
बाड़मेर।
यह मामला केवल एक हमले का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को कुचलने की एक अत्यंत खतरनाक, ज्वलंत और गंभीर साजिश के रूप में सामने आया है। ग्राम पंचायत नवातला राठोड़ान में सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश कर रहे पत्रकार पर सुनियोजित तरीके से जानलेवा हमला किया गया। पुलिस थाना धनाऊ में प्रकरण दर्ज होते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त तथ्यों के अनुसार पत्रकार देवीलाल जाखड़ ने पंचायत में मनरेगा एवं अन्य विकास कार्यों में हो रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर 14 फरवरी 2026, 16 दिसंबर 2026 एवं 18 फरवरी 2026 को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किए थे। इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी द्वारा 6 अप्रैल 2026 को पत्र जारी कर 13 अप्रैल 2026 को अभिलेखों के निरीक्षण हेतु पंचायत कार्यालय बुलाया गया।
निर्धारित समय पर पंचायत मुख्यालय पहुंचे पत्रकार को रिकॉर्ड दिखाने के बहाने एक कक्ष में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया गया। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच प्रतिनिधि एवं अन्य लोगों ने मिलकर संगठित रूप से हमला किया। पीड़ित को जमीन पर गिराकर बेरहमी से लात-घूंसे मारे गए और जबरन खाली कागजों, रजिस्टरों एवं हस्तलिखित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
हमले के दौरान पत्रकार की जेब से 17,530 रुपये नकद, एक तोला सोने की अंगूठी एवं मोबाइल फोन छीन लिया गया। घटना के दौरान मची चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी वाहन से फरार हो चुके थे।
पीड़ित पत्रकार का स्पष्ट आरोप है कि पंचायत में चल रहे भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े खुलासे को रोकने के उद्देश्य से यह हमला एक पूर्वनियोजित और अत्यंत खतरनाक षड्यंत्र के तहत किया गया।
ग्राम पंचायत नवातला राठोड़ान में मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में फर्जीवाड़े की शिकायतें पहले से ही चर्चा में रही हैं। पूर्व में हुई जांच में भी कई अनियमितताओं के संकेत सामने आए थे, जिनमें ग्रेवल सड़क निर्माण कार्यों में गड़बड़ी तथा कागजों में टांका निर्माण दिखाकर भुगतान उठाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ऐसे में आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी से पूरे भ्रष्टाचार तंत्र के उजागर होने की संभावना थी, जिससे संबंधित पक्षों में घबराहट व्याप्त हो गई।
यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर सीधा हमला मानी जा रही है। ऐसे मामलों में यदि कठोर एवं त्वरित कार्रवाई नहीं होती है तो यह प्रवृत्ति भविष्य में और अधिक खतरनाक रूप ले सकती है।
पुलिस थाना धनाऊ द्वारा मामला दर्ज कर लिया गया है तथा आरोपियों की तलाश के साथ पूरे प्रकरण की गहन, निष्पक्ष एवं नियमसम्मत जांच प्रारंभ कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है।
यह प्रकरण एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और चेतावनी देने वाला उदाहरण है कि किस प्रकार भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को निशाना बनाया जाता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच एजेंसियां इस अत्यंत शक्तिशाली और संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क के खिलाफ कितनी सख्त और निर्णायक कार्रवाई करती हैं।
“वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज” एवं “समृद्ध भारत समाचार पत्र” इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है और हर महत्वपूर्ण अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।




