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बस्ती के सन राइज स्कूल में ‘शिक्षा’ के नाम पर ‘जान’ से खिलवाड़, विभाग की नोटिस को ठेंगे पर रख रहा प्रबंधन!

सन राइज स्कूल की मनमानी: बच्चों की जान से 'जादू' का खेल, विभाग की नोटिस को दिखाया ठेंगा!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🔔सन राइज स्कूल की मनमानी: बच्चों की जिंदगी से ‘जादू’ का खेल, विभाग सख्त पर प्रबंधन मस्त!🔔

  • बस्ती में मौत के साए में वार्षिकोत्सव: पाइप और बल्लियों के बीच फंसी रही नौनिहालों की सांसें!
  • शिक्षा का मंदिर या खतरों का अखाड़ा? बीईओ की नाराजगी के बाद भी सन राइज स्कूल प्रबंधन मौन।
  • सरकारी आदेशों को ठेंगे पर रख रहा सन राइज स्कूल, क्या बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा प्रशासन?
  • खुलासा: अपनी नाकामियां छिपाने के लिए स्कूल में ‘जादूगरी’, मीडिया की पड़ताल में खुली पोल!
  • निर्माणाधीन खंडहर में बच्चों का मेला, जिम्मेदार बोले- अब होगी आर-पार की कार्रवाई!
  • सावधान! आपके बच्चे की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा सन राइज स्कूल, बीईओ ने दी सख्त चेतावनी।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

बस्ती। शिक्षा के मंदिर जब व्यापारिक केंद्र बन जाएं और बच्चों की सुरक्षा केवल कागजों तक सिमट जाए, तो ‘सन राइज’ जैसे हालात पैदा होते हैं। बस्ती रेलवे स्टेशन रोड स्थित सन राइज स्कूल में बीते 02 अप्रैल को आयोजित वार्षिकोत्सव में जो तमाशा हुआ, उसने न केवल अभिभावकों के रोंगटे खड़े कर दिए, बल्कि अब शिक्षा विभाग की रडार पर भी स्कूल प्रबंधन की गर्दन फंसती नजर आ रही है।

🔔नोटिस को रद्दी का टुकड़ा समझ रहा प्रबंधन?

हैरत की बात यह है कि नगर क्षेत्र खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विनोद कुमार त्रिपाठी द्वारा एक सप्ताह पहले जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ को स्कूल प्रबंधन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जवाब न देना सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती देने जैसा है। बीईओ ने इस ढिठाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अब दुबारा नोटिस जारी करने का फरमान सुनाया है। सवाल यह उठता है कि आखिर स्कूल प्रबंधन के पास छिपाने के लिए ऐसा क्या है जो वह जवाब देने से कतरा रहा है?

🔔प्रत्यक्षदर्शियों और आक्रोशित अभिभावकों के अनुसार:

  • कार्यक्रम स्थल पर चारों तरफ ईंटों के ढेर, नुकीली गिट्टियां, बालू और मोरंग बिखरा पड़ा था।
  • पूरे परिसर में लोहे की पाइपें और बांस की कच्ची बल्लियां मकड़जाल की तरह तनी हुई थीं।
  • प्रिंसिपल डॉ. फैजल अख्तर ने इन्हीं असुरक्षित पाइपों और बल्लियों के बीच से बच्चों के आने-जाने का रास्ता बनवाया था।

सोचिए, यदि कोई बच्चा दौड़ते हुए इन पाइपों से टकरा जाता या ऊपर से कोई लोहे का सामान गिर जाता, तो उसका जिम्मेदार कौन होता? अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने फीस के नाम पर मोटी रकम तो वसूली, लेकिन सुरक्षा के नाम पर बच्चों को ‘मौत के साए’ में खड़ा कर दिया।

🔔जादूगर का सहारा: क्या काबिल छात्रों का टोटा है?

