
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार की ‘अंगद’ चौकी: हरैया ब्लॉक में सचिवों के रसूख के आगे नतमस्तक प्रशासन!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
“जीरो टॉलरेंस का खुला मजाक: 10-10 पंचायतों के मालिक बने दागी सचिव, गाँव की जनता दर-दर को मोहताज!”
- दागदार अतीत, फिर भी ‘खास’ इनायत: निलंबन झेल चुके सचिव संदीप चौधरी पर BDO मेहरबान, सौंपी 10 गाँवों की जिम्मेदारी।
- गाँव में सन्नाटा, ब्लॉक में मेला: धूल फांक रहे सरकारी पंचायत भवन, आलीशान कमरों में प्राइवेट करिंदों के भरोसे चल रहा ‘खेल’।
- आखिर वेतन कौन देता है?: ब्लॉक में तैनात ‘प्राइवेट मुंशियों’ के वेतन और वसूली के खेल पर उठे गंभीर सवाल।
- अंधेर नगरी, चौपट राजा: रोस्टर भूल चुके ADO पंचायत, साहब को गाँव जाने की फुर्सत नहीं!
बस्ती। जनपद के हरैया विकास खंड में सरकारी सिस्टम “सफेद हाथी” साबित हो रहा है। जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘गाँव-गाँव सचिवालय’ का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं हरैया ब्लॉक में तैनात कुछ रसूखदार सचिवों ने सरकार की मंशा को ठेंगे पर रख दिया है। आलम यह है कि यहाँ के खंड विकास अधिकारी (BDO) और ADO पंचायत, सचिवों की मनमानी के आगे पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहे हैं।
ब्लॉक परिसर में ‘प्राइवेट सल्तनत’: मुंशियों के भरोसे मिनी सचिवालय
हैरतअंगेज मामला यह है कि ब्लॉक परिसर में ही अवैध रूप से कब्जा जमाए कमरों में सचिवों ने अपनी ‘प्राइवेट सल्तनत’ खड़ी कर ली है। यहाँ सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि प्राइवेट मुंशी बैठकर 10-10 ग्राम पंचायतों का भाग्य लिखते हैं। नियमतः सचिवों को रोस्टर के अनुसार ग्राम पंचायतों में बने पंचायत भवनों (मिनी सचिवालय) में बैठना चाहिए, लेकिन हरैया के ये ‘साहब’ गाँवों में धूल फांकने के बजाय ब्लॉक मुख्यालय के आलीशान कमरों से हुकूमत चला रहे हैं।
संदीप चौधरी: निलंबन से बहाली तक, रसूख का ‘अंगद’ पैर
चर्चाओं के केंद्र में हैं सचिव संदीप चौधरी, जो पिछले लगभग 5 वर्षों से हरैया ब्लॉक में अंगद की तरह पैर जमाकर बैठे हैं।
- दागदार इतिहास: बताया जा रहा है कि इन पर पहले दुबौलिया ब्लॉक में भी निलंबन की गाज गिर चुकी है।
- महरबानी का आलम: निलंबन के बाद बहाल होते ही BDO विनय कुमार द्विवेदी ने इन पर ऐसी इनायत दिखाई कि एक साथ 10 ग्राम पंचायतों का प्रभार सौंप दिया।
- सवाल: क्या पूरे ब्लॉक में योग्य सचिवों का अकाल पड़ गया है जो एक दागी और विवादित सचिव को 10 गाँवों की चाबी थमा दी गई?
जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त: ‘काम के बदले दाम’ का खेल?
सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर गाँवों में पंचायत भवन इसलिए बनवाए ताकि ग्रामीणों को खतौनी, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं के लिए भटकना न पड़े। लेकिन हरैया में पंचायत भवन धूल फांक रहे हैं और ग्रामीण सचिव के ‘प्राइवेट मुंशियों’ के चक्कर काट रहे हैं।
बड़े सवाल:
- इन प्राइवेट मुंशियों को वेतन कहाँ से मिलता है?
- क्या ग्रामीणों के मुफ्त काम के बदले यहाँ अवैध वसूली का ‘रेट कार्ड’ चलता है?
- ADO पंचायत आखिर रोस्टर की चेकिंग करने से क्यों कतराते हैं?
BDO की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
BDO हरैया विनय कुमार द्विवेदी की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। क्या साहब इन सचिवों के रसूख के आगे बेबस हैं या फिर इस पूरे ‘प्राइवेट सिंडिकेट’ को उच्चाधिकारियों का मौन संरक्षण प्राप्त है?
हरैया ब्लॉक की इस बहुमंजिला इमारत में बने ऐसे ही कई और ‘आलीशान ऑफिसों’ और उनके पीछे छिपे भ्रष्टाचार के चेहरों का खुलासा होना अभी बाकी है।
देखना यह है कि बस्ती जिला प्रशासन इन बेलगाम सचिवों पर नकेल कसता है या फिर भ्रष्टाचार का यह ‘मिनी सचिवालय’ ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।















