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“नाथनगर ब्लॉक बना भ्रष्टाचार का अड्डा: बिना ‘10% दक्षिणा’ के डोंगल पर ताला, बेबस प्रधान, बेलगाम साहब!”

"कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा विकास: BDO नाथनगर पर वसूली के गंभीर आरोप, क्या यही है जीरो टॉलरेंस?"

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता विकास: नाथनगर BDO पर ‘कमीशनखोरी’ के गंभीर आरोप, आखिर कब तक मौन रहेगा प्रशासन?

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश (संतकबीरनगर)

  • “डिजिटल इंडिया का नया खेल: बिना चढ़ावे के नहीं लगता डोंगल, नाथनगर में विकास से पहले ‘साहब’ का भुगतान!”
  • “ईमानदार DM की साख को मातहतों का पलीता, नाथनगर BDO की ‘कमीशन नीति’ से ग्राम प्रधानों में उबाल!”
  • “नाथनगर में कमीशन का तांडव: भुगतान के बदले ‘कट’ फिक्स, निशाने पर खंड विकास अधिकारी!”

संतकबीरनगर। जनपद के विकास खंड नाथनगर में इन दिनों विकास की गंगा कम और ‘कमीशनखोरी’ का कीचड़ ज्यादा नजर आ रहा है। शासन की मंशा है कि ग्राम पंचायतों का कायाकल्प हो, लेकिन नाथनगर में तैनात खंड विकास अधिकारी (BDO) पर लगे गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों की मानें तो यहाँ बिना ‘चढ़ावे’ के विकास कार्यों की फाइलें आगे नहीं सरकतीं और ग्राम प्रधानों का दम घुट रहा है।

‘10% फिक्स’ या डोंगल पर ब्रेक!

नाथनगर ब्लॉक से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, खंड विकास अधिकारी ने कमीशनखोरी का ऐसा जाल बुना है कि विकास कार्य दम तोड़ रहे हैं। चर्चा है कि पक्के कार्यों से लेकर मनरेगा जैसे ‘कच्चे’ कार्यों तक में 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की जाती है। सबसे शर्मनाक आरोप तो यह है कि जब तक अधिकारी की ‘जेब गरम’ नहीं होती, तब तक भुगतान के लिए डोंगल नहीं लगाया जाता। प्रधानों का आरोप है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में तकनीकी शक्ति का उपयोग विकास के लिए नहीं, बल्कि उगाही के हथियार के रूप में किया जा रहा है।

नई ‘नीति’ के नाम पर अवैध वसूली का खेल

सूत्रों का दावा है कि साहब की भूख यहीं शांत नहीं होती। समय-समय पर नई ‘प्रशासनिक नीतियों’ का हवाला देकर कमीशन के रेट बढ़ा दिए जाते हैं। जो प्रधान इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे तकनीकी खामियों और जांच का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है। नाम न छापने की शर्त पर कई ग्राम प्रधानों ने स्वीकारा कि नाथनगर ब्लॉक में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन चुका है।

ईमानदार जिलाधिकारी की साख पर बट्टा

एक तरफ जनपद के जिलाधिकारी अपनी ईमानदार और सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनके मातहत अधिकारी अपनी मनमानी से शासन की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि:

  • क्या जिले के उच्चाधिकारियों को नाथनगर में चल रहे इस ‘कमीशन के खेल’ की भनक नहीं है?
  • क्या ग्राम प्रधानों के शोषण को सरकारी संरक्षण प्राप्त है?
  • आखिर क्यों अब तक इन आरोपों पर कोई प्रारंभिक जांच शुरू नहीं हुई?
  • कार्रवाई का इंतजार या सिर्फ आश्वासन?

नाथनगर के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप होने की कगार पर हैं क्योंकि बजट का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करने वाली सरकार और जिला प्रशासन इन आरोपों पर क्या कड़ा रुख अपनाता है। क्या आरोपी अधिकारी पर गाज गिरेगी या रसूख के दम पर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

जनता की नजरें अब सीधे जिला मुख्यालय पर टिकी हैं!

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