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टेंडर में वित्तीय अनियमितता को लेकर सी एम से हुई सिकायत मे लगाई झूठी रिपोर्ट


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टेंडर मे बीत्तीय अनियमितता को लेकर CM से हुई शिकायत मे लगाई झूठी रिपोर्ट

IGRS के माध्यम से हुई CM से शिकायत पर लगाई  गयी रिपोर्ट।

टेंडर मे अनुभवहीन ठेकेदार को दिया लाभ पहुंचाने के लिये 45.54 करोड़ का कार्य की हुई थी शिकायत।

विधानसभा से भी उठ सकता है टेंडर मे हुई अनियमितत्ता से जुडा मामला।

इतना ही नहीं टेंडर मे अनियमितत्ता तों हुई ही इसके साथ चल हैँ मानक विहीन कार्य।

बस्ती मंडल के PWD के चीफ एवं अधिकारी सिर्फ कर रहे सिर्फ कोटा पूर्ति।

धर्मार्थ योजना के अंतर्गत बस्ती मंडल के जनपद संत कबीर नगर मे तामेश्वर नाथ मंदिर को जोड़ने वाली सड़क मे टेंडर मे अनियमितत्ता

अनुभवहीन ठेकेदार को दिया 45.54 करोड़ का कार्य।

टर्नओवर के हिसाब से अनुभव नहीं और बैलेंस शीट का 1/3 भी नहीं फिर थमा दिया 45.54 करोड़ का कार्य।

टेंडर मे की गयी बीत्तीय अनिमियतत्ता।

टेंडर के लिये चाहिए था 20 करोड़ का एक अनुभव – या 16- -16 करोड़ के दो – अथवा – 8 – करोड़ के 3 अनुभव की आवश्यकता- सूत्र

लेकिन PWD चीफ AC, अधिशासी अभियंता संत कबीर. नगर ने अपने लाभ लिए दे दिया अनुभवहीन ठेकेदार को कार्य।

विभाग के अधिकारियो ने टेंडर जारी न करके कार्य कर रहे ठेकेदार को फिर से दे दिया नया टेंडर।

अगर फिर से नए कार्य का टेंडर होता तो कम रेट पर भी विभाग को कार्य करने के लिए ठेकेदार मिल जाते और विभाग को वित्तीय लाभ होता।

जबकि विभाग द्वारा जारी जिओ मे साफ लिखा है की प्रयोजनान्तर्गत युटिलिटी शिफ्टिंग हेतु आंकलित/अनुमोदित लागत से सम्बन्धित कार्यों का विभाग द्वारा स्वयं सत्यापन करते हुये न्यूनतम आवश्यकता एवं वास्तविक व्यय के आधार पर शिफिटंग का कार्य सुनिश्चित किया जाय।

लेकिन सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय की कम्पनी युटिलिटी मे कही रजिस्टर्ड नहीं है फिर भी बना दिया गया अनुभव हीन ठेकेदार का पोल शिफ्टिंग वेरिएशन।

अगर जांच किया जाए तो सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय के रजिस्ट्रेशन मे लगे शुरुआती के अनुभव निकलेंगे फर्जी- सूत्र

जिसके पास निर्धारित मानकों के अनुसार न तो पर्याप्त अनुभव है और न ही आवश्यक टर्नओवर और बैलेंस शीट।

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे प्रकरण में संतकबीरनगर प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियन्ता आर.के. पांडेय की मिलीभगत की भी बात आ रही सामने।

इसके साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि फर्जी प्रपत्रों का दुरुपयोग कर अनुबंध का किया गया वेरिएशन (Variation)

जिसमें किसी भी प्रकार के निर्धारित नियमों का नहीं किया गया पालन।

नियमों के अनुसार इतने बड़े कार्य के लिए ठेकेदार का टर्नओवर कम से कम कार्य की लागत का एक-तिहाई होना होता है आवश्यक।

लेकिन इन मानकों की अनदेखी करते हुए किया गया ठेका आवंटित।

सूत्रों के अनुसार छोटे अनुबंध दिखाकर लगभग 800 प्रतिशत एस्ट्रा वेरिएशन भी किया जा चुका है।

नियम विरुद्ध कार्य की गुणवत्ता पर भी खडे हो रहे है गंभीर सवाल।

प्रदेश में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद इस तरह के आरोप सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे है सवाल।

अधिशासी अभियंता संत कबीर नगर आर0 के0 पांडेय पर इसके पहले भी लगे थे फर्जी टेंडर कराने का आरोप।

साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आर.के. पांडे की छवि शासन स्तर पर पहले से ही विवादित।

आर0 के0 पाण्डेय इस कंपनी पर आखिर क्यों है मेहरबान।

कई बार सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय की कम्पनी पर हो चुके हैँ मेहरबान

कई बार सुरेन्द्र नाथ पाण्डेय की कम्पनी को पहुंचा चुके हैँ कई करोड़ का लाभ।

3 साल पूरा होने पर भी उसी डिवीजन अंगद की तरह पाव जमाये बैठे है आर के पाण्डेय।

इसके पहले भी इसी सड़क पर जो कार्य था उसमे लीपापोती करके ले लिया गया था पेमेंट

अब देखना है की सड़क का टेंडर लेने वाले ठेकेदार और

REPORT- farman Haider

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