
*मातृत्व दिवस पर मातृशक्ति के त्याग, समर्पण एवं ममता को कोटिशः नमन : सुरोतीलाल लकड़ा*

तिलक राम पटेल संपादक महासमुंद वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल
“माँ सृष्टि की सबसे पवित्र शक्ति, उनका आशीर्वाद जीवन का सबसे बड़ा संबल : सुरोतीलाल लकड़ा”
सरायपाली – सरायपाली विधानसभा के भाजपा मंडल केदुवां के महामंत्री सुरोतीलाल लकड़ा ने मातृत्व दिवस के पावन अवसर पर समस्त मातृशक्ति को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि माँ सृष्टि की वह अनुपम शक्ति हैं, जिनके चरणों में प्रेम, त्याग, वात्सल्य, धैर्य, करुणा एवं संस्कारों का सम्पूर्ण संसार समाहित होता है।
उन्होंने कहा कि माँ केवल एक शब्द या रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन का सबसे पवित्र, दिव्य और अनमोल एहसास हैं। माँ का स्नेह जीवन की पहली अनुभूति, पहला आशीर्वाद और प्रत्येक संघर्ष में संबल देने वाली सबसे बड़ी शक्ति होता है। एक माँ अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, सुख और सफलता के लिए स्वयं हर कष्ट सहकर भी सदैव उनके जीवन में खुशियों का प्रकाश फैलाने का कार्य करती है।
सुरोतीलाल लकड़ा ने कहा कि माँ का त्याग, समर्पण और निस्वार्थ प्रेम किसी भी शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। माँ अपने बच्चों को केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि उन्हें संस्कार, नैतिकता, अनुशासन, सेवा और मानवता का पाठ पढ़ाकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माँ की ममता में ईश्वर का स्वरूप दिखाई देता है तथा उनकी प्रार्थनाओं में संपूर्ण परिवार और समाज के कल्याण की भावना निहित रहती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माँ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे संस्कारों में माँ को प्रथम गुरु माना गया है, क्योंकि वही बच्चों के जीवन की पहली शिक्षिका होती हैं। माँ के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही व्यक्ति जीवन के कठिन से कठिन मार्ग पर भी सफलता प्राप्त करता है।
इस अवसर पर सुरोतीलाल लकड़ा ने समस्त माताओं के त्याग, समर्पण, तपस्या एवं अमूल्य योगदान को कोटिशः नमन करते हुए कहा कि मातृशक्ति समाज की आधारशिला है। एक संस्कारित और मजबूत समाज के निर्माण में माताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि समस्त मातृशक्ति सदैव सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सम्मान, खुशहाली एवं दीर्घायु जीवन से परिपूर्ण रहें तथा उनका स्नेह और आशीर्वाद सदैव समाज एवं राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करता रहे।
अंत में उन्होंने कहा —
“माँ है तो जीवन है, माँ है तो पूरा संसार है। माँ का स्थान इस सृष्टि में सर्वोच्च और अतुलनीय है।”



