
*धार, सुरेन्द्र दुबे डिस्टिक हेड
18 अप्रैल 2026।* महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री सुभाष जैन के निर्देशन एवं परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) श्री सत्यनारायण मकवाना के मार्गदर्शन में आज विकासखंड तिरला के सेक्टर सलकनपुर में ‘नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा’ तथा ‘पोषण पखवाड़ा’ का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों, रसोइयों एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
*नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा और महिला सशक्तिकरण*
कार्यक्रम के दौरान पर्यवेक्षक श्रीमती राखी देवड़ा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक कानून विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करता है, जिससे भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका और अधिक सुदृढ़ होगी। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं अधिकारों पर केंद्रित भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।
*पोषण मेला और व्यंजन प्रदर्शनी*
पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत सेक्टर की विभिन्न पंचायतों द्वारा पांच अलग-अलग थीम पर पोषण स्टॉल लगाए गए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक सामग्री से निर्मित विभिन्न व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई और कुपोषण मुक्त समाज का संदेश दिया।
*मेधावी छात्राओं और कर्मठ महिलाओं का सम्मान*
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को प्रोत्साहित करने हेतु कक्षा 10वीं और 12वीं की छात्राओं—जया भाभर, पूनम शक्ति, कल्पना चौहान, शिवानी सोलंकी, गायत्री डावर, रोशनी बारिया, सुहानी मोहनिया, पायल दिलीप और प्राची जितेंद्र को प्रमाण पत्र, शील्ड और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इसी कड़ी में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु राखी देवड़ा, ममता चौहान, ज्योति पटेल, मनीषा भूरिया, राधिका सोलंकी, फाल्गुनी ठाकुर, बुरी मुकेश मकवाना, कोटा जगदीश द्वार, तारा नानूराम बुंदेला, गीत शांति जितेंद्र मुनिया, पांच मोहनिया, ललिता दिनेश और प्रणिता देशमुख को ‘नारी शक्ति वंदन सम्मान’ से नवाजा गया।
*बाल चौपाल और खेल गतिविधियां*
शाला पूर्व शिक्षा के अंतर्गत बच्चों के लिए ‘बाल चौपाल’ का आयोजन किया गया, जिसमें नन्हे बच्चों ने कविताओं और कहानियों की हाव-भाव सहित प्रस्तुति दी। साथ ही खेल-कूद और कला गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक कौशल को निखारने का प्रयास किया गया, जिसमें बच्चों ने रंगों के आधार पर वस्तुओं के वर्गीकरण की गतिविधि में भाग लिया।










