
अजीत मिश्रा (खोजी)
सिस्टम की साख पर बट्टा लगाता ‘जिद्दी’ लेखपाल, एसडीएम के आदेश की उड़ाई जा रही धज्जियां
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- प्रशासनिक अराजकता: ५ साल से एक ही हल्के में जमे इन्द्रनरायन, तबादले के बाद भी ‘मोह’ बरकरार, जनता में भारी आक्रोश।
- रद्दी का टुकड़ा बना एसडीएम का आदेश, लेखपाल की हठधर्मिता के आगे प्रशासन बेबस!
- भ्रष्टाचार का ‘हल्का’ मोह: हरैया तहसील में लेखपाल इन्द्रनरायन की मनमानी, क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- योगी राज में ‘बेलगाम’ लेखपाल: आखिर किसके संरक्षण में इन्द्रनरायन उड़ा रहे हैं नियमों की धज्जियां?
बस्ती/हरैया।। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन बस्ती जनपद के हरैया तहसील में प्रशासनिक आदेशों की जो दुर्गति हो रही है, वह पूरे तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करती है। यहाँ एक लेखपाल ‘इन्द्रनरायन’ के आगे तहसील प्रशासन बौना नजर आ रहा है। आलम यह है कि एसडीएम का स्थानांतरण आदेश लेखपाल की हठधर्मिता के आगे महज एक रद्दी का टुकड़ा बनकर रह गया है।
कुर्सी से कैसा मोह? तबादला हुआ पर ‘हल्का’ नहीं छोड़ा
हरैया तहसील के दौलतपुर हल्के में तैनात रहे लेखपाल इन्द्रनरायन का मोह इस कदर गहरा है कि २३ अप्रैल को एसडीएम हरैया द्वारा सोनहटी हल्के में तबादला किए जाने के बावजूद उन्होंने अब तक पुराने हल्के से अपना कब्जा नहीं छोड़ा है। सवाल यह उठता है कि आखिर पुराने हल्के में ऐसी कौन सी ‘मलाई’ है जिसे छोड़ने को लेखपाल तैयार नहीं हैं? क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल उच्च अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रहा?
रिश्वतखोरी और गुटबाजी के संगीन आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इन्द्रनरायन पिछले ५ वर्षों से एक ही हल्के में जमे हुए हैं, जबकि नियमतः ३ साल से अधिक तैनाती नहीं होनी चाहिए। ३१ मार्च को एक ग्रामीण द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर रिश्वत मांगने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि लेखपाल न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, बल्कि गांव में गुटबाजी को बढ़ावा देकर माहौल खराब कर रहे हैं।
किसका संरक्षण है इन्द्रनरायन को?
एक अदना सा लेखपाल अगर उपजिलाधिकारी (SDM) के आदेश को ठेंगा दिखा रहा है, तो निश्चित रूप से इसके पीछे किसी बड़े ‘हाथ’ का संरक्षण प्राप्त है। क्या तहसील के रसूखदार लोग इस भ्रष्टाचार की चेन का हिस्सा हैं? क्या यही कारण है कि गंभीर शिकायतों और स्थानांतरण के बावजूद लेखपाल बेखौफ होकर पुराने हल्के में सक्रिय हैं?
प्रशासन की बेबसी या मिलीभगत?
एसडीएम सतेंद्र सिंह का आदेश बेअसर साबित होना प्रशासनिक लाचारी का जीता-जागता प्रमाण है। जनमानस में यह चर्चा आम है कि यदि एक लेखपाल इतना शक्तिशाली है कि वह सरकारी आदेशों को दरकिनार कर सके, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लेखपाल को नए कार्यभार पर नहीं भेजा गया और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
अब देखना यह है कि बस्ती जिला प्रशासन इस ‘बेलगाम’ लेखपाल पर नकेल कसता है या फिर भ्रष्टाचार का यह हाईवे इसी तरह फर्राटा भरता रहेगा।















