
अजीत मिश्रा (खोजी)
आखिर ‘स्वास्थ्य’ विभाग में हो ‘क्या’ रहा, जो ‘जहां’ पा रहा ‘वही’ लूट ‘रहा’!
ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- 50% कमीशन का खेल: ‘हिंद सेंटर’ से जांच न कराने पर फाड़ दी जाती है मरीजों की रिपोर्ट।
- सीएमओ कार्यालय के ‘तीन अनमोल रत्न’: भ्रष्टाचार की तिकड़ी के आगे सिस्टम नतमस्तक।
- अस्पताल में ठेकेदारों का राज: साढ़े आठ बजे की हाजिरी, पर वार्डों से डॉक्टर और फार्मासिस्ट नदारद।
- लाइसेंस के नाम पर ‘खुला रेट’: सीएमओ कार्यालय में एनएचआरएम के धन की जमकर बंदरबांट।
- मुर्दों का भी सौदा: मृतक बच्चे के नाम पर पीएमसी वालों से सांठगांठ का सनसनीखेज आरोप।
बस्ती। बस्ती का स्वास्थ्य विभाग इस समय भ्रष्टाचार और अराजकता का पर्याय बन चुका है। आलम यह है कि जो अधिकारी या कर्मचारी जहाँ बैठा है, वहीं से गरीब मरीजों की ‘चमड़ी उधेड़ने’ में लगा है। जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी और सीएचसी तक, हर जगह कमीशनखोरी और लूट का खुला खेल चल रहा है।
मरीजों के पैसे पर ‘बंदरबांट’ और ठेकेदारों का राज
अस्पताल के भीतर मरीजों के भोजन, सर्जिकल सामान और ऑपरेशन के नाम पर आने वाले बजट की जमकर लूट हो रही है।
- जिला अस्पताल में सिविल और विद्युत ठेकेदारों का इस कदर बोलबाला है कि एसआईसी के साथ मिलकर हर साल 15 से 20 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
- महिला अस्पताल में भी सीएमएस की मेहरबानी से ठेकेदारों और निजी लैब संचालकों का कब्जा है।
कमीशन के लिए मरीजों की जान से खिलवाड़
हर्रैया के 100 बेड वाले एमसीएच अस्पताल में मानवता शर्मसार हो रही है। यहाँ डॉक्टर कमीशन के चक्कर में गर्भवती महिलाओं को जबरन ‘हिंद अल्ट्रासाउंड सेंटर’ भेजने का दबाव बनाते हैं।
- यदि कोई गरीब मरीज किसी दूसरे सस्ते सेंटर से जांच करा लाता है, तो डॉक्टर उसकी रिपोर्ट फाड़कर फेंक देते हैं।
- बताया जा रहा है कि इस ‘हिंद सेंटर’ से डॉक्टरों को 50 फीसदी कमीशन मिलता है।
- इतना ही नहीं, यहाँ डीजल तक की चोरी बाबू बजरंग प्रसाद की अगुवाई में धड़ल्ले से की जा रही है।
सीएमओ कार्यालय: पाप और भ्रष्टाचार का अड्डा
स्वास्थ्य विभाग का मुख्यालय यानी सीएमओ कार्यालय भ्रष्टाचार की ‘गंगोत्री’ बन गया है।
- यहाँ एनएचआरएम (NHRM) के धन का जमकर बंदरबांट हो रहा है, जिसमें प्रभारी डॉ. बृजेश शुक्ल और बाबू संदीप राय की मिलीभगत सामने आ रही है।
- डॉ. ए.के. चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ. एस.बी. सिंह और डॉ. बृजेश शुक्ल को विभाग के ‘तीन अनमोल रत्न’ कहा जा रहा है, जिनकी छत्रछाया में लूट का यह साम्राज्य फल-फूल रहा है।
- निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी के लाइसेंस के नाम पर यहाँ खुला रेट तय है। एक-एक लाइसेंस के लिए तीन-तीन लाख रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।
गायब डॉक्टर और ‘अदृश्य’ सिस्टम
अस्पतालों में डॉक्टरों की हाजिरी केवल कागजों पर है। सीएमओ के निरीक्षण के दौरान भी अस्पताल खाली मिलते हैं, लेकिन शुक्लाजी जैसे प्रभावशाली फार्मासिस्टों की मेहरबानी से गायब डॉक्टरों की हाजिरी लग जाती है। दोपहर 2 बजे के बाद अस्पतालों में न डॉक्टर मिलते हैं न फार्मासिस्ट, गरीब मरीज केवल भगवान भरोसे हैं।
निष्कर्ष: बस्ती मंडल का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुका है। यहाँ जांच के नाम पर मृत मरीजों तक का सौदा करने से गुरेज नहीं किया जाता। क्या शासन-प्रशासन इन सफेदपोश लुटेरों पर लगाम कसेगा या गरीब जनता इसी तरह बलि चढ़ती रहेगी?















