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बस्ती: पट्टे के तालाब पर ‘सरकारी डकैती’, कागजों में खोद डाले लाखों रुपए; जीरो टॉलरेंस की उड़ी धज्जियाँ!

साहब को सब पता है, फिर भी मौन! तेनुआ गांव में प्रधान-सचिव का 'खेल', पट्टे के तालाब को बनाया उगाही का अड्डा।

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘विकास’: बस्ती में डबल इंजन सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा, कागजों में खोद डाला पट्टे का तालाब!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • गौर ब्लॉक के भ्रष्टाचार की गूँज अब हाईकोर्ट में! मछली पालन वाले तालाब पर फर्जी सफाई दिखाकर डकारे सरकारी ‘लाख’।
  • बस्ती घोटाला: तालाब में तैर रही मछलियाँ और कागजों में चल रही खुदाई! बेखौफ भ्रष्टाचारियों ने डकारा जनता का पैसा।
  • अजब गजब: बस्ती में पानी के ऊपर चली विकास की कुदाल! पट्टे वाले तालाब पर फर्जी भुगतान का ‘मास्टरस्ट्रोक’।

बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जिले के गौर विकासखंड में जिम्मेदार अधिकारी और ग्राम प्रधान मिलकर सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। मामला गौर विकासखंड के माझौवा चौबे के राजस्व गांव तेनुआ का है, जहाँ विकास के नाम पर आए सरकारी धन की ऐसी बंदरबांट हुई है कि सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं।

पट्टे के तालाब पर ‘फर्जीवाड़ा’ की सरकारी खुदाई

हैरानी की बात यह है कि जिस तालाब को राजस्व विभाग द्वारा मत्स्य पालन हेतु पट्टे पर दिया गया है, उस पर सरकारी धन खर्च कर सफाई और खुदाई का कार्य दिखाया जा रहा है। नियम कहते हैं कि पट्टे वाले तालाब पर सरकारी बजट का उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन यहाँ तो नियम-कायदों को ताक पर रखकर प्रधान और सचिव ने मिलकर लाखों की सरकारी रकम डकार ली। ग्रामीण बताते हैं कि तहसील हर्रैया से 22 मई 2025 को इस तालाब का पट्टा हो चुका था, जिसके बाद वर्तमान में वहां पानी भरकर मछली पालन किया जा रहा है।

कागजों में ‘विकास’, जमीन पर सिर्फ ‘धोखा’

सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल करें तो भ्रष्टाचार का खेल साफ नजर आता है। 24 जुलाई 2025 से 21 फरवरी 2026 के बीच इस तालाब पर फर्जी कार्य दिखाकर कई लाख रुपये की धनराशि निकाली जा चुकी है। जबकि हकीकत में मौके पर कोई कार्य नहीं हुआ है। प्रधान और सचिव को प्रशासन का जरा भी खौफ नहीं है, वे बेखौफ होकर ग्राम पंचायत के बजट का ‘बंदरबांट’ करने में जुटे हैं।

BDO की चुप्पी पर उठ रहे सवाल: क्या है मिलीभगत का खेल?

इस पूरे प्रकरण में खंड विकास अधिकारी (BDO) की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। जब उनसे इस संबंध में वार्ता की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि पट्टे वाले तालाब पर सरकारी कार्य नहीं कराया जा सकता। बावजूद इसके, महीनों से चल रहे इस लूटतंत्र पर उन्होंने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीणों का खुला आरोप है कि यह सब ऊपर से नीचे तक की मिलीभगत का परिणाम है।

अब ‘हाईकोर्ट’ में होगा हिसाब!

अधिकारियों की इस उदासीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, यदि इस गंभीर घोटाले पर जल्द ही जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

बड़ा सवाल: क्या बस्ती का जिला प्रशासन इन ‘सफेदपोश’ लुटेरों पर बुलडोजर चलाएगा या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल फाइलों में ही दफन हो जाएगी?

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