
निमाड़ में पारंपरिक हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ गणगौर महोत्सव मनाया जा रहा है। चैत्र मास शुक्ल एकादशी से प्रारंभ हुआ यह पावन पर्व कुंवारी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
गणगौर पूजन की शुरुआत ज्वारा बोने की रस्म से होती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा जाता है। इस दौरान महिलाएँ माता गणगौर और भगवान शिव की अराधना करती हैं, सुख-समृद्धि और अच्छे वर की कामना करती हैं।
गाँवों और शहरों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ शोभायात्राएँ निकाली जा रही हैं, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
आस्था और परंपरा का प्रतीक
गणगौर उत्सव निमाड़ अंचल में केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। ग्रामीण इलाकों में विशेष रूप से इस पर्व का उल्लास देखने को मिलता है। महिलाएँ पारंपरिक परिधानों में सजकर माता गणगौर के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं।
आयोजन समिति के अनुसार, इस बार भी गणगौर महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। पर्व के अंतिम दिन शोभायात्रा निकालकर गणगौर माता का विसर्जन किया जाएगा, जिसके साथ यह उत्सव सम्पन्न होगा।
(रिपोर्ट: दरियाव वासुरे, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़)
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