
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: 100 शैय्या महिला अस्पताल हरैया में करोड़ों के ‘खेल’ की आशंका, RTI डलते ही महकमे में मचा हड़कंप!
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- RTI की एक चोट से हिला स्वास्थ्य महकमा: दो साल के रिकॉर्ड ने उड़ाई नींद, घपले की आंच लखनऊ तक पहुंचने के आसार!
- जनता के पैसे पर डाका या बड़ा घोटाला? हरैया महिला अस्पताल में करोड़ों के खर्च पर सन्नाटा क्यों?
- फाइलें दुरुस्त करने में जुटे जिम्मेदार: अस्पताल में मशीन खरीद और आउटसोर्सिंग के नाम पर भारी घालमेल की बू!
- साहब… हिसाब देने में डर कैसा? हरैया अस्पताल के टेंडरों पर RTI का शिकंजा, सीएमओ दफ्तर ने झाड़ा पल्ला।
बस्ती। जनपद के नगर पंचायत हरैया स्थित 100 शैय्या महिला चिकित्सालय में करोड़ों रुपये के ‘अंदरूनी खेल’ और भारी वित्तीय गड़बड़ी की बू आने लगी है। अस्पताल की व्यवस्थाओं, ठेकों और बजट के नाम पर ठिकाने लगाई गई भारी-भरकम रकम का पूरा हिसाब जैसे ही सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगा गया, वैसे ही स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार अफसरों की नींद उड़ गई है। कार्यालयों में इस समय सिर्फ और सिर्फ फाइलों को दुरुस्त करने और गर्दन बचाने की जुगत को लेकर हड़कंप का माहौल है।
दो साल के ‘काले चिट्ठे’ पर उठे सुलगते सवाल
मिली जानकारी के मुताबिक, RTI अधिनियम-2005 के तहत स्वास्थ्य विभाग में एक बेहद विस्तृत और बिंदुवार आवेदन दाखिल किया गया है। इस आवेदन में वर्ष 2024 से लेकर 31 मार्च 2026 तक अस्पताल में हुए तमाम निर्माण कार्यों, टेंडरों, भुगतानों, भारी-भरकम मशीन खरीद और आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर जारी किए गए पैसों का पूरा कच्चा-चिट्ठा मांग लिया गया है।
चर्चाओं का बाजार गर्म: सबसे ज्यादा सुइयां अस्पताल के लिए खरीदी गई महंगी मशीनों और उपकरणों की तरफ घूम रही हैं। आवेदनकर्ता ने मशीनों की खरीद प्रक्रिया, सप्लायर फर्मों के नाम, उनकी असल लागत, भुगतान के बिल-वाउचर और बकायदा ‘उपयोग प्रमाण पत्र’ (UC) की प्रमाणित कॉपियां मांगकर अधिकारियों को बैकफुट पर ला दिया है।
क्या कागजों पर ही चल रहे थे कर्मचारी और सुरक्षा व्यवस्था?
शिकायत और RTI के दायरे में सिर्फ मशीनें ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के नाम पर होने वाला कथित खेल भी शामिल है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय बस्ती को भेजे गए आवेदन में महिला अस्पताल हरैया के:
- संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का अटेंडेंस रजिस्टर (उपस्थिति पंजिका)
- वेतन भुगतान रजिस्टर
- EPF (भविष्य निधि) और ESI से संबंधित पुख्ता दस्तावेज
- अस्पताल में संचालित लैब, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सफाई और सुरक्षा सेवाओं की औचक निरीक्षण व मॉनिटरिंग रिपोर्ट।
इन सभी संवेदनशील दस्तावेजों की प्रमाणित कॉपियां मांगने से विभाग में हड़कंप मचना लाजिमी था, क्योंकि अक्सर आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था में बड़े स्तर पर घालमेल के आरोप लगते रहे हैं।
अफसरों ने झाड़ा पल्ला, गेंद हरैया के पाले में
कार्रवाई के डर और जवाबदेही से बचने के लिए जिले के आला अधिकारियों ने तत्काल पैंतरा बदल लिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी एवं जनसूचना अधिकारी बस्ती ने आनन-फानन में 24 अप्रैल 2026 को पत्र जारी कर इस पूरे मामले को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, 100 शैय्या महिला चिकित्सालय हरैया को ट्रांसफर (स्थानांतरित) कर दिया है। पत्र में साफ कहा गया है कि मांगी गई सूचनाएं सीधे तौर पर अस्पताल के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी हैं, इसलिए वे नियमानुसार सूचना उपलब्ध कराएं।
जनता के टैक्स का पैसा, तो हिसाब देने में डर क्यों?
इस पूरे मामले को लेकर हरैया और आसपास के इलाकों में चर्चाओं और राजनीतिक बहसों का बाजार बेहद गर्म है। जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि जब अस्पताल आम जनता के खून-पसीने की कमाई (टैक्स) से संचालित हो रहा है, तो हर टेंडर और हर खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने में इतनी घबराहट क्यों? अगर सारे काम नियम-कानून के दायरे में रहकर पूरी पारदर्शिता से हुए हैं, तो रिकॉर्ड देने में आनाकानी क्यों की जा रही है?
ब्यूरो की तीखी नजर: यदि इस RTI के जवाब में वित्तीय गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी या भुगतानों में हेराफेरी की बात पुख्ता होती है—जिसकी पूरी आशंका जताई जा रही है—तो यह मामला सिर्फ हरैया तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी आंच लखनऊ तक बैठे बड़े प्रशासनिक हाकिमों और स्वास्थ्य विभाग के बड़े ठेकेदारों तक पहुंचेगी। अब देखना यह है कि हरैया महिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी पूरी ईमानदारी से आंकड़े सामने रखते हैं या फिर इस ‘करोड़ों के खेल’ पर पर्दा डालने की कोई नई स्क्रिप्ट लिखी जाती है!




















