फसल खड़ी है, लेकिन बाघ के डर से किसान खेतों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। किसानों ने बताया कि इलाके में बाघ, बाघिन और शावकों को मिलाकर करीब पांच बाघ हैं। इससे खेती का भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने मांग की है कि या तो बाघों को तुरंत पकड़ा जाए या फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए।

आश्वासनों से हो रही फजीहत
किसानों का आरोप है कि वन विभाग ने 6 अप्रैल को चार दिन में बाघ पकड़ने का आश्वासन दिया था। फिर 9 अप्रैल को दो दिन में कार्रवाई की बात कही गई। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। “सिर्फ आश्वासन देकर हमारा मजाक उड़ाया जा रहा है,” आंदोलनकारियों ने कहा।

मुआवजे का चेक भी अटका
मृतक हरिदास कुबडे के परिवार को अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये दिए गए थे और 9.75 लाख रुपये का चेक भी दिया गया था। लेकिन मृतक के भतीजे विवेक का आरोप है कि जब चेक जमा करने गए तो “बीडीएस नहीं हुआ” कहकर चेक फाड़ने को कहा गया। बाद में बताया गया कि नया चेक विधायक के हाथों दिया जाएगा, लेकिन वह अब तक नहीं मिला। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि वन विभाग को बाघ पकड़ने की चिंता नहीं, बल्कि विधायक के हाथों चेक बंटवाने की ज्यादा फिक्र है।

विधायक के खिलाफ भी गुस्सा
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए। स्थानीय विधायक के खिलाफ भी लोगों ने नाराजगी जताई। “घटना को इतने दिन हो गए, फिर भी विधायक मिलने नहीं आए। किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है, फिर भी अनदेखी की जा रही है,” आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया।

इस धरना-प्रदर्शन में मिंडाळा, मींथुर, नवेगांव, कोदेपार और खैरी चक गांवों के सैकड़ों किसान शामिल हुए। नागभीड वन परिक्षेत्र के मींथुर इलाके में बने इस तनावपूर्ण हालात ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

बाघ के हमलों से किसानों की जान और रोजी-रोटी दोनों खतरे में हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वन विभाग तुरंत ठोस कार्रवाई कर बाघों को पकड़े और पीड़ित परिवार को न्याय दे, वरना यह जनआक्रोश और तेज होगा।

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