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बारां, राजस्थान: आरएसएस समर्थकों की भीड़ ने फैलाया दहशत, पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर सवाल

वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है कि बड़ी संख्या में लोग लाठियाँ और लोहे के पाइप लेकर मोहल्ले की ओर बढ़ रहे हैं और माहौल को भयभीत कर रहे हैं।

बारां, राजस्थान: आरएसएस समर्थकों की भीड़ ने फैलाया दहशत, पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर सवाल

📍 बारां (राजस्थान) से संवाददाता

राजस्थान के बारां ज़िले में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के समर्थन में निकले पथ संचलन को लेकर शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है कि बड़ी संख्या में लोग लाठियाँ और लोहे के पाइप लेकर मोहल्ले की ओर बढ़ रहे हैं और माहौल को भयभीत कर रहे हैं।

इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि पुलिस ने इस पूरे मामले में एकतरफा कार्रवाई करते हुए केवल पथ संचलन का विरोध करने वालों पर एफआईआर दर्ज की, जबकि हथियारनुमा वस्तुओं से लैस भीड़ के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं लिखा गया।


भीड़ का खतरनाक प्रदर्शन

शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए आरएसएस समर्थकों की भीड़ अचानक एक मोहल्ले की ओर बढ़ी। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, दर्जनों युवक लाठियाँ और लोहे के पाइप हाथों में लिए नारेबाजी करते हुए गलियों में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बन गया।

वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि भीड़ में शामिल लोग हथियारनुमा डंडों को लहराते हुए आगे बढ़ रहे हैं और बाद में दूसरा रास्ता पकड़कर बस्ती की तरफ जाते दिखाई देते हैं। यह नजारा किसी भी संवेदनशील शहर की शांति को भंग करने के लिए पर्याप्त था।


पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने इस पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं बरती। पुलिस ने उन लोगों पर सख्त कार्रवाई की, जिन्होंने आरएसएस के पथ संचलन का विरोध किया था। कई लोगों को हिरासत में लिया गया और एफआईआर दर्ज की गई।

लेकिन वहीँ, हथियारों से लैस भीड़ के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। जबकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराएँ स्वतः लागू होती हैं—

  • धारा 141-147 (गैरकानूनी जमावड़ा और दंगा)

  • धारा 148 (हथियारों से लैस होकर दंगा करना)

  • धारा 149 (सामूहिक अपराध की जिम्मेदारी)

  • धारा 191 (झूठे तथ्य छिपाना/गलत बयान)

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जब वीडियो में स्पष्ट रूप से अपराध नजर आ रहा है, तो पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।


जनता में आक्रोश

इस घटना ने आम नागरिकों के बीच गुस्सा और असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर पुलिस धर्म और पहचान देखकर काम करेगी, तो आमजन का विश्वास पूरी तरह डगमगा जाएगा।

एक निवासी ने कहा—“हमने वीडियो अपनी आंखों से देखा है। लोग हथियार लेकर खुलेआम घूम रहे थे, लेकिन पुलिस उन पर चुप है। क्या यह क़ानून से ऊपर हैं?”

सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह अपराध नहीं है कि शहर में भीड़ लाठियाँ और लोहे के पाइप लेकर घूमे और फिर मोहल्लों की तरफ दौड़े?


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस मामले ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर विरोधियों पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है, तो हथियारबंद भीड़ पर चुप्पी क्यों?

कुछ संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए और वीडियो में नज़र आ रहे सभी लोगों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


प्रशासन पर दबाव

पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल अब सरकार और प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गए हैं। अगर इस घटना में निष्पक्षता नहीं दिखाई जाती, तो यह भविष्य में और गंभीर टकराव का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में पुलिस की भूमिका निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हर पक्ष पर समान रूप से कार्रवाई हो, चाहे वह किसी भी संगठन या समुदाय से जुड़ा हो।


निष्कर्ष

बारां की यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है। हथियारों से लैस भीड़ का खुलेआम सड़कों पर उतरना, दहशत फैलाना और पुलिस द्वारा उन्हें नज़रअंदाज़ करना एक गंभीर चूक है।

अगर इस पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना आने वाले समय में बड़े साम्प्रदायिक तनाव और टकराव का कारण बन सकती है। बारां की जनता अब यह उम्मीद कर रही है कि सरकार और प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, ताकि शहर की शांति और विश्वास कायम रह सके।

✍️ रिपोर्ट : एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश महामंत्री – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
📞 संपर्क: 8217554083

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