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बस्ती: एंटी करप्शन टीम का बड़ा एक्शन, 50 हजार की घूस लेते ‘करोड़पति’ बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार।

पेंशन के बदले मांगी रिश्वत: ढाबे पर बिछा जाल, धरा गया आयुर्वेदिक कार्यालय का भ्रष्टाचार का 'खिलाड़ी'।

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार का ‘अड्डा’ बना आयुर्वेदिक कार्यालय: 50 हजार की घूस लेते रंगे हाथ दबोचा गया ‘करोड़पति’ बाबू

  • योगी की ‘जीरो टॉलरेंस’ को चुनौती: करोड़ों की संपत्ति बनाने वाला बाबू सुनील पांडेय सलाखों के पीछे। भ्रष्टाचार का अड्डा बना आयुर्वेदिक कार्यालय: एंटी करप्शन की छापेमारी से विभाग में हड़कंप।
  • शिकारी खुद बना शिकार: ढाबे पर घूस लेते पकड़ा गया बस्ती का चर्चित बाबू। सिस्टम का ‘दीमक’ ढेर: पेंशन फाइल की कीमत लगा रहे करोड़पति बाबू का अंत।
  • बस्ती में एंटी करप्शन का प्रहार: फाइलों में कैद थी ईमानदारी, जेब में जा रही थी घूस। सफेदपोशों का ‘खास’ बाबू गिरफ्तार: अब खुलेंगे आयुर्वेदिक कार्यालय के काले राज।

बस्ती। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को ठेंगा दिखा रहे भ्रष्ट सिस्टम पर आज एंटी करप्शन टीम ने करारा प्रहार किया है। बस्ती जिले में भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके क्षेत्रीय आयुर्वेदिक कार्यालय के बाबू सुनील कुमार पांडेय को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पेंशन के नाम पर 50 हजार की रिश्वत की भूख ने इस चर्चित बाबू को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

ढाबे पर बिछा जाल, और ढेर हो गया ‘शिकारी’

​खबर के मुताबिक, आरोपी बाबू सुनील कुमार पांडेय ने एक पीड़ित से उसकी पेंशन फाइल आगे बढ़ाने के बदले मोटी रकम की मांग की थी। पीड़ित की शिकायत पर मुस्तैद हुई एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया। बाबू ने घूस की रकम लेने के लिए विक्रमजोत के एक ढाबे को सुरक्षित ठिकाना चुना था, लेकिन उसे क्या पता था कि आज उसके पाप का घड़ा भरने वाला है। जैसे ही उसने 50 हजार रुपये हाथ में लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी की ‘करोड़ों की जागीर’

​मरोटिया पांडेय गांव का निवासी यह बाबू लंबे समय से अपनी काली करतूतों के लिए चर्चा में था। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का दावा है कि बाबू ने भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली है। ताज्जुब की बात यह है कि:

  • ​आरोपी पर पहले भी आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप लगे थे।
  • ​कई बार लिखित शिकायतें हुईं, लेकिन सिस्टम के ‘रक्षक’ ही उसे बचाते रहे।
  • ​ठोस कार्रवाई न होने के कारण बाबू के हौसले इतने बुलंद थे कि वह खुलेआम सौदेबाजी कर रहा था।

सिस्टम की पोल खोलती गिरफ्तारी

​सुनील कुमार पांडेय की गिरफ्तारी ने जिला प्रशासन और आयुर्वेदिक विभाग के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह बाबू इतने सालों से अपनी ‘समानांतर सरकार’ चला रहा था? क्या विभाग के आला अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार की भनक नहीं थी, या फिर बंदरबाँट ऊपर तक पहुँच रही थी?

“आज की गिरफ्तारी सिर्फ एक बाबू की नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम की हार है जो आम आदमी के पसीने की कमाई को दीमक की तरह चाट रहा है।”

 

कार्यालय में हड़कंप, अब खुलेंगे बड़े राज

​गिरफ्तारी की खबर फैलते ही आयुर्वेदिक कार्यालय में हड़कंप मच गया है। कई कर्मचारी और अधिकारी अपनी गर्दन बचाने की जुगत में लग गए हैं। पुलिस अब आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी संपत्ति और विभागीय साठगांठ की जांच कर रही है। उम्मीद है कि जांच की आंच उन सफेदपोशों तक भी पहुंचेगी जो इस भ्रष्टाचार के खेल में पर्दे के पीछे से खिलाड़ी बने हुए थे।

घटनाक्रम: जाल से गिरफ्तारी तक

  • आरोपी: सुनील कुमार पांडेय (बाबू, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक कार्यालय, बस्ती)।
  • अपराध: पेंशन फाइल को आगे बढ़ाने के बदले 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग।
  • स्थान: गिरफ्तारी विक्रमजोत स्थित एक ढाबे पर हुई, जिसे बाबू ने ‘सुरक्षित’ सौदा स्थल माना था।
  • कार्रवाई: एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों पकड़कर भ्रष्टाचार के इस खेल का पर्दाफाश किया।

भ्रष्टाचार का प्रोफाइल: ‘करोड़पति’ बाबू

  • सुनील कुमार पांडेय की छवि केवल एक रिश्वतखोर कर्मचारी की नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित भ्रष्टाचारी की रही है:
  • आय से अधिक संपत्ति: आरोपी पर पहले से ही करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने के आरोप हैं।
  • लगातार शिकायतें: मरोटिया पांडेय गांव के निवासी इस बाबू के खिलाफ कई बार लिखित शिकायतें हुईं, लेकिन विभागीय संरक्षण के कारण वह बचता रहा।
  • सिस्टम का संरक्षण: यह गिरफ्तारी उन अधिकारियों पर भी सवाल उठाती है जिन्होंने लंबे समय तक इसकी फाइलों और कारनामों पर आंखें मूंद रखी थीं।

गंभीर सवाल और निष्कर्ष

इस गिरफ्तारी ने कुछ ऐसे सवाल खड़े किए हैं जिनका जवाब जिला प्रशासन को देना होगा:

  • साठगांठ की गहराई: क्या एक बाबू अकेले दम पर इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर सकता है, या उसे उच्चाधिकारियों का मौन समर्थन प्राप्त था?
  • विभागीय जांच की विफलता: पिछली शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • भविष्य की कार्रवाई: क्या जांच केवल इस 50 हजार के लेनदेन तक सीमित रहेगी, या बाबू की करोड़ों की बेनामी संपत्तियों को भी कुर्क किया जाएगा?
  • एक संदेश: “यह कार्रवाई उन सभी के लिए चेतावनी है जो सरकारी कुर्सी को सेवा नहीं, बल्कि मेवा खाने का साधन समझते हैं। एंटी करप्शन टीम की यह मुस्तैदी आम जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक जरूरी कदम है।”

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि पुलिस और एंटी करप्शन टीम आरोपी के “सफेदपोश” मददगारों का नाम सामने ला पाती है या नहीं।

ब्यूरो रिपोर्ट,

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

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