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बस्ती का ‘कसाईखाना’: प्रसव में मासूम का सिर धड़ से अलग, मैक्स हॉस्पिटल पर जड़ा ताला!

सफेद कोट में छिपे जल्लाद: नवजात की गर्दन रेती, शासन के चाबुक से मैक्स हॉस्पिटल सील!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🎯बस्ती में ‘मौत के सौदागरों’ का तांडव: नवजात का सिर धड़ से अलग, मैक्स हॉस्पिटल सील!🎯

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश 15 अप्रैल, 2026

  • खून से सनी बस्ती की स्वास्थ्य सेवा: लापरवाही ने ली मासूम की जान, अब ‘उधार के डॉक्टरों’ पर गिरेगी गाज!
  • स्वास्थ्य मंत्री के हंटर से बस्ती में हड़कंप: मैक्स हॉस्पिटल सील, कई बड़े चेहरों पर कार्रवाई की तैयारी!
  • बस्ती मंडल की बड़ी कार्रवाई: नवजात की मौत पर मैक्स हॉस्पिटल सील, सीएचसी स्टाफ पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार!
  • लापरवाही का अंत: सील हुआ मैक्स हॉस्पिटल, कलवारी थाने में केस दर्ज करने की कवायद शुरू।
  • रेफरल के नाम पर वसूली और मौत का खेल: क्या अब जागेंगे बस्ती के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार?
  • सीएचसी के बगल में ‘मौत की दुकान’: आखिर किसके संरक्षण में बिना मानक चल रहा था मैक्स हॉस्पिटल?
  • कोख उजाड़ने वाली लापरवाही: मासूम की मौत ने खोली बस्ती की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल!

बस्ती। जिले के कुदरहा इलाके से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर ‘सफेदपोश जल्लादों’ ने प्रसव के दौरान एक नवजात का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया। इस जघन्य अपराध और लापरवाही के बाद प्रशासन की नींद टूटी है और कुदरहा स्थित मैक्स हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है।

🎯अस्पताल नहीं, ‘कसाईखाना’ बन गया था मैक्स हॉस्पिटल

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुदरहा के ठीक बगल में संचालित मैक्स हॉस्पिटल बिना किसी मानक, बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों और बिना प्रशिक्षित स्टाफ के केवल ‘उधार के डॉक्टरों’ के भरोसे नोट छापने की मशीन बना हुआ था। जैसे ही शासन की टीम ने दबिश दी, अस्पताल के भीतर फैली गंभीर अनियमितताओं की पोल खुल गई। नतीजतन, अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है।

🎯लापरवाही की इंतहा: धड़ से अलग हुआ मासूम का सिर

घटना की शुरुआत सीएचसी कुदरहा से हुई, जहाँ प्रेमा देवी नामक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए लाया गया था। आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने क्रूरता और लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। प्रसव के दौरान जबरन खींचतान के चलते मासूम नवजात का सिर धड़ से अलग हो गया। इस खौफनाक मंजर को छिपाने के लिए आनन-फानन में महिला को मैक्स हॉस्पिटल भेजा गया, जहाँ मानवता को ताक पर रखकर संचालक ने रेफर करने के नाम पर भी 7,000 रुपये की अवैध वसूली की।

🎯स्वास्थ्य मंत्री सख्त, कई अधिकारियों पर गिरेगी गाज

मामले की गूंज लखनऊ तक पहुँचते ही स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर शासन की उच्च स्तरीय टीम मंगलवार को पूरे दिन बस्ती में डेरा डाले रही।

  • निशाने पर CHC: सीएचसी अधीक्षक, प्रभारी कुदरहा, स्टाफ नर्स कुसुम और आशा कार्यकर्ता पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
  • पुलिसिया कार्रवाई: पीड़िता के ससुर ने कलवारी थाने में तहरीर देकर स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
  • रडार पर अन्य अस्पताल: सूत्रों की मानें तो जिले के दर्जनों निजी अस्पताल जो ‘रेफरल रैकेट’ और अवैध कमीशन पर चल रहे हैं, अब जांच के दायरे में हैं।

🎯बड़ा सवाल: कब तक मासूमों की बलि लेता रहेगा यह ‘सिस्टम’?

कैली अस्पताल की डॉ. कल्पना मिश्रा ने ऑपरेशन कर महिला की जान तो बचा ली, लेकिन उस माँ की कोख उजाड़ने वालों का क्या? सवाल यह है कि सीएचसी के बगल में ही बिना मानकों के ‘मौत की दुकान’ (मैक्स हॉस्पिटल) कैसे फल-फूल रही थी? क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी, या फिर उनकी जेबें गर्म की जा रही थीं?

बस्ती की जनता अब केवल ‘अस्पताल सील’ होने से संतुष्ट नहीं है; जनता को उन ‘कातिलों’ की गिरफ्तारी चाहिए जिन्होंने एक मासूम को दुनिया में आने से पहले ही मौत के घाट उतार दिया।

सावधान! अगर अब भी स्वास्थ्य विभाग नहीं जागा, तो बस्ती के ये झोलाछाप और मानकविहीन अस्पताल इसी तरह गरीबों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।

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