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“हरैया थाने में बिका न्याय? बुजुर्ग महिला के टूटे दांत, फिर भी थानेदार का ईमान नहीं जागा!”

"खाकी की रूह बेच दी साहब! रक्षक बने भक्षक: हरैया थाना अध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: खाकी के संरक्षण में ‘दबंगई’, हरैया थाना बना भ्रष्टाचार का अड्डा!

ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • बुजुर्ग महिला के टूटे दांत, पर थानेदार का दिल नहीं पसीजा; रक्षक ही बने भक्षक
  • खूनी खेल पर भारी ‘मलाई’: दबंगों ने बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर पीटा, पुलिस ने पीड़ितों का ही काटा चालान।”
  • “तहसीलदार सिंह की तानाशाही से थर्राया हरैया! क्या मोटी रकम के आगे झुक गया कानून का इकबाल?”
  • “बस्ती में जंगलराज: वीडियो वायरल फिर भी पुलिस मौन, आखिर किसका संरक्षण पा रहे हैं सहसराव के दबंग?”
  • “हरैया पुलिस: रसूखदारों की गुलाम, पीड़ितों के लिए श्मशान!”
  • “न्याय की हत्या: हरैया थानेदार की लापरवाही कहीं बड़ी घटना को न दे दावत।”

बस्ती (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस का चेहरा हरैया सर्कल में पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। जहाँ एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, वहीं हरैया थाना अध्यक्ष तहसीलदार सिंह की कार्यशैली ने पुलिसिया इकबाल को ठेंगे पर रख दिया है। सहसराव गांव में जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है, लेकिन सत्ता और रसूख के नशे में चूर स्थानीय पुलिस को शायद कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

खून से सनी दास्तां: बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर पीटा

​सहसराव गांव में दबंगों ने सारी हदें पार करते हुए एक युवक और बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा। प्रहार इतना घातक था कि बुजुर्ग महिला के दांत टूट गए और युवक गंभीर रूप से घायल है। लेकिन न्याय की उम्मीद में थाने पहुंचे पीड़ितों को जो मिला, वह घाव से भी ज्यादा गहरा था।

थानेदार का ‘खेल’: मेडिकल के बजाय 151 का पर्चा!

​हैरानी की बात यह है कि गंभीर रूप से घायल युवक का मेडिकल कराने के बजाय, थाना अध्यक्ष ने उसे दिन भर थाने में बैठाए रखा और उल्टा धारा 151 में चालान कर दिया।

  • सवाल उठता है: क्या टूटे हुए दांत और बहता हुआ खून थानेदार को नजर नहीं आया?
  • आरोप: चर्चा आम है कि “मोटी रकम” के चक्कर में पीड़ितों की चीखें दबा दी गईं।

वीडियो वायरल, फिर भी पुलिस मौन

​घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, दबंग खुलेआम चुनौती दे रहे हैं, लेकिन हरैया पुलिस कुंभकर्णी नींद में है। अधिकारियों का फोन न उठाना और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश यह साफ करती है कि यहाँ कानून का राज नहीं, बल्कि “रुपये का राज” चल रहा है।

“ऐसे थाना अध्यक्ष को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जो पीड़ितों को न्याय देने के बजाय दबंगों की ढाल बन जाए।”स्थानीय जनमानस

 

कल कप्तान की चौखट पर होगा न्याय का फैसला

​थाना अध्यक्ष की लापरवाही और रिश्वतखोरी से तंग आकर अब पीड़ित परिवार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कल बुजुर्ग महिला और घायल युवक पुलिस कप्तान (SP) के कार्यालय के सामने धरना देंगे। यदि समय रहते कार्रवाई न हुई और दोबारा हमला हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हरैया थाना अध्यक्ष और स्थानीय प्रशासन की होगी।

आम जनमानस में भारी आक्रोश

​हरैया सर्कल में घटनाओं की बाढ़ आ गई है, लेकिन तहसीलदार सिंह को शायद जनता की सुरक्षा से ज्यादा “निस्तारण के नाम पर वसूली” में दिलचस्पी है। जनता पूछ रही है— क्या हरैया में न्याय बिक चुका है?

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