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बस्ती का PHC हरदी: डॉक्टर नदारद, फार्मासिस्ट के हाथ में मरीजों की ‘नब्ज’!

सफेद कोट का 'छलावा': फार्मासिस्ट बना डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग बना तमाशबीन!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: सफेद कोट की आड़ में ‘झोलाछाप’ सिस्टम? PHC हरदी में फार्मासिस्ट बना ‘डॉक्टर’, स्वास्थ्य विभाग मौन

  • मरीजों की जान से खिलवाड़: PHC हरदी में बिना डिग्री ‘इलाज’ की दुकान!
  • CMO साहब जवाब दें! सोशल मीडिया पर वायरल हुई करतूत, फिर भी फार्मासिस्ट पर मेहरबानी क्यों?
  • बस्ती स्वास्थ्य विभाग का ‘बड़ा खेल’: जांच के नाम पर फाइलों में दबा हरदी PHC का सच!
  • राम भरोसे बस्ती की सेहत: 3 केंद्रों पर डॉक्टर नहीं, क्या फार्मासिस्ट ही बचाएंगे जान?

बस्ती मंडल | ब्यूरो रिपोर्ट | 09 अप्रैल 2026

गौर, बस्ती। उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हाई-टेक बनाने का दावा कर रही है, वहीं बस्ती जिले के गौर ब्लॉक से आई तस्वीरें इन दावों की पोल खोल रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) हरदी में इन दिनों ‘राम भरोसे’ इलाज चल रहा है। यहाँ किसी योग्य MBBS डॉक्टर की तैनाती न होने का फायदा उठाकर फार्मासिस्ट धर्मेंद्र कुमार चौधरी खुलेआम डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल, फिर भी अफसर बेखबर

हैरानी की बात यह है कि फार्मासिस्ट द्वारा डॉक्टर बनकर इलाज करने और स्वास्थ्य मेले में डॉक्टर की कुर्सी हथियाने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। अब तक न तो कोई जांच हुई और न ही आरोपी फार्मासिस्ट पर कोई कार्रवाई। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल ‘बड़ा खेल’ खेलने में मस्त है।

अस्पताल है या खंडहर? बिखरी दवाइयां और गंदगी का अंबार

  • मीडिया टीम द्वारा PHC हरदी के औचक निरीक्षण में जो सच्चाई सामने आई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है:
  • समय का अभाव: सुबह 10:30 बजे केवल लैब टेक्नीशियन और वार्ड बॉय मिले। ‘डॉक्टर साहब’ बने फार्मासिस्ट महोदय दोपहर 12 बजे दर्शन देने पहुंचे।
  • बदहाली का मंजर: अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। खिड़की-दरवाजे टूटे हुए हैं और शौचालय की स्थिति नारकीय है।
  • दवाइयों की दुर्गति: जीवन रक्षक दवाइयां अलमारियों के बजाय जमीन पर बिखरी पड़ी धूल फांक रही हैं।

पांच में से तीन केंद्रों पर डॉक्टर ही नहीं!

सूत्रों के अनुसार, गौर सीएचसी के तहत 05 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आते हैं। इनमें से बभनान, मुसहा और हरदी में किसी भी योग्य MBBS डॉक्टर की तैनाती नहीं है। डॉक्टरों के इसी अभाव का फायदा उठाकर फार्मासिस्ट धर्मेंद्र कुमार चौधरी मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

बड़ा सवाल: यदि फार्मासिस्ट द्वारा गलत इलाज किए जाने से किसी मरीज की जान जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

जिम्मेदारों ने फेरा मुंह

इस पूरे प्रकरण पर जब जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका मोबाइल ‘कवरेज क्षेत्र से बाहर’ मिला। अधिकारियों की यह बेरुखी साफ दर्शाती है कि क्षेत्रवासियों की सेहत उनके लिए कोई प्राथमिकता नहीं रखती।

क्षेत्रवासियों की मांग: हरदी क्षेत्र की जनता ने प्रदेश सरकार और शासन से मांग की है कि जल्द से जल्द यहाँ योग्य डॉक्टरों की तैनाती की जाए और सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

बस्ती से विशेष रिपोर्ट

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