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हरिद्वार की पावन धरा पर भागवत अमृत की वर्षा: प्रख्यात कथा व्यास श्री चेतन भाई दवे की वाणी पर झूम उठे श्रद्धालु

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो

हरिद्वार की पावन धरा पर भागवत अमृत की वर्षा: प्रख्यात कथा व्यास श्री चेतन भाई दवे की वाणी पर झूम उठे श्रद्धालु

हरिद्वार  विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार की पवित्र धरा आज भक्ति और अध्यात्म के अनूठे संगम की साक्षी बनी। यहाँ स्थित प्रसिद्ध गीता भवन मंदिर में गुजरात से पधारे देश के प्रख्यात कथा व्यास श्री चेतन भाई दवे के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत कथा का मंगलमय गायन सुनकर उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर होकर झूमने, नाचने और गाने लगे। व्यासपीठ से कथा की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप है। यह दिव्य विग्रह रूपी कथा मनुष्य के जीवन को न केवल धन्य और कृतार्थ करती है, बल्कि इस पावन नगरी हरिद्वार में इसके श्रवण का एक विशेष और अनंत महत्व है।

शास्त्रों की मर्यादा और भक्ति के प्रवाह को साझा करते हुए श्री चेतन भाई ने कहा कि जो श्रद्धालु दूर से भी इस पावन कथा के शब्दों को अपने भीतर आत्मसात कर लेता है, उसके जीवन का उद्धार सुनिश्चित हो जाता है और उसके पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह कृष्णा स्वरूपी श्रीमद् भागवत महापुराण कथा महायज्ञ वास्तव में जीवन कल्याण का ‘सुधारस’ है। इस पृथ्वी लोक पर भटकते हुए मानव के लिए यह कथा ही कल्याण और उद्धार का एकमात्र प्रशस्त मार्ग है। इस पावन पुनीत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन के समस्त क्लेश मिट जाते हैं और आत्मा को परम आनंद की अनुभूति होती है।भक्ति के इस दिव्य प्रवाह को शास्त्रीय मर्यादा देते हुए कथा के केंद्र में इस भाव को रखा गया: *“सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे, तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः।”* इसका सीधा अर्थ यही है कि हम उन श्री कृष्ण को नमन करते हैं जो आनंद स्वरूप हैं और संसार के दुखों का हरण करने वाले हैं। हरिद्वार की इस पवित्र गंगा की लहरों के समीप आयोजित यह कथा महायज्ञ वर्तमान समय में मनुष्य के कल्याण का वह मार्ग है, जो उसे भौतिकता से ऊपर उठाकर आध्यात्मिकता के शिखर पर ले जाता है। इस आयोजन ने पूरे परिसर को कृष्णमयी कर दिया है और प्रत्येक भक्त हृदय में भक्ति का केसरिया रंग घोल दिया है। इस अवसर पर बोलते हुए श्री पवन भाई शास्त्री रावल जी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा जीवन को दिशा प्रदान करते हुए कल्याण की ओर ले जाती है और साथ में इस पावन नगरी हरिद्वार में पृथ्वी लोक पर प्रथम बार इस कथा को सुनाया गया था इस विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार में इस पावन कथा का स्वर्ण करने का अलग ही महत्व है यह मनुष्य के जीवन को आलोकित कर देती है और उसका जीवन खुशियों और आनंद से भर देती है इस अवसर पर यश भाई शास्त्री भावेश भाई चतुर भाई गडरिया बलजी भाई रमेश भाई नाथू भाई देतरोजा वासियानी खोरी दास भाई सहित कई सो लोग कथा श्रवण करने हेतु पधारे हुए हैं

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