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नोएडा के आंदोलनकारी श्रमिकों के दमन के खिलाफ एक्टू का विरोध प्रदर्शन

*प्रेस विज्ञप्ति*

*नोएडा के आंदोलनकारी श्रमिकों के दमन के खिलाफ एक्टू का विरोध प्रदर्शन*

*पूंजीपतियों से यारी और श्रमिकों से गद्दारी कर रही मोदी सरकार– एक्टू

गयाजी– 17 अप्रैल 26

ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के देशव्यापी आह्वान पर आज गयाजी में नोएडा, मानेसर, पानीपत, सूरत समेत तमाम क्षेत्रों में मज़दूरों के फुट रहे आंदोलन के एकजुटता में तथा आंदोलनकारी मजदूरों पर योगी मोदी सरकार के दमन के खिलाफ ऐक्टू ने विरोध मार्च निकाला।

विरोध मार्च से ऐक्टू ने नोएडा के सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारी मजदूरों और यूनियन कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने, मजदूरों के विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस प्रशासन द्वारा किया जा रहा हिंसक दमन बंद करने, भुखमरी के स्तर का वेतन नहीं बंदकर वेतन बढ़ाकर 42,000 रुपये प्रति माह करने, बारह घंटे का कार्यदिवस पर रोक लगाने, ओवरटाइम काम का दुगने दर से भुगतान करने, सभी मजदूरों के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड कानून रद्द करने, कॉन्ट्रैक्ट प्रथा तथा फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया।

कार्यक्रम समाहरणालय स्थित अंबेडकर पार्क के पास आयोजित हुआ जिसमें एक्टू जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह, जिला सचिव रामचंद्र प्रसाद, माले नगर प्रभारी तारिक अनवर, जिला कमेटी सदस्य रीता वर्णवाल, मो. शेरजहां, बच्चू सिंह, सुदामा राम, वीरेंद्र सान्याल, नवल किशोर यादव समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे।

सभा को संबोधित करते हुए ऐक्टू नेता अर्जुन सिंह ने योगी मोदी सरकार पर कम्पनी मालिकपरस्ती का आरोप लगाते हुए कहा कि कम्पनी मालिकों के चरम मुनाफे की रक्षा में खड़ी योगी मोदी सरकार कम वेतन देने वाले कम्पनी मालिकों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं कर उल्टे मजदूरों पर दमन चक्र चला रही है। उन्होंने नोएडा के गिरफ्तार 300 से अधिक मजदूरों व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को बिना शर्त अविलम्ब रिहा करने की मांग किया।

उन्होंने कहा कि कम दाम और ज्यादा काम नहीं चलेगा, काम का वाजिब दाम देना ही होगा, न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ाकर 42,000 करना होगा।

वहीं रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि कंपनी मालिकों के मुनाफे के अथाह लालच को बचाने बढ़ाने में लगी योगी मोदी सरकार ने देश के मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल दिया है। नोएडा के मज़दूरों की काफी समय से लंबित मांगों को न केवल नजरअंदाज किया गया, बल्कि कारखाना मालिकों और संपूर्ण सरकारी तंत्र के शोषणकारी गठजोड़ द्वारा रोटी के लिए संघर्षरत मजदूरों पर हिंसा का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है। एलपीजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण प्रवासी मज़दूरों के सामने संघर्ष करने या भुखमरी का शिकार हो जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान 3 काले कृषि कानून के खिलाफ लड़े और जीते उसी तरह देश का मजदूर लड़कर अपनी मांगें व जीत हासिल करेगा।

*रामचंद्र प्रसाद, एक्टू, गया*

त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार

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