
अजीत मिश्रा (खोजी)
जांच के नाम पर ‘जैकपॉट’: महीने भर से फाइलों में दफन है नौनिहालों की सुरक्षा, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे बीईओ विनोद त्रिपाठी?
ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- जांच या उगाही का खेल? नोटिस के नाम पर बीईओ विनोद त्रिपाठी ने की ‘मोटी वसूली’, फाइल हुई ठंडे बस्ते के हवाले!
- मौत के साये में वार्षिकोत्सव: मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले स्कूल पर बीईओ मेहरबान, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती!
- शिक्षा विभाग की साख नीलाम! सन राइज स्कूल के ‘जादू’ में फंसे बीईओ, एक माह बाद भी नहीं हुई कोई ठोस कार्यवाही।
- खण्ड शिक्षा अधिकारी की कुर्सी के नीचे दबी स्कूल की फाइल, आखिर क्या है ‘सफेदपोश’ सांठगांठ का राज?
बस्ती (ब्यूरो रिपोर्ट)।। भ्रष्टाचार जब सिस्टम की रगों में लहू बनकर दौड़ने लगे, तो नियम-कायदे सिर्फ कागजी खिलौने बनकर रह जाते हैं। बस्ती जनपद के नगर क्षेत्र में शिक्षा विभाग का एक ऐसा ही शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जहाँ बच्चों की ‘जिंदगी’ से ज्यादा अधिकारियों के लिए ‘जेब’ की कीमत बड़ी हो गई है। रेलवे स्टेशन रोड स्थित सन राइज स्कूल की जानलेवा लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) विनोद कुमार त्रिपाठी ने जिस तरह से ‘जांच’ का नाटक रचा है, उसने विभाग की शुचिता को सरेआम नीलाम कर दिया है।
खौफनाक मंजर: मौत की बल्लियों के बीच ‘वार्षिकोत्सव’
बीते 2 अप्रैल 2026 को सन राइज स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मासूमों की जान के साथ खेला गया एक ‘खूनी जुआ’ था। निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत, चारों तरफ लटकते लोहे के भारी पाइप, नुकीली बांस की बल्लियाँ और बिखरे हुए मलबे के बीच बच्चों को कार्यक्रम करने पर मजबूर किया गया।बता दें कि रेलवे स्टेशन रोड स्थित सन राइज स्कूल में बीते 02 अप्रैल 2026 को वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया था। यह आयोजन किसी सुरक्षित हॉल में नहीं, बल्कि एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के बीच हुआ था।
- खतरे का मंजर: चारों तरफ लोहे के पाइप, बांस की बल्लियाँ और बिखरी हुई गिट्टी-मोरंग के बीच बच्चे प्रदर्शन कर रहे थे।
- प्रबंधन की लापरवाही: प्रधानाचार्य डॉ. फैजल अख्तर ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बच्चों को खतरे में डाला।
- अभिभावकों का आक्रोश: नाम न छापने की शर्त पर अभिभावकों ने बताया कि “जादूगर” बुलाकर भीड़ तो जुटा ली गई, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीं था। अगर कोई पाइप गिर जाता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
- साजिश का रास्ता: प्रधानाचार्य डॉ. फैजल अख्तर ने लोहे के पाइपों के बीच से जो रास्ता बनाया था, वह किसी भी पल बड़े हादसे का सबब बन सकता था।
- सोशल मीडिया पर गवाह: कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे देखकर लोगों की रूह कांप गई, लेकिन भ्रष्टाचार की पट्टी बांधे बैठे बीईओ को इसमें कोई खतरा नजर नहीं आया।
वसूली का ‘त्रिपाठी मॉडल’: नोटिस से सेटिंग तक का सफर
सूत्रों का दावा है कि बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी ने शुरू में मीडिया की सुर्खियों से बचने के लिए आनन-फानन में स्कूल को नोटिस जारी किया। यह नोटिस कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि ‘मोलभाव’ के लिए था।सूत्रों की मानें तो मीडिया की सक्रियता देख बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी ने दिखावे के लिए सन राइज स्कूल को नोटिस तो थमाया, लेकिन पर्दे के पीछे खेल कुछ और ही चल रहा था। आरोप है कि कार्रवाई का डर दिखाकर बीईओ ने स्कूल प्रबंधन से मोटी रकम की वसूली की है। यही कारण है कि जिस स्कूल पर अब तक तालाबंदी या भारी जुर्माने की कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसे केवल कागजी नोटिस के फेर में उलझाकर “क्लीन चिट” देने की तैयारी कर ली गई है।
