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कालांवाली की अतिरिक्त अनाज मंडी में मजदूरों का रोष, “पूरी मजदूरी दो” की उठी आवाज

रिपोर्टर इन्द्र जीत प्रजापति
दिनांक 18-4-26
स्थान कालावाली
जिला सिरसा
कालांवाली की अतिरिक्त अनाज मंडी में मजदूरों का रोष, “पूरी मजदूरी दो” की उठी आवाज

कालांवाली की अतिरिक्त अनाज मंडी (औढ़ां रोड) में गेहूं की आवक के बीच एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जहां एक ओर किसान अपनी फसल अच्छे भाव में बिकने से संतुष्ट नजर आए, वहीं दूसरी ओर मंडी में काम करने वाले मजदूरों के चेहरे मायूस दिखे। मजदूरों ने वर्षों से दबे अपने दर्द को मीडिया के सामने रखते हुए मजदूरी बढ़ाने और पूरी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग पर रोष व्यक्त किया।
मंडी में इन दिनों खेतों से सीधे गेहूं लेकर आ रहे किसानों की रौनक है। बिक्री की रफ्तार और भुगतान व्यवस्था से किसान खुश हैं, लेकिन इसी व्यवस्था में मजदूरों को अपनी मेहनत का पूरा हक नहीं मिल रहा—ऐसा आरोप मजदूरों ने लगाया। मजदूरों के पूर्व प्रधान सुखदेव सिंह ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी मजदूरी बढ़नी चाहिए थी, लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा तय दर 14 रुपये 29 पैसे बताई जा रही है, जो व्यवहार में मजदूरों तक पूरी नहीं पहुंचती।
सुखदेव सिंह के अनुसार, व्यापारी आई-फॉर्म में मजदूरी दर्ज कर उसे भुगतान प्रक्रिया के साथ भेजते हैं, जिससे किसान और व्यापारी की राशि सीधे बैंक खातों में चली जाती है। इसी तर्ज पर मंडी में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी भी सीधे उनके बैंक खातों में जानी चाहिए, ताकि बीच में किसी प्रकार की कटौती न हो और पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में मजदूरों को तय मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है, जो आर्थिक शोषण की श्रेणी में आता है।
मजदूरों ने एक स्वर में मांग रखी कि उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप पूरी मजदूरी दी जाए और भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। उनका कहना है कि मंडी की पूरी व्यवस्था उनकी मेहनत पर टिकी है, फिर भी वे ही सबसे उपेक्षित हैं।
वहीं, इस मामले पर मार्केट कमेटी सचिव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बताया कि मजदूरी बढ़ाने और भुगतान संबंधी शिकायतों को उपमंडल अधिकारी व उच्च अधिकारियों के ध्यान में ला दिया गया है। इस विषय पर दो दिन का समय मांगा गया है और शीघ्र समाधान का प्रयास किया जाएगा।
मौके पर पूर्व प्रधान सुखदेव सिंह सहित कई मंडी मजदूर उपस्थित रहे। अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि मजदूरों की “पूरी मजदूरी” की मांग कब और कैसे पूरी होती है।

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