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बस्ती में गैस के लिए हाहाकार: आधी रात को ईंटों का पहरा, मासूमों को गोद में लिए सड़क पर डटी महिलाएं!

सिस्टम फेल: महाराजगंज में रसोई गैस बनी 'आफत', रात के अंधेरे में सुरक्षा और सम्मान दोनों दांव पर।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: गैस के लिए ‘गलाकाट’ जंग, आधी रात को सड़कों पर महिलाएं और मासूम; क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा प्रशासन?

ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • सन गैस एजेंसी की मनमानी या किल्लत? सिलेंडर के लिए महाराजगंज की सड़कों पर गुजरी रातें।
  • शर्मनाक! एक सिलेंडर के लिए आधी रात से लाइन में लग रहे हैं लोग, प्रशासन सोया गहरी नींद।
  • ईंटों की कतार और सिसकती जनता: बस्ती के कप्तानगंज में गैस के लिए मची लूट, महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल!
  • आधी रात, मासूम बच्चा और गैस की लाइन: महाराजगंज की इस तस्वीर को देख क्या पसीजेगा प्रशासन का दिल?
  •  महाराजगंज में सिलेंडर के लिए मचा त्राहि-त्राहि, गैस एजेंसी के बाहर ईंटों का कब्जा।
  •  रात भर सड़क पर रहने को मजबूर महिलाएं, सन गैस एजेंसी के बाहर सुरक्षा शून्य।
  •  गैस के लिए ‘गलाकाट’ जंग, कप्तानगंज पुलिस और तहसील प्रशासन मौन।

बस्ती। जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महाराजगंज कस्बे से मानवता को शर्मसार और व्यवस्था की पोल खोलती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर शासन-प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। यहाँ ‘सन गैस एजेंसी’ के बाहर रसोई गैस के एक अदद सिलेंडर के लिए हाहाकारी जंग छिड़ी हुई है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग रात के अंधेरे में अपनी जान जोखिम में डालकर गैस एजेंसी के सामने ‘ईंट’ रखकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

ईंटों की कतार और सिसकती व्यवस्था

महाराजगंज में गैस एजेंसी के सामने इंसानों से लंबी कतारें अब ईंटों की लग रही हैं। लोग रात के दो-तीन बजे से ही एजेंसी पर कब्जा जमा ले रहे हैं ताकि सुबह उन्हें गैस मिल सके। विडंबना देखिए कि जिस देश में ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘उज्ज्वला’ की कसमें खाई जाती हैं, वहां बस्ती के इस इलाके में एक सिलेंडर के लिए लोगों को आदिम युग की तरह पत्थर और ईंटों का सहारा लेना पड़ रहा है।

सुरक्षा भगवान भरोसे: रात भर सड़क पर महिलाएं और बच्चे

सबसे खौफनाक मंजर तो यह है कि इस कड़ाके की असुरक्षा के बीच महिलाएं अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को गोद में लेकर रात भर एजेंसी के बाहर डटी हुई हैं। अंधेरी रात, सुनसान सड़क और सुरक्षा का शून्य इंतजाम—ऐसे में अगर किसी महिला या बच्ची के साथ कोई अनहोनी या अप्रिय घटना घट जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या सन गैस एजेंसी का मालिक इसकी जिम्मेदारी लेगा या कप्तानगंज पुलिस और तहसील प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा?

एजेंसी की मनमानी या प्रशासन की नाकामी?

सवाल यह उठता है कि क्या क्षेत्र में गैस की इतनी किल्लत है कि हाहाकार मच गया है? या फिर गैस एजेंसी द्वारा सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है? आखिर क्यों जनता को रात-रात भर सड़कों पर सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है? स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी बैरंग लौटना पड़ता है।

तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं:

  • जिला पूर्ति अधिकारी (DS0) इस बदहाली पर खामोश क्यों हैं?
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाली सन गैस एजेंसी पर कार्रवाई कब होगी?
  • क्या बस्ती प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही अपनी आंखें खोलेगा?

महाराजगंज की ये तस्वीरें बता रही हैं कि जमीनी हकीकत सरकारी फाइलों से कोसों दूर है। यदि समय रहते गैस वितरण व्यवस्था नहीं सुधारी गई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

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