A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरे

धोखे की फॉर्च्यूनर और वफादारी का कत्ल: क्या ‘लाइट वाले बाबू साहब’ का यही असली चेहरा है?

बस्ती की राजनीति में ‘गद्दारी’ का नया अध्याय: फर्श से अर्श तक पहुँचाने वाले ‘गुरु’ की गर्दन नापने को तैयार ‘चेला’!

ब्यूरो रिपोर्ट | बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

बस्ती। राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न दुश्मन, लेकिन बस्ती की धरती पर इन दिनों ‘शागिर्द’ की वफादारी का जो नया स्वरूप देखने को मिल रहा है, उसने नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। कल तक जो ‘लाइट वाले बाबू साहब’ टूटी-फूटी कार में धक्का मारते फिरते थे, आज वे अपने ‘गुरु’ को ही आँखें दिखाने की हिमाकत कर रहे हैं। जिस हाथ ने ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया, आज वही हाथ उस ‘गुरु’ का गला रेतने को बेकरार है।

गुरु गुड़ ही रहे, चेला ‘चीनी’ होकर कड़वा हो गया!

​यह बस्ती की राजनीति का सबसे स्याह सच है कि पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने जिन कंधों को राजनीति की सीढ़ी बनाया, आज वही कंधे उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे हैं। चर्चा आम है कि जिस ‘शागिर्द’ को मंत्री जी ने स्कॉर्पियो से लेकर फॉर्च्यूनर तक का सफर तय कराया, आज वह ‘सोने की मोटी चैन’ के रौब में अपने अतीत को पूरी तरह भुला चुका है।

​”सवाल यह नहीं कि शागिर्द आगे बढ़ गया, सवाल यह है कि जिस गुरु ने फर्श से उठाकर आसमान की ऊँचाइयों पर बिठाया, आज वह चेला उसी गुरु की जड़ों में मट्ठा डालने का काम कर रहा है।”

 

बेईमानी और दगाबाजी का नया ‘ब्रांड एम्बेसडर’

​हैरैया विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक ऐसे ही ‘बाबू साहब’ की चर्चा जोरों पर है, जिन्होंने वफादारी के बदले दगाबाजी को अपना चुनावी हथियार बना लिया है। जानकारों का कहना है कि:

  • अतीत का साया: जिनके पूर्वजों ने ‘बैंक’ बनाकर क्षेत्र की जनता को ठगा, आज उनके वंशज ‘न्याय मार्ग’ की दुहाई दे रहे हैं।
  • दिखावे की राजनीति: गले में 10 से 12 लाख की सोने की चैन पहनकर घूमने वाले इन ‘बाबू साहब’ का वैभव उस दौर की देन है, जब वे मंत्री जी के खास सिपहसालार हुआ करते थे।
  • विश्वासघात की पराकाष्ठा: ‘चंगेरवा’ से लेकर ‘पोखरभिटवा’ तक, इन्होंने न सिर्फ अपने गुरु को छला, बल्कि उन अपनों को भी नहीं बख्शा जिन्होंने मुश्किल वक्त में इनका साथ दिया था।

अफ़सोस! ‘इंसान’ को पहचान न सके राजकिशोर

​आज राजकिशोर सिंह के करीबियों के बीच यह चर्चा आम है कि काश! मंत्री जी ने ‘इंसान’ और ‘गद्दार’ के बीच का फर्क समय रहते समझ लिया होता। मीडिया और जनता बार-बार चेतावनी दे रही थी, लेकिन उदारता की राजनीति ने एक ऐसे ‘साँप’ को दूध पिलाया जो आज चुनाव के वक्त फन फैलाकर खड़ा है।

सावधान बस्ती! राजनीति के इन ‘धोखेबाजों’ से सतर्क रहने की जरूरत है। जो अपने ‘गुरु’ का सगा नहीं हुआ, वह जनता का क्या होगा? आज भले ही ये फॉर्च्यूनर से धूल उड़ा रहे हों, लेकिन इतिहास गवाह है कि जो लोग अपनों की गर्दन काटकर आगे बढ़ते हैं, वक्त उनकी बुनियाद भी जल्द ही हिला देता है।

बस्ती राजनीति विशेष: वफादारी का कत्ल और सत्ता की हवस!

Back to top button
error: Content is protected !!