- पहला खेल: नोटिस का जवाब न मिलने पर बीईओ ने नाराजगी का स्वांग रचा।
- दूसरा खेल: दोबारा नोटिस भेजने के नाम पर समय बढ़ाया गया ताकि ‘डील’ पक्की हो सके।
- नतीजा: एक महीना बीत जाने के बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में है। चर्चा है कि स्कूल प्रबंधन और बीईओ के बीच ‘मोटी रकम’ का लेनदेन हो चुका है, जिसके बाद जांच की फाइल पर लीपापोती की जा रही है।
जादूगर के जरिए छिपाए जा रहे थे स्कूल के पाप
स्कूल प्रबंधन ने अपनी कमियों और शैक्षणिक स्तर की पोल खुलने के डर से लखनऊ के जादूगर अनुराग मिश्रा को बुलाकर तमाशा खड़ा किया। अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों की शिक्षा और उनके हुनर के प्रदर्शन के बजाय स्कूल ने भीड़ जुटाने के लिए ‘जादू’ का सहारा लिया। यह जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या स्कूल के पास दिखाने के लिए काबिल छात्र नहीं थे या फिर यह सब सिर्फ प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का एक पैंतरा था?हैरानी की बात यह है कि बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी लगातार मीडिया को यह बयान देते रहे कि “जांच चल रही है” और “संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई होगी”। सवाल यह उठता है कि क्या एक महीने का समय जवाब मांगने के लिए कम था? या फिर नोटिस का जवाब न आना ही बीईओ के लिए “सौदा” करने का अवसर बन गया?
सवाल जो सिस्टम को कठघरे में खड़ा करते हैं:
- जब नोटिस का जवाब समय सीमा में नहीं मिला, तो बीईओ ने स्कूल की मान्यता रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने की संस्तुति क्यों नहीं की?
- क्या शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी के इस ‘सेटिंग खेल’ की भनक नहीं है?
- अगर उस निर्माणाधीन मलबे में कोई बच्चा दब जाता, तो क्या बीईओ साहब इसकी जिम्मेदारी लेते?
अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश
स्थानीय नागरिकों और जागरूक अभिभावकों ने जिलाधिकारी बस्ती से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी निष्पक्ष मजिस्ट्रेट से कराई जाए। बीईओ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए कि आखिर एक महीने तक कार्रवाई को क्यों लटकाया गया। अगर समय रहते भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट को नहीं तोड़ा गया, तो सन राइज स्कूल जैसे अन्य संस्थान भी बच्चों की जान दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटेंगे।सोशल मीडिया पर स्कूल की बदहाली और खतरनाक आयोजन का वीडियो वायरल होने के बावजूद खण्ड शिक्षा अधिकारी का मौन रहना दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली होने का संकेत देता है। यदि ऐसे ही लापरवाह अधिकारियों को जांच सौंपी जाती रही, तो अभिभावकों का शिक्षा विभाग से भरोसा उठना तय है।
“कार्यवाही न होना यह सिद्ध करता है कि बीईओ और स्कूल प्रबंधन के बीच गहरी साठगांठ है। यह शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि वसूली का अड्डा बन चुका है।” — एक पीड़ित अभिभावक
“सन राइज स्कूल मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है। आखिर क्यों एक महीने से जवाब का इंतजार किया जा रहा है? क्या बीईओ साहब किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?”






















