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बस्ती: शिक्षा के नाम पर ‘सफेदपोश’ डकैती, सुजावलपुर में ग्लोबल स्कूल बना भविष्य का कब्रिस्तान!

शिक्षा माफिया धर्मेंद्र का दुस्साहस: मान्यता के लाले, फिर भी नौनिहालों के भविष्य से सरेआम खिलवाड़!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: शिक्षा के ‘कसाईखानों’ में नीलाम हो रहा नौनिहालों का भविष्य, ‘ग्लोबल’ के नाम पर जालसाजी का महाजाल

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • बहादुरपुर में ‘ग्लोबल’ फर्जीवाड़ा: आखिर कब तक सोता रहेगा बस्ती का शिक्षा विभाग?
  • साहब देखिए! आपकी नाक के नीचे सुजावलपुर में फल-फूल रहा अवैध शिक्षा का काला धंधा।
  • टीसी के नाम पर वसूली और प्रताड़ना: ‘ग्लोबल’ स्कूल के चंगुल में फंसे मासूमों के अभिभावक।
  • मार्कशीट नहीं, मानसिक घाव दे रहा है यह स्कूल; बच्चों का साल बर्बाद करने वाले संचालक पर कब होगी FIR?
  • नाम ‘ग्लोबल’ पर काम ‘लोकल’ से भी बदतर: सुजावलपुर में शिक्षा के नाम पर खुली है लूट की दुकान!
  • सावधान! कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे ‘ग्लोबल’ फर्जीवाड़े के जाल में? जानिए सुजावलपुर का पूरा सच।

बहादुरपुर (बस्ती)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के जरिए शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का दम भर रही है, वहीं बस्ती जिले के बहादुरपुर विकासखण्ड में ‘शिक्षा माफिया’ सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सुजावलपुर (कुसौरा बाजार) में संचालित ‘ग्लोबल चिल्ड्रेन्स एकेडमी’ और ‘ग्लोबल गर्ल्स इंटर कॉलेज’ जैसे संस्थान आज शिक्षा के मंदिर नहीं, बल्कि मासूमों के भविष्य की बलि चढ़ाने वाले ‘कसाईखाने’ बन चुके हैं।

लुभावने नाम, खोखली बुनियाद: ठगी का ‘ग्लोबल’ मॉडल

ग्रामीणों और त्रस्त अभिभावकों का आरोप है कि संचालक धर्मेंद्र ने सुजावलपुर की धरती पर फर्जीवाड़े का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया है, जहाँ केवल लुभावने बोर्ड टंगे हैं। एक ही परिसर में अलग-अलग बोर्ड और अलग-अलग पहचान बताकर अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग की नाक के नीचे बिना वैध मान्यता के यह ‘अवैध धंधा’ फल-फूल रहा है? या फिर विभागीय सांठगांठ ने इन माफियाओं को अभयदान दे रखा है?

टीसी (TC) के नाम पर ‘उगाही’ और मानसिक प्रताड़ना

इस कथित विद्यालय की कार्यशैली किसी बंधक कैंप से कम नहीं है। जब जागरूक अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य को गर्त में जाते देख टीसी (Transfer Certificate) या मार्कशीट की मांग करते हैं, तो संचालक धर्मेंद्र अपना असली रंग दिखाता है। आरोप है कि:

  • टीसी देने के बदले मोटी रकम की अवैध मांग की जाती है।
  • गरीब अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया जाता है।
  • मार्कशीट न मिलने के कारण दर्जनों बच्चों का साल बर्बाद हो चुका है।

“यह स्कूल नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बंधक बनाने का अड्डा है। यहाँ दाखिला लेना मतलब अपने बच्चे के करियर की चिता सजाना है।” – एक आक्रोशित अभिभावक

प्रशासन की चुप्पी पर खड़े होते बड़े सवाल

बस्ती जनपद में 300 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई का ढोल तो पीटा जा रहा है, लेकिन बहादुरपुर का यह ‘ग्लोबल’ फर्जीवाड़ा अब तक जांच के रडार से बाहर क्यों है? क्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को सुजावलपुर में धड़ल्ले से चल रहे इस अवैध कारोबार की भनक नहीं है?

अब आर-पार की लड़ाई

धोखाधड़ी और शोषण से तंग आ चुके अभिभावकों ने अब शासन-प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। उनकी मांग स्पष्ट है:

  • विद्यालय की मान्यता की तत्काल सघन जांच हो।
  • दोषी संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कर उसे जेल भेजा जाए।
  • मान्यता न होने की दशा में संस्थान को तुरंत सील किया जाए।

यदि प्रशासन ने जल्द ही इस ‘शिक्षा माफिया’ पर नकेल नहीं कसी, तो आक्रोशित ग्रामीण और अभिभावक सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि बाबा का ‘बुलडोजर’ इन फर्जी शिक्षा माफियाओं की दुकानों पर कब चलता है।

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