
अजीत मिश्रा (खोजी)
डिप्टी सीएम का ‘हंटर’ चला: स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, 5 डॉक्टर बर्खास्त, 17 पर गिरी गाज!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- अस्पतालों में ‘सिंडिकेट’ चलाने वालों पर सर्जिकल स्ट्राइक: अम्बेडकर नगर के CMO नपे, अवैध वसूली और लापरवाही पर पाठक का कड़ा प्रहार
- योगी सरकार का अल्टीमेटम: या तो मरीजों का इलाज करो या घर बैठो; 5 बर्खास्तगी के साथ स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप
- UP स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप: 5 डॉक्टरों की बर्खास्तगी से सहमे ‘कामचोर’, 17 अधिकारियों पर विभागीय जांच का वारंट
लखनऊ/बस्ती। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में जोंक की तरह चिपककर सिस्टम को खोखला करने वाले लापरवाह डॉक्टरों पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का ‘हंटर’ चला है। अपनी मनमर्जी और कुर्सी के रसूख में डूबे अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए सरकार ने 5 डॉक्टरों को सीधे बर्खास्त कर दिया है, जबकि एक सीएमओ (CMO) समेत 16 अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच का वारंट जारी कर दिया गया है।
कामचोरों की छुट्टी: अब नहीं चलेगी ‘सफेद कोट’ की मनमानी
लंबे समय से ड्यूटी से गायब रहकर जनता के टैक्स का पैसा डकारने वाले और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले ‘लाट साहबों’ पर यह अब तक की सबसे बड़ी चोट मानी जा रही है। बर्खास्त किए गए डॉक्टरों की सूची में गोरखपुर की डॉ. अलकनन्दा, कुशीनगर के डॉ. रामजी भारद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं। इन सभी पर लगातार अनुपस्थित रहने और अपने दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप सिद्ध हुए हैं।
कामचोरों का बोरिया-बिस्तर गोल: ये 5 डॉक्टर हुए बर्खास्त
स्वास्थ्य विभाग की जांच में पाया गया कि कई डॉक्टर महीनों से अस्पताल नहीं आ रहे थे और घर बैठे सरकारी सुविधाओं का आनंद ले रहे थे। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि ऐसे ‘सफेदपोश कामचोरों’ की विभाग में कोई जगह नहीं है। बर्खास्त होने वालों में शामिल हैं:
- डॉ. अलकनन्दा (गोरखपुर)
- डॉ. रामजी भारद्वाज (कुशीनगर)
- डॉ. सौरभ सिंह (बलरामपुर)
- डॉ. विकलेश कुमार शर्मा (अमेठी)
- डॉ. मोनिका वर्मा (औरैया)
भ्रष्टाचार का ‘नेक्सस’ ध्वस्त: रडार पर सीएमओ और डिप्टी सीएमओ
सिर्फ छोटी मछलियां ही नहीं, इस बार जाल में बड़े मगरमच्छ भी फंसे हैं। अम्बेडकर नगर के सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण में जमकर बंदरबांट करने और पद का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। एडीएम स्तर की जांच में भ्रष्टाचार की कलई खुलते ही डिप्टी सीएम ने इनके खिलाफ कड़े अनुशासनिक एक्शन के निर्देश दिए हैं।
भ्रष्टाचार का ‘अड्डा’ बना अम्बेडकर नगर: रडार पर बड़े अधिकारी
कार्रवाई की सबसे तीखी आंच अम्बेडकर नगर जिले में पहुंची है। यहाँ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के साथ ‘सांठगांठ’ करने के गंभीर आरोप हैं।
आरोप: पंजीकरण और नवीनीकरण में नियमों को ताक पर रखकर पद का दुरुपयोग किया गया।
जांच: एडीएम स्तर की समिति ने जब फाइलों को खंगाला, तो भ्रष्टाचार की परतें उधड़ती चली गईं। अब इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कार्रवाई की जद में आए अन्य ‘खिलाड़ी’:
- हरदोई: अवैध अस्पतालों को संरक्षण देने वाले चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह की जांच शुरू।
- प्रयागराज: सीएचसी मेजा के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर प्रशासनिक लापरवाही के चलते गाज गिरी, तबादले के साथ जांच तय।
- मथुरा: जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों पर गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाने का संगीन आरोप, अब भुगतेंगे अंजाम।
अवैध अस्पतालों को संरक्षण देने वालों की अब खैर नहीं
सिस्टम में घुन की तरह लगे अन्य अधिकारियों पर भी प्रहार हुआ है:
- हरदोई: यहाँ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर आरोप है कि उन्होंने इलाके में चल रहे अवैध निजी अस्पतालों के खिलाफ आंखें मूंद रखी थीं। अब उन्हें विभागीय जांच की आग का सामना करना होगा।
- प्रयागराज: सीएचसी मेजा के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर को प्रशासनिक लापरवाही और बदइंतजामी के चलते तत्काल प्रभाव से हटाते हुए उनके खिलाफ भी जांच बैठा दी गई है।
- मथुरा: यहाँ के जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों ने तो हद ही कर दी। उन पर फर्जी मेडिकोलीगल रिपोर्ट तैयार करने जैसा संगीन आरोप लगा है।
वेतन रोका, ‘परिनिंदा’ दंड की बौछार
सिर्फ बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि कई डॉक्टरों के खिलाफ कठोर दंड की प्रक्रिया शुरू की गई है। कई चिकित्साधिकारियों की सालाना वेतनवृद्धि (Increment) रोक दी गई है, जिससे उन्हें आर्थिक झटका लगा है। साथ ही कई को ‘परिनिंदा दंड’ देकर उनकी सर्विस बुक में दाग लगा दिया गया है, जो उनके करियर के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
“मरीजों की जान से खिलवाड़ और ड्यूटी में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो डॉक्टर काम नहीं करेंगे, उन्हें घर बैठने का इंतजाम सरकार कर देगी।” > — ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री (U.P.)
अंतिम वार: डिप्टी सीएम की इस आक्रामक कार्रवाई से पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। कई डॉक्टरों की वेतनवृद्धि रोक दी गई है तो कइयों को ‘परिनिंदा दंड’ दिया गया है। साफ है कि अब सरकारी अस्पतालों में हाजिरी खानापूर्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी होगी।

















