
कटनी:
क्रषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्था और गैर-जिम्मेदारी का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। यहां हालात ऐसे हैं जैसे कि बिना राजा की फौज न तो ना तो कोई भी काम सुचारु रूप से हो रहा है और न ही कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार है जानकारी के अनुसार मंडी में नियमित सचिव पिछले एक महीने से कार्यरत नहीं हैं। उनकी अनुपस्थिति में प्रभार किसी मिश्रा जी को सौंपा गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रभार संभालने वाले मिश्रा जी खुद ही जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं सूत्रों के मुताबिक मिश्रा जी का साफ कहना है — “मैं किसी भी विवाद में नहीं फंसना चाहता, मुझे सिर्फ प्रभार दिया गया है अब सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदारी लेने का साहस ही नहीं है, तो फिर प्रभार देने का मतलब क्या है इधर मंडी का बिजली बिल पिछले दो महीने से बकाया पड़ा है और आज तक उसका भुगतान नहीं किया गया। वहीं अन्य आवश्यक कार्यों के बिल भी पिछले दो महीनों से लंबित हैं। भुगतान न होने से ठेकेदारों और सेवा प्रदाताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है क्या मंडी बिना जिम्मेदार अधिकारी के ही चल रही है? क्या प्रभार देना सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है? आखिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मौन क्यों हैं? यह स्थिति सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, जहां अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं और आम व्यवस्था चरमरा रही है अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की जांच होगी या फिर जिम्मेदारी से भागने का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?





