

बलौदा बाजार। प्रकृति की गोद में बसे लवन क्षेत्र ने रविवार, 29 मार्च की अलसुबह एक प्रेरणादायक और यादगार पल का साक्षी बनकर यह साबित कर दिया कि जब मनुष्य प्रकृति से जुड़ता है, तो संवेदनाएं भी जागृत होती हैं और संरक्षण का संकल्प भी मजबूत होता है। वन विभाग द्वारा संचालित ‘युवान’ (YUVAN) पहल के अंतर्गत आयोजित बर्ड वॉक ने न केवल पक्षी प्रेमियों को रोमांचित किया, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण का संदेश भी गहराई से दिया।
डीएफओ श्री गणवीर धम्मशील के मार्गदर्शन में सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ यह विशेष पक्षी दर्शन कार्यक्रम करदा टैंक क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां सुबह की पहली किरणों के साथ पक्षियों की मधुर चहचहाहट ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। नगर पंचायत लवन के समीप कोरदा से करदा टैंक के विस्तृत जलग्रहण क्षेत्र (लगभग 4 किलोमीटर) तक फैले इस भ्रमण में प्रतिभागियों ने प्रकृति के अद्भुत रंगों को बेहद करीब से महसूस किया।
इस बर्ड वॉक का कुशल नेतृत्व पक्षी विशेषज्ञ हेमंत वर्मा ने किया, जिन्होंने प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान के वैज्ञानिक तरीकों—जैसे उनकी आवाज (Bird Calls), उड़ान की शैली, व्यवहार और उनके प्राकृतिक आवास (Habitat)—के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जलाशय, घासभूमि और वृक्षों से भरे क्षेत्रों में पक्षियों की गतिविधियों और उनके घोंसलों का सूक्ष्म अवलोकन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को एक जीवंत अनुभव प्राप्त हुआ।
इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही 104 विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का दस्तावेजीकरण, जो इस क्षेत्र की समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिकी का प्रमाण है। जलाशयों में जलपक्षियों की भरमार और खुले क्षेत्रों में सक्रिय पक्षियों की विविधता ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
विशेष आकर्षण बना दुर्लभ पक्षियों का दर्शन
इस बर्ड वॉक की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही दुर्लभ और शक्तिशाली इंडियन ईगल आउल का दर्शन, जो आमतौर पर शांत और चट्टानी क्षेत्रों में ही दिखाई देता है। इसके साथ ही घने वृक्षों में रहने वाले मॉटल्ड वुड आउल के एक साथ 6 सदस्यों का दिखना एक अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण घटना रही। इन दोनों प्रजातियों की उपस्थिति ने इस क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को प्रमाणित कर दिया।
जलाशयों में जीवन की हलचल
लेसर व्हिस्लिंग डक, कॉटन पिग्मी गूज, यूरेशियन कूट, मूरहेन, ग्रे-हेडेड स्वैम्पेन और बार-हेडेड गूज जैसे सैकड़ों जलपक्षियों ने जलाशयों को जीवंत बना दिया। इनके बीच ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट और जैकाना जैसी प्रजातियों की सुंदर उपस्थिति ने दृश्य को और भी आकर्षक बना दिया।
घासभूमि और खुले क्षेत्र की सक्रियता
रेड-वॉटल्ड लैपविंग, येलो-वॉटल्ड लैपविंग और लिटिल रिंग्ड प्लोवर जैसे पक्षियों ने खुले मैदानों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं स्पैरो-लार्क और पिपिट जैसे छोटे पक्षियों ने भी पर्यावरण की विविधता को दर्शाया।
वृक्षों में बसी जीवन की मधुरता
पेड़ों पर स्पॉटेड डव, एशियन कोयल, हूपो, इंडियन रोलर, ड्रोंगो, बुलबुल और बया वीवर जैसे पक्षियों की चहल-पहल ने वातावरण को मधुर बना दिया। वहीं बी-ईटर और रोसी स्टार्लिंग की बड़ी संख्या ने प्रकृति की सुंदरता को और निखार दिया।
शिकारी पक्षियों की ताकत का प्रदर्शन
ओस्प्रे, शिक्र, वेस्टर्न मार्श हैरियर, ब्लैक काइट और ओरिएंटल हनी-बज़र्ड जैसे रैप्टर्स ने अपनी उपस्थिति से खाद्य श्रृंखला की मजबूती का संकेत दिया।
रात्रिचर पक्षियों का दुर्लभ संसार
इंडियन ईगल आउल, मॉटल्ड वुड आउल और स्पॉटेड आउलेट जैसे उल्लुओं का अवलोकन इस आयोजन का सबसे रोमांचक हिस्सा रहा, जिसने प्रतिभागियों को प्रकृति के रहस्यमयी पहलुओं से परिचित कराया।
इस कार्यक्रम में कुल 9 प्रतिभागियों—नरेन्द्र वर्मा, जीवन लाल यादव, टिकेश्वर निषाद, सचिन मनहरे, कृष्णा पैकरा, अंजू वर्मा, तनिषा पटेल, तिनेश्वरी वर्मा और एरिक मलाकी—ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस अनुभव को आत्मसात किया।
पक्षी विशेषज्ञ हेमंत वर्मा ने बताया कि करदा टैंक की घासभूमियां लैपविंग जैसे पक्षियों के प्रजनन के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं, वहीं ऊंचे वृक्ष शिकारी पक्षियों के लिए आदर्श शिकार स्थल प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडियन ईगल आउल और मॉटल्ड वुड आउल की उपस्थिति इस क्षेत्र के सुरक्षित और समृद्ध आवास का स्पष्ट संकेत है।
अंततः, ‘युवान’ पहल का मूल उद्देश्य युवाओं को प्रकृति से जोड़ना और उन्हें जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। लवन में आयोजित यह बर्ड वॉक न केवल एक सफल आयोजन रहा, बल्कि यह एक संदेश भी बनकर उभरा—प्रकृति से जुड़ना ही भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे सशक्त मार्ग है।







