
अजीत मिश्रा (खोजी)
साहब की चाय पर सक्रिय, पर ‘जहरीले’ पनीर पर मौन: क्या फूड विभाग का ईमान बिक चुका है?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- “रामा स्वीट हाउस की दबंगई: ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’, आखिर किसका संरक्षण है मिलावटखोरों को?”
- “साहब की गाड़ी आती है, हिस्सा लेती है और निकल जाती है… बस्ती में फूड विभाग बना ‘वसूली विभाग’!”
- “नकली पनीर की मंडी बना चिलमा बाजार: मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद क्या जागेगा कुंभकर्णी प्रशासन?”
- “बस्ती: अखिलेश यादव को चाय पिलाने वाले की जांच, लेकिन नकली सामान बेचने वालों को खुली छूट क्यों?”
- “रामा स्वीट हाउस की तीन दुकानों पर मिलावट का खेल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप।”
बस्ती। उत्तर प्रदेश का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर कम और अपनी ‘खास’ सक्रियता को लेकर ज्यादा चर्चा में है। ताज़ा मामला विभाग के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। एक तरफ विभाग उस शख्स की जांच करने में पूरी ताकत झोंक देता है जिसने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चाय पिलाई थी, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जिले के चिलमा बाजार में खुलेआम बिक रहा ‘सफेद जहर’ यानी नकली पनीर विभाग को दिखाई नहीं दे रहा।
दुबौलिया: ‘कमीशन’ के खेल में दांव पर जनता की जान
दुबौलिया थाना क्षेत्र के चिलमा बाजार से लगातार नकली पनीर और मिलावटी सामान की बिक्री की खबरें आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फूड विभाग की गाड़ी जब इलाके में आती है, तो हड़कंप मचने के बजाय एक ‘सेट खेल’ शुरू होता है। गाड़ी देखते ही दुकानें कुछ देर के लिए बंद होती हैं, कथित तौर पर ‘हिस्सा’ पहुँचता है और फिर गाड़ी रफूचक्कर हो जाती है। इसके बाद मिलावट का काला कारोबार फिर से सरपट दौड़ने लगता है।
”फूड विभाग को मिलता रहे अपना हिस्सा, भाड़ में जाए जनता” — यह जुमला आज चिलमा बाजार के हर आम आदमी की जुबान पर है।
रामा स्वीट हाउस: बेखौफ मिलावटखोरी और गुंडागर्दी
चिलमा बाजार स्थित रामा स्वीट हाउस और इसकी संचालित तीनों शाखाएं इस समय शिकायतों के केंद्र में हैं।
- दबंगई का आलम: एक माह पहले जब एक जागरूक ग्राहक ने खराब सामान की शिकायत की, तो दुकानदार ने सुधार करने के बजाय धमकी दी— “जाओ जांच करा लो, जो उखाड़ना हो उखाड़ लेना।” * सोशल मीडिया पर वायरल: कल फिर एक ग्राहक को नकली पनीर थमा दिया गया। पीड़ित ने जब इसका विरोध किया और वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, तो वह वायरल हो गया। दुकानदार की इस बेखौफी से साफ है कि उसे विभाग के ‘आशीर्वाद’ पर पूरा भरोसा है।
पोर्टल पर पहुंची शिकायत, क्या जागेगा प्रशासन?
थक-हारकर पीड़ित ग्राहक ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल पर नकली पनीर और मिलावटी सामान की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अब सवाल यह उठता है कि:
- क्या विभाग केवल राजनीतिक रसूख वाले मामलों में ही अपनी फुर्ती दिखाएगा?
- क्या चिलमा बाजार के बच्चों और आम जनता की जान की कीमत विभाग के ‘हिस्से’ से कम है?
- क्या रामा स्वीट हाउस जैसे संस्थानों पर नकेल कसी जाएगी या फिर ‘हिस्सा’ बढ़ाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
निष्कर्ष:
जनता अब तमाशा देख रही है। अगर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी चिलमा बाजार में नकली पनीर की बिक्री बंद नहीं हुई और रामा स्वीट हाउस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि बस्ती का फूड विभाग मिलावटखोरों का संरक्षक बन चुका है।
















