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BIG INVESTIGATION | भारत में ईसाई संपत्तियों का अरबों रुपये का महाघोटाला?

चर्च जमीनों पर कब्ज़े के आरोपों के बीच बना नया ट्रस्ट, शुरू हुई बड़ी लड़ाई!

🔥 BIG INVESTIGATION | भारत में ईसाई संपत्तियों का अरबों रुपये का महाघोटाला? चर्च जमीनों पर कब्ज़े के आरोपों के बीच बना नया ट्रस्ट, शुरू हुई बड़ी लड़ाई! 🔥

भारत में चर्च संपत्तियों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल अब एक बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ रहे हैं। देशभर में फैली ईसाई धार्मिक संस्थाओं की बहुमूल्य जमीनों और संपत्तियों के दुरुपयोग, अवैध हस्तांतरण और कथित घोटालों को लेकर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। इन्हीं चिंताओं के बीच अब एक नई संस्था Custodians of Church Assets Trust (CCAT) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य चर्च संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि दशकों से कई चर्च संस्थाएं विवादों में घिरी रही हैं। आरोप है कि करोड़ों और अरबों रुपये की कीमती जमीनों को फर्जी दस्तावेजों, हेरफेर किए गए न्यासियों और निजी स्वार्थों के चलते बेचा या कब्जा किया गया। कई मामलों में यह भी आरोप सामने आए कि अंदरूनी मिलीभगत के जरिए समुदाय की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप दिया गया, जिससे आम ईसाई समुदाय को भारी नुकसान हुआ।

इन्हीं आरोपों और शिकायतों के मद्देनजर CCAT को एक सुरक्षात्मक और सुधारात्मक कदम के रूप में स्थापित किया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि वह चर्च संपत्तियों की रक्षा करेगा, अवैध लेन-देन को रोकेगा और पारदर्शी शासन व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम करेगा। यह संस्था खुद को “समुदाय की संपत्तियों का संरक्षक” बताते हुए दावा कर रही है कि वह आगे किसी भी प्रकार के शोषण या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी।

इस ट्रस्ट के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई संस्था सार्वजनिक कल्याण से जुड़े नियमों और नीतियों के विपरीत जाकर चर्च संपत्तियों को बेचने, पट्टे पर देने या किराए पर देने का प्रयास करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में कई बड़े विवाद सामने आ सकते हैं और कई संस्थाएं जांच के दायरे में आ सकती हैं।

इस पहल के दायरे में देश की कई प्रमुख चर्च संस्थाएं और संगठन शामिल किए गए हैं, जिनमें चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI), मेथोडिस्ट चर्च, बैपटिस्ट चर्च, एपिस्कोपल मेथोडिस्ट चर्च, कैथोलिक चर्च, सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट, चर्च ऑफ साउथ इंडिया, सीरियन ऑर्थोडॉक्स एवं मलंकारा चर्च, पेंटेकोस्टल स्वतंत्र चर्च, वॉर्डन फ्रेंडली रिलीफ ट्रस्ट, क्रिश्चियन ट्रैक्ट एंड बुक सोसाइटी, हॉलैंड हॉल और म्योराबाद ट्रस्ट जैसे संस्थान शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह ट्रस्ट उन मामलों की भी समीक्षा करेगा, जहां पहले से ही संपत्तियों को लेकर विवाद चल रहे हैं। साथ ही, नए मामलों में तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया जाएगा। इससे साफ है कि यह संस्था केवल कागजी स्तर पर नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।

इस ट्रस्ट की पहली बैठक एक निजी स्थान, डोसा प्लाजा में आयोजित की गई, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े प्रमुख लोग शामिल हुए। इस बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट की अध्यक्ष लिली भावना कॉलर ने की। बैठक में एन.बी. मोंट्रोज़, गाजियाबाद से डॉ. राहुल उठवाल, लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार संजोग वाल्टर, सी.आर. विलियम, मिर्जापुर से जैस्मिन लाल और जयवंत लाल, प्रयागराज से सुदीपा मित्रा, धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अबुल कलम राइन, ठाकुर शिव सागर सिंह, दिल्ली से विवेक मोंट्रोज़ और ट्रस्ट की सचिव डॉ. रमा मोंट्रोज़ सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में चर्च संपत्तियों से जुड़े विभिन्न मामलों पर चर्चा की गई और भविष्य की रणनीति तैयार की गई। सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि समुदाय की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पारदर्शी और प्रभावी रहती है, तो यह चर्च संपत्तियों के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, यह भी देखना होगा कि यह संस्था कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कितनी मजबूती से अपनी बात रख पाती है और कितने मामलों में वास्तविक बदलाव ला पाती है।

यह मुद्दा केवल संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुदाय के अधिकारों, विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश के धार्मिक और सामाजिक ढांचे पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

फिलहाल, इस नए ट्रस्ट के गठन के साथ एक नई बहस शुरू हो गई है—क्या वास्तव में चर्च संपत्तियों में बड़े स्तर पर घोटाले हो रहे हैं, या यह केवल कुछ चुनिंदा मामलों का विस्तार है? आने वाले समय में जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।


रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर

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