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झालावाड़ में अंजुमन तरक्की उर्दू झालावाड़ राजस्थान का भव्य स्थापना समारोह संपन्न।

झालावाड़, 26 अप्रैल 2026 (रविवार) दार-अल-अर्कम पब्लिक स्कूल, सेंट जोसेफ स्कूल रोड, झालावाड़ में अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू राजस्थान की ब्रांच अंजुमन तरक्की उर्दू, झालावाड़ (राजस्थान) के स्थापना समारोह (इफ्तेताही तकरीब) का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें पहले सत्र में उद्घाटन समारोह तथा दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रकाश चंद यौवन (मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालरापाटन) रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हमीद अहमद ( भूगोल विभाग अध्यक्ष राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़), प्रोफेसर इकबाल फातिमा (इतिहास विभाग अध्यक्ष ) एवं सुरेश चंद्र निगम (अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झालावाड़) उपस्थित रहे।
अतिथियों के स्वागत उपरांत, अंजुमन के अध्यक्ष डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी ने तारुफ़ी कलमात पेश करते हुए झालावाड़ रियासत में उर्दू शेर-ओ-अदब की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने महाराजा भवानी सिंह जी एवं राव राजेंद्र सिंह जी के उर्दू साहित्य के विकास में योगदान की सराहना की। साथ ही, उन्होंने रियासत काल एवं स्वतंत्रता के बाद सक्रिय रही ऐतिहासिक अंजुमनों—अंजुमन अदब, बज़्म-ए-निरंग, बज़्म-ए-शफ़ीक आदि—का उल्लेख करते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया।
डॉ. टोंकी ने अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू (हिंद)
राजस्थान के इतिहास, उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए झालावाड़ शाखा की स्थापना की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने संस्था के भावी कार्यक्रमों एवं कार्ययोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इसके पश्चात अंजुमन की कार्यकारिणी की घोषणा की गई और सभी पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। प्रमुख पदाधिकारियों में सरपरस्त राकेश कुमार नायर, मुशीर-ए-आला प्रो. हमीद अहमद एवं सैयद जुबेर अली, मुशीर-ए-खास सुरेश चंद्र निगम, सदर डॉ. फहीमुद्दीन टोंकी, सेक्रेटरी यूनुस खान, जॉइंट सेक्रेटरी अरमान खान, कन्वीनर कवयित्री असमा खान ‘बहार’, मीडिया एवं तर्जुमा प्रभारी आसिफ शेरवानी, एडवोकेट तनवीर, खाजिन अब्दुल गनी एवं दानिश अहमद ‘दानिश’ शामिल रहे।
मुशायरा एवं कवि सम्मेलन:
दूसरे सत्र में उर्दू मुशायरा एवं हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अजीम बेग अजीम ने की। मंच पर राकेश कुमार नेयर एवं प्रकाश चंद यौवन भी विराजमान रहे। कार्यक्रम की निज़ामत शायर दानिश अहमद ‘दानिश’ ने बखूबी निभाई।
मुशायरे में नौजवान शायर अयान खान ने अपने अशआर से समां बांधा:
नमाज़-ए-इश्क पढ़ेंगे तेरी गली के अंदर,
वुज़ू करेंगे हम अपनी चश्म-ए-तर के अंदर।
कवि तुलसीराम ‘तुलसी’ ने प्रेम और संवेदना पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कीं:
आप ही ने तो सिखाया प्यार करना भी हमें,
आप तो यूँ बेवफ़ाई की न बातें कीजिए।
कवि देवेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा:
एक सुबह की सैर में मुझको हर इंसान मिला,
कोई हिंदू मिला तो कोई मुसलमान मिला,
मैंने उनसे की राम-राम, सलाम—यूँ मुझको एकता में महका हुआ हिंदुस्तान मिला।
कवि चेतन शर्मा जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी पंक्ति रही –
बंदीशे जब से लगी है वफाएं भूल गए
हैं।
कवि धनीराम समर्थ ने अपनी कविता प्रस्तुत की जिसकी महत्वपूर्ण पंक्तियां रही- हम जलायेंगे तब, दीप जल पायेगा।
बाग सींचेंगे तब,
फूल खिल पायेगा।।

एवं अन्य कवियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
वरिष्ठ शायर अजीम बेग ‘अजीम’ ने अपनी ग़ज़ल से खूब वाहवाही लूटी:
उनकी उल्फत में मोहब्बत में यह हालत हो जाए,
आँख जब बंद करूँ उनकी ज़ियारत हो जाए।
शायरा आफरीन खान ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को प्रभावित किया:
क्या हुई ख़ता, क्यों ख़फा-ख़फा से लगते हो,
क्या करोगे वफ़ा, तुम बेवफ़ा से लगते हो।
कवि राकेश कुमार नेयर ने अपने विचारों का प्रभावी इज़हार किया:

यारों यह बस बतलाने वाली बात नहीं है,
मेरा यह साया भी मेरे साथ नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर दार अल-अर्कम के डायरेक्टर श्रीमान सैयद जुबेर अली ने अतिथियों एवं पधारे हुए कवियों, शायरों और बुद्धिजीवियों का शुक्रिया अदा किया।
कार्यक्रम में हबीब खान, जावेद खान, वजाहत अली, जगदीश सोनी, अनीस अहमद, रशीद मियां, तौकीर आलम, सादिक भाई, रेखा सक्सेना सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहेॆॆ।
यह स्थापना समारोह न केवल उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि हिंदी-उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मजबूती प्रदान करने वाला यादगार आयोजन रहा।

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