अखबार की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी शैक्षणिक विफलताओं को छिपाने के लिए लखनऊ के जादूगर अनुराग मिश्रा का सहारा लिया। वार्षिकोत्सव में छात्रों की कला और मेधा दिखने के बजाय ‘हाथ की सफाई’ का खेल ज्यादा चला।

शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है: क्या सन राइज स्कूल के पास इतने छात्र भी नहीं हैं कि वे एक पूरा सांस्कृतिक कार्यक्रम कर सकें? या फिर स्कूल में शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है कि प्रबंधन को भीड़ जुटाने के लिए मदारी और जादूगरों का सहारा लेना पड़ रहा है? अभिभावकों का मानना है कि यह महज बस्ती की जनता को गुमराह करने और स्कूल की ‘चकाचौंध’ दिखाकर नए एडमिशन हथियाने का एक भद्दा तरीका था।

🔔मौत के साए में ‘उत्सव’: पाइप और बल्लियों के बीच फंसी रही सांसें

वार्षिकोत्सव के नाम पर स्कूल ने बच्चों और अभिभावकों को किसी ‘मौत के कुएं’ में धकेल दिया था। निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत, चारों तरफ बिखरी ईंट-गिट्टी और मोरंग, और ऊपर से नीचे तक जाल की तरह फैली लोहे की पाइपें और बांस की बल्लियां! क्या प्रिंसिपल डॉ. फैजल अख्तर को किसी बड़े हादसे का इंतजार था?

अभिभावकों का कहना है कि नन्हे-मुन्ने बच्चे उन्हीं खतरनाक पाइपों के बीच से गुजर रहे थे। अगर जरा सी चूक होती या कोई पाइप सरक जाता, तो आज जश्न की जगह मातम पसरा होता। यह ‘भगवान की दया’ ही थी कि कोई अप्रिय घटना नहीं घटी, वरना स्कूल प्रबंधन के पास पछतावे के सिवा कुछ न बचता।

🔔वार्षिकोत्सव या ‘जादूगरी’? जनता को गुमराह करने का दांव

मीडिया पड़ताल में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। स्कूल में छात्रों की प्रतिभा दिखाने के बजाय लखनऊ से बुलाए गए जादूगर अनुराग मिश्रा के नाम पर भीड़ जुटाई गई। जिले भर में चर्चा है कि क्या सन राइज स्कूल के पास दिखाने के लिए काबिल छात्र नहीं थे? या फिर अपनी कमियों और स्कूल की बदहाली पर ‘जादू का पर्दा’ डालने के लिए यह प्रपंच रचा गया था? वार्षिकोत्सव में ‘शिक्षा’ कम और ‘तमाशा’ ज्यादा देखने को मिला।

✍️प्रशासन से जनता के सवाल:

  • क्या बस्ती का जिला प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
  • निर्माणाधीन असुरक्षित भवनों में कार्यक्रम करने की अनुमति किसने दी?
  • क्या केवल नोटिस-नोटिस खेलकर खानापूर्ति की जाएगी या स्कूल पर तालाबंदी जैसी ठोस कार्रवाई होगी?

🔔क्या होगी कार्रवाई या फिर फाइलें होंगी ठंडी?

बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस का जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जनता पूछ रही है—क्या महज नोटिस की औपचारिकता से इन रसूखदारों के हौसले पस्त होंगे? बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले ऐसे संस्थानों पर क्या ताला लगेगा?

  • नोटिस का जवाब न देना पड़ा भारी, सन राइज स्कूल पर गिरेगी कार्रवाई की गाज – बीईओ
  • अनियमितताओं के घेरे में सन राइज स्कूल का वार्षिकोत्सव, विभाग ने दुबारा जारी किया नोटिस।
  • अभिभावकों का आक्रोश: असुरक्षित भवन में कार्यक्रम कराकर बच्चों की जिंदगी से खेला गया जुआ।

“सन राइज स्कूल ने अभी तक नोटिस का जवाब नहीं दिया है। यह घोर लापरवाही है। दोबारा नोटिस जारी किया जा रहा है, इसके बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर कठोरतम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”— विनोद कुमार त्रिपाठी, खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र बस्ती

अब देखना यह है कि प्रशासन का हंटर चलता है या फिर शिक्षा के नाम पर यह असुरक्षित ‘कारोबार’ यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।

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