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हरैया में गुंडाराज: खाकी हुई दागदार, मुकुट चोरों पर मेहरबान थानेदार! काली मां का मुकुट गायब, हरैया पुलिस का इकबाल गायब; जनता पूछती है- कहां है गश्त?

पुलिस की जेब गरम, इलाके में जुर्म नरम? हरैया में चोरों और नशेड़ियों का 'खुला दरबार'। वर्दी की सुस्ती या मिलीभगत? 15 दिन बाद भी खाली हाथ, हरैया पुलिस फेल।

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी की सुस्ती, चोरों की मस्ती: हरैया में ‘अंगद’ के पांव की तरह जमे थानेदार, आस्था पर प्रहार फिर भी पुलिस लाचार

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • अंगद के पांव की तरह जमे थानेदार, मुकुट ले गए चोर, पुलिस करती रही ‘मलाई’ का इंतजार।
  • वाह रे हरैया पुलिस! मंदिर में चोरी और थाने में चाकरी; रक्षक बने भक्षक?
  • चोरों के आगे नतमस्तक हरैया पुलिस, जमीन कब्जाने और फोटो खिंचवाने में नंबर-1।
  • जब मंदिर सुरक्षित नहीं तो हम कैसे रहें? हरैया पुलिस की नाकामी से जनता में उबाल।
  • आस्था पर प्रहार, हरैया पुलिस लाचार: क्या फाइल दबाकर मुकुट डकार जाएगी पुलिस?
  • खुली चुनौती: चोरों ने तोड़ी मंदिर की मर्यादा, पुलिस ने तोड़ी जनता की उम्मीद।

हरैया, बस्ती।। जिले की सबसे बड़ी तहसील हरैया इन दिनों अपराधियों की शरणस्थली और पुलिस की नाकामी का केंद्र बन गई है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में संदेह के घेरे में आ जाएं और कानून का इकबाल खत्म हो जाए, तो जनता किसके पास जाए? हरैया थाने की कमान संभालते ही प्रभारी निरीक्षक ने अपराध के ग्राफ को जिस तेजी से ऊपर पहुंचाया है, उसने क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

15 दिन बीते, ‘काली मां’ का मुकुट गायब: सो रही हरैया पुलिस

ग्राम पंचायत गोविया के मरवट गांव में स्थित प्राचीन काली मंदिर में हुई लाखों की चोरी ने पुलिसिया गश्त की पोल खोलकर रख दी है। बेखौफ चोरों ने मां काली के दरबार से चांदी का मुकुट पार कर दिया, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी हरैया पुलिस के हाथ खाली हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि जब मंदिर ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे समझे? ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने इस मामले को ‘ठंडे बस्ते’ में डालकर फाइल कूड़ेदान के हवाले कर दी है।

जमीन कब्जाने में मस्त, ड्रग्स माफियाओं को ‘सुरक्षा’ का कवच!

हरैया पुलिस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि थाना अध्यक्ष का ध्यान अपराध नियंत्रण से ज्यादा ‘जमीन के सौदों’ पर है। चर्चा है कि दबंगों से मोटी रकम लेकर जमीन कब्जा कराने में खाकी पूरी तरह मस्त है। इतना ही नहीं, शाम ढलते ही क्षेत्र में ड्रग्स माफिया सक्रिय हो जाते हैं, जिन्हें कथित तौर पर थाने का संरक्षण प्राप्त है। नशे के इस काले कारोबार ने युवाओं के भविष्य को गर्त में धकेल दिया है, लेकिन पुलिस की जेबें गरम हैं, इसलिए सब कुछ ‘ऑल इज वेल’ है।

चोर-सिपाही का खेल: छोटे प्यादों पर वाहवाही, बड़े मगरमच्छों पर खामोशी

जब भी दबाव बढ़ता है या कुर्सी डगमगाती है, तो हरैया पुलिस अपनी साख बचाने के लिए किसी छोटे-मोटे चोर को पकड़कर फोटो खिंचवाती है और पीठ थपथपाती है। असली मास्टरमाइंड और पेशेवर गिरोह आज भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। जनता का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस को सब पता है कि अपराधी कौन हैं और कहां हैं, लेकिन ‘लेन-देन’ के खेल ने वर्दी की आंखों पर पट्टी बांध दी है।

क्षेत्र में दहशत, पुलिस की गश्त सिर्फ कागजों पर

मरोट गांव जैसी छोटी बस्तियों में अब लोग रात में सोने से कतरा रहे हैं। लगातार हो रही चोरियों ने जनता को सहमा दिया है। पुलिस की रात्रि गश्त सिर्फ एक मजाक बनकर रह गई है। जहां एक ओर सुरक्षा के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर चोर मंदिरों में सेंध लगाकर पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं।

मुख्य सवाल जो हरैया पुलिस को चुभेंगे:

  • क्या काली मंदिर का मुकुट कभी बरामद होगा या इसे पुलिस की विफलता का स्मारक मान लिया जाए?
  • थाना अध्यक्ष तहसीलदार के 2 साल के कार्यकाल में चोरियों का ग्राफ क्यों बढ़ा?
  • क्या ड्रग्स माफियाओं और भू-माफियाओं के साथ खाकी की सांठगांठ की जांच उच्च अधिकारी करेंगे?

निष्कर्ष: हरैया थाना अध्यक्ष अंगद के पांव की तरह अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं, जबकि क्षेत्र की जनता न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। अगर जल्द ही मां काली का मुकुट बरामद नहीं हुआ और अपराधियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। बस्ती पुलिस के आला अधिकारियों को इस ‘लापरवाही के गढ़’ पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है।

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