
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: रतास में कानून को ठेंगा! सार्वजनिक खड़ंजे को उजाड़कर दबंगों ने तान दी दीवार, प्रशासन की ‘चुप्पी’ ने खड़े किए बड़े सवाल
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
- अंधेर नगरी चौपट राजा: बस्ती में शिकायत के बाद भी ऊंची हो रही हैं अवैध कब्जे की दीवारें!
- कागज का टुकड़ा बना ‘थाना दिवस’: पीड़ित भटक रहा दर-दर, दबंग मना रहे जश्न!
- बस्ती: सार्वजनिक रास्ते पर ‘राम उजागिर’ की दबंगई, क्या सो रहा है प्रशासन?
कप्तानगंज (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफियाओं और सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध ‘बुलडोजर नीति’ का एलान किया था। लेकिन बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना अंतर्गत रतास (उफ कप्तानगंज) में सरकारी तंत्र की सुस्ती इस नीति का मखौल उड़ा रही है। यहाँ एक दबंग परिवार ने सरकारी खड़ंजे को ही अपनी निजी जागीर समझकर उसे उखाड़ फेंका और अब उस पर अवैध निर्माण का खेल धड़ल्ले से जारी है।प्रदेश की योगी सरकार भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करती नहीं थकती, लेकिन बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के रतास उफ कप्तानगंज में यह दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। यहाँ एक दबंग परिवार द्वारा सार्वजनिक रास्ते (खड़ंजे) को उजाड़कर उस पर अवैध निर्माण करने का मामला गरमाया हुआ है, लेकिन विडंबना यह है कि महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार को सिर्फ प्रशासन के आश्वासन का झुनझुना थमाया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित प्रमोद चौधरी पुत्र स्वर्गीय रामनरेश चौधरी के घर के सामने से गुजरने वाला सरकारी खड़ंजा, जिसका निर्माण पूर्व प्रधान चंद्रप्रकाश चौधरी के कार्यकाल में जनहित के लिए कराया गया था, उसे गांव के ही राम उजागिर पुत्र बलयी ने अपनी दबंगई के बल पर पूरी तरह उजाड़ दिया। उजाड़ने के बाद उस भूमि पर अवैध रूप से मकान का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस निर्माण से न केवल पीड़ित परिवार का रास्ता बंद हो गया है, बल्कि पूरे मोहल्ले की जल निकासी और आवागमन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।मामला प्रमोद कुमार चौधरी पुत्र स्वर्गीय रामनरेश चौधरी से जुड़ा है। उनके घर के सामने से गुजरने वाला खड़ंजा, जिसका निर्माण पूर्व प्रधान चंद्रप्रकाश चौधरी के कार्यकाल में हुआ था, उसे गांव के ही राम उजागिर पुत्र बलयी ने न केवल उजाड़ दिया, बल्कि उस पर अवैध रूप से घर का निर्माण भी शुरू कर दिया है। दबंगों की इस हिमाकत से पीड़ित परिवार का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है और जल निकासी की समस्या भी विकराल हो गई है।
थाना दिवस और तहसील के चक्कर काटकर थक गया पीड़ित
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित प्रमोद चौधरी ने कानून के हर दरवाजे पर दस्तक दी। तहसील दिवस से लेकर कप्तानगंज थाने के चक्कर लगाए गए। कागजों पर शिकायत दर्ज हुई, आश्वासन की पुड़िया भी मिली, लेकिन धरातल पर कार्रवाई ‘शून्य’ रही। पीड़ित का आरोप है कि कानूनगो और लेखपाल की भूमिका इस पूरे मामले में संदेहास्पद बनी हुई है। मौके पर आने के बावजूद इन अधिकारियों ने दबंगों को रोकने के बजाय चुप्पी साधे रखी, जिससे अवैध निर्माणकर्ता के हौसले और बुलंद हो गए।हैरानी की बात यह है कि पीड़ित प्रमोद चौधरी ने कई बार थाना दिवस पर प्रार्थना पत्र दिया। उप-जिलाधिकारी (SDM) से लेकर थाना अध्यक्ष तक गुहार लगाई गई। कानूनगो और लेखपाल मौके पर तो आए, लेकिन उनकी भूमिका महज ‘खानापूर्ति’ तक सीमित रही। दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न तो लेखपाल ने कोई ठोस रिपोर्ट दी और न ही प्रशासन ने अवैध निर्माण को रुकवाने की जहमत उठाई। वर्तमान अध्यक्ष द्वारा भी सिर्फ आश्वासन का खेल खेला जा रहा है।
प्रशासनिक मिलीभगत या बड़ी लापरवाही?
पिछले दो महीनों से लेखपाल और कानूनगो द्वारा मामले को टालमटोल किया जा रहा है। वर्तमान अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चौधरी भी सिर्फ कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं, लेकिन मौके पर अवैध निर्माण की दीवारें ऊंची होती जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि जब सरकारी खड़ंजा ग्राम सभा की संपत्ति है, तो उसे उजाड़ने वाले के खिलाफ अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं हुई? क्या बस्ती का राजस्व प्रशासन इन दबंगों के आगे आत्मसमर्पण कर चुका है?सवाल यह उठता है कि क्या कप्तानगंज का तहसील और पुलिस प्रशासन इन कब्जाधारकों के आगे नतमस्तक हो गया है? आखिर क्यों मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बावजूद भी सार्वजनिक रास्ते पर हो रहे अवैध कब्जे को प्रशासन नहीं देख पा रहा है? क्या कानून सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है?
“जब सार्वजनिक रास्ते ही सुरक्षित नहीं हैं और अधिकारियों का आश्वासन सिर्फ समय काटने का जरिया बन गया है, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?” – यह सवाल आज पूरी बस्ती की जनता पूछ रही है।
जनता में आक्रोश: कब चलेगा प्रशासन का डंडा?
इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर एक सार्वजनिक रास्ते पर सरेआम कब्जा हो सकता है, तो फिर आम आदमी की जमीन कितनी सुरक्षित है? यदि जल्द ही इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कर खड़ंजे को बहाल नहीं किया गया, तो पीड़ित परिवार के साथ ग्रामीण आंदोलन को बाध्य होंगे।
- स्थान: रतास ( कप्तानगंज), थाना कप्तानगंज, बस्ती।
- विवाद: सार्वजनिक खड़ंजे को उजाड़कर राम उजागिर द्वारा अवैध घर का निर्माण।
- स्थिति: 2 महीने से प्रशासन मौन, पीड़ित राजेश चौधरी न्याय के लिए भटक रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन की नींद टूटती है या फिर रसूखदारों की यह अवैध इमारत इसी तरह सरकारी तंत्र की विफलता का गवाह बनती रहेगी